नेहरू ने देश की आजादी के लिए 12 वर्ष जेल में बिताए, 17 वर्ष प्रधानमंत्री के रूप में राष्ट्र निर्माण में योगदान दिया- प्रियंका गांधी। 

लोकसभा में वंदे मातरम पर विशेष बहस के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने जवाहरलाल नेहरू की आलोचना का सीधा सामना किया

Dec 9, 2025 - 11:37
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नेहरू ने देश की आजादी के लिए 12 वर्ष जेल में बिताए, 17 वर्ष प्रधानमंत्री के रूप में राष्ट्र निर्माण में योगदान दिया- प्रियंका गांधी। 
नेहरू ने देश की आजादी के लिए 12 वर्ष जेल में बिताए, 17 वर्ष प्रधानमंत्री के रूप में राष्ट्र निर्माण में योगदान दिया- प्रियंका गांधी। 

लोकसभा में वंदे मातरम पर विशेष बहस के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने जवाहरलाल नेहरू की आलोचना का सीधा सामना किया, भारत की मजबूत संस्थाओं के निर्माण में उनके योगदान पर जोर देकर कहा कि ये संस्थाएं आज देश की प्रगति की रीढ़ बनी हुई हैं। यह पहली बार था जब प्रियंका गांधी ने लोकसभा में अपनी वक्तव्य दिया, जो 32 मिनट लंबा था और जिसमें उन्होंने नेहरू के साथ-साथ इंदिरा गांधी के योगदान को भी उजागर किया। बहस का विषय वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर था, लेकिन प्रियंका ने इसे नेहरू की विरासत को धूमिल करने का प्रयास बताते हुए जवाब दिया। उन्होंने कहा कि नेहरू ने देश की आजादी के लिए 12 वर्ष जेल में बिताए, जो वर्तमान प्रधानमंत्री के सत्ता में रहने के समान अवधि है, और उसके बाद 17 वर्ष प्रधानमंत्री के रूप में राष्ट्र निर्माण में योगदान दिया। प्रियंका ने सवाल उठाया कि नेहरू की आलोचना करने वाले वर्तमान कार्यों पर ध्यान दें, न कि अतीत पर।

प्रियंका गांधी ने नेहरू के संस्थागत योगदान की विस्तृत सूची प्रस्तुत की, जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम जैसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल), भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) और ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ओएनजीसी) शामिल थे। उन्होंने कहा कि इन संस्थाओं ने भारत को आत्मनिर्भरता की राह पर डाला। इसके अलावा, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम), ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एआईआईएमएस), भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो), रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ), नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन (एनटीपीसी), स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) और गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (गेल) जैसी संस्थाओं का उल्लेख किया। प्रियंका ने जोर दिया कि यदि नेहरू ने इसरो की स्थापना न की होती तो मंगलयान संभव न होता, डीआरडीओ न होता तो तेजस विमान न बनता, आईआईटी और आईआईएम न होते तो सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका न होती। बहस के दौरान प्रियंका ने वंदे मातरम के ऐतिहासिक संदर्भ को भी स्पष्ट किया, कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1875 में इसका प्रारंभिक रूप लिखा और 1882 में आनंदमठ में चार अतिरिक्त छंद जोड़े। 1896 में रवींद्रनाथ टैगोर ने कांग्रेस अधिवेशन में पहली बार इसे गाया। उन्होंने नेहरू और सुभाष चंद्र बोस के बीच पत्राचार का हवाला दिया, जिसमें 1937 के कलकत्ता कांग्रेस अधिवेशन से पहले बोस ने नेहरू को पत्र लिखा था। प्रियंका ने कहा कि कांग्रेस वर्किंग कमिटी ने महात्मा गांधी, नेहरू, सरदार पटेल और टैगोर की उपस्थिति में पहले दो छंदों को राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया, क्योंकि बाद के छंद सांप्रदायिक रूप से व्याख्यायित हो सकते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान बहस का उद्देश्य वेस्ट बंगाल चुनावों से पहले राजनीतिक लाभ लेना और लोगों के वास्तविक मुद्दों जैसे बेरोजगारी और मूल्यवृद्धि से ध्यान भटकाना है।

प्रियंका गांधी ने नेहरू पर लगाए जाने वाले आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि देश को नेहरू, इंदिरा और राजीव गांधी की गलतियों, परिवारवाद और शिकायतों पर बहस करनी चाहिए ताकि यह अध्याय हमेशा के लिए बंद हो जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि जैसे वंदे मातरम पर 10 घंटे की बहस हो रही है, वैसे ही नेहरू पर बहस तय समय पर हो। प्रियंका ने कहा कि नेहरू ने देश के लिए जीया और अंतिम सांस तक सेवा की। उन्होंने वर्तमान सांसदों को याद दिलाया कि लोग उन्हें समस्याओं के समाधान के लिए संसद भेजते हैं, न कि अतीत की बहस के लिए। बहस में सत्ताधारी सदस्यों द्वारा बिहार चुनावों में हार का उल्लेख करने पर प्रियंका ने कहा कि कितनी भी हार हो, वे विचारधारा और देश के लिए लड़ते रहेंगे।

नेहरू के योगदान को रेखांकित करते हुए प्रियंका ने कहा कि कोविड महामारी के दौरान एआईआईएमएस जैसी संस्थाओं ने देश को मजबूत बनाया। उन्होंने तर्क दिया कि यदि नेहरू ने ये संस्थाएं न बनाई होतीं तो विकसित भारत का सपना कैसे साकार होता। प्रियंका ने वर्तमान सरकार पर आरोप लगाया कि वे नेहरू के नाम को किताबों और भाषणों से मिटाने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका कभी मिटाई नहीं जा सकती। उन्होंने कहा कि नेहरू ने लोकतंत्र को मजबूत किया और आत्मनिर्भर भारत की नींव रखी। बहस के दौरान प्रियंका ने वंदे मातरम को मातृभूमि के लिए बलिदान की भावना से जोड़ा, कहा कि यह गीत लोगों के दिलों में बसा है और बहस की कोई आवश्यकता नहीं। प्रियंका गांधी का यह वक्तव्य उनके वायनाड लोकसभा क्षेत्र से नवंबर 2024 में जीत के बाद पहला प्रमुख भाषण था। उन्होंने सत्ताधारी दल पर भय का माहौल बनाने, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दबाने, असहमति को कुचलने और विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया। प्रियंका ने कहा कि चुनी हुई सरकारों को गिराने के लिए धन का उपयोग हो रहा है। उन्होंने वंदे मातरम बहस को महात्मा गांधी और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को अपमानित करने का प्रयास बताया। प्रियंका ने नेहरू को आधुनिक भारत का निर्माता कहा, जिनकी दूरदर्शिता ने शिक्षा, विज्ञान, उद्योग, तकनीक और आर्थिक संस्थाओं की नींव रखी।

नेहरू की संस्थाओं ने भारत को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाया, प्रियंका ने कहा। आईआईटी और आईआईएम ने इंजीनियरों और प्रबंधकों को तैयार किया, जो आज दुनिया भर में मान्यता प्राप्त हैं। एचएएल और डीआरडीओ ने रक्षा क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाया, जबकि ओएनजीसी और गेल ने ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित की। एनटीपीसी और सेल ने औद्योगिक विकास को गति दी। प्रियंका ने जोर दिया कि ये संस्थाएं नेहरू के विचार से उपजीं, जो देश को आगे ले जाने वाली थीं। उन्होंने कहा कि नेहरू ने जेल से निकलकर देश को नई दिशा दी, जबकि वर्तमान नेतृत्व को वर्तमान जिम्मेदारियों पर ध्यान देना चाहिए। बहस में प्रियंका ने सुभाष चंद्र बोस और नेहरू के पत्रों का हवाला देकर कहा कि 1937 में बोस ने नेहरू को पत्र लिखा था कि कलकत्ता में चर्चा करेंगे। नेहरू ने लिखा था कि वंदे मातरम के खिलाफ हंगामा सांप्रदायिक तत्वों द्वारा रचित है। टैगोर ने नेहरू से मुलाकात के बाद कहा था कि पहले दो छंद महत्वपूर्ण हैं और बाद के छंद गलत व्याख्या के कारण विवादास्पद हो सकते हैं। कांग्रेस वर्किंग कमिटी ने इन छंदों को अपनाया। प्रियंका ने कहा कि यह निर्णय समावेशी था, न कि तुष्टिकरण। उन्होंने वर्तमान बहस को सांप्रदायिक विभाजन बढ़ाने का प्रयास बताया। प्रियंका गांधी ने नेहरू की आलोचना को चुनौती देते हुए कहा कि यदि नेहरू न होते तो आज की उपलब्धियां संभव न होतीं। उन्होंने मंगलयान, तेजस और आईटी क्रांति का उदाहरण दिया। प्रियंका ने कहा कि नेहरू ने लोकतंत्र को मजबूत किया, न कि सत्तावादी शासन चलाया। बहस के अंत में उन्होंने लोगों की समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की। यह वक्तव्य नेहरू की विरासत को पुनः स्थापित करने का प्रयास था, जो बार-बार आलोचना का शिकार हो रही है। प्रियंका ने कहा कि नेहरू का योगदान अमिट है।

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