पंजाब की सियासत में सिद्धू की वापसी का संकेत, पत्नी नवजोत कौर का खुलासा, CM फेस घोषित होने पर ही सक्रिय होंगे नवजोत सिंह सिद्धू।
पंजाब की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनावों से ठीक 14 महीने पहले हलचल तेज हो गई है, जहां पूर्व क्रिकेटर और कांग्रेस नेता नवजोत सिंह
पंजाब की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनावों से ठीक 14 महीने पहले हलचल तेज हो गई है, जहां पूर्व क्रिकेटर और कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू की सक्रिय राजनीति में वापसी की अटकलें जोर पकड़ रही हैं। उनकी पत्नी और कांग्रेस नेता नवजोत कौर सिद्धू ने 6 दिसंबर 2025 को चंडीगढ़ के लोकभवन में पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए बड़ा खुलासा किया। उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस नवजोत सिंह सिद्धू को पार्टी का मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करती है, तो वे सक्रिय राजनीति में वापसी करेंगे। नवजोत कौर ने यह भी दावा किया कि पंजाब कांग्रेस में आंतरिक कलह के कारण पांच नेता पहले से ही मुख्यमंत्री पद के दावेदार हैं, जो सिद्धू को आगे आने से रोक रहे हैं। नवजोत कौर सिद्धू की राज्यपाल से मुलाकात राज्य के बिगड़ते कानून व्यवस्था की स्थिति, अपराध दर में वृद्धि और अन्य प्रशासनिक मुद्दों पर केंद्रित रही। मुलाकात के बाद लोकभवन से बाहर निकलते ही मीडिया ने उन्हें घेर लिया और नवजोत सिंह सिद्धू की राजनीतिक सक्रियता पर सवाल दागे।
पत्रकारों ने पूछा कि नवजोत सिंह सिद्धू कब राजनीति में सक्रिय होंगे, जिसका जवाब देते हुए नवजोत कौर ने कहा कि उनका पति कांग्रेस से मजबूती से जुड़े हुए हैं और पार्टी नेता प्रियंका गांधी वाड्रा का सम्मान करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सिद्धू की वापसी का फैसला पार्टी हाईकमान पर निर्भर करेगा, लेकिन अगर उन्हें मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाया जाता है, तो वे निश्चित रूप से सक्रिय हो जाएंगे। नवजोत कौर ने कहा कि अन्यथा सिद्धू अपनी वर्तमान आय से संतुष्ट हैं और अच्छी कमाई कर रहे हैं। यह बयान पंजाब कांग्रेस में सिद्धू के समर्थकों और विरोधियों के बीच चल रही खींचतान को दर्शाता है। नवजोत कौर ने पंजाब कांग्रेस में व्याप्त आंतरिक कलह पर भी निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि राज्य इकाई में पहले से ही पांच नेता मुख्यमंत्री पद के लिए दावेदारी कर रहे हैं, जो सिद्धू को आगे बढ़ने नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि यह कलह कांग्रेस को चुनावों में हार की ओर धकेल रही है, क्योंकि ये नेता आपस में ही पार्टी को कमजोर करने पर तुले हुए हैं। नवजोत कौर ने जोर देकर कहा कि सिद्धू का राजनीति में प्रवेश हमेशा जनकल्याण के लिए रहा है, न कि व्यापार के लिए। उन्होंने कहा कि अगर किसी पार्टी को सिद्धू को सत्ता का अधिकार मिलता है, तो वे पंजाब को सुधारने में सक्षम हैं। यह बयान 2022 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की हार के बाद सिद्धू के इस्तीफे की याद दिलाता है, जब उन्होंने पार्टी अध्यक्ष पद से त्यागपत्र दिया था।
नवजोत कौर ने एक और महत्वपूर्ण खुलासा करते हुए कहा कि पंजाब में मुख्यमंत्री पद हासिल करने के लिए 500 करोड़ रुपये का सूटकेस देना पड़ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी ने उनसे सीधे मांग नहीं की, लेकिन जो व्यक्ति इतनी बड़ी राशि का भुगतान करता है, वही पद पर पहुंचता है। नवजोत कौर ने कहा कि उनके पास ऐसी कोई राशि नहीं है, लेकिन वे पंजाब को परिणाम दे सकते हैं और राज्य को सुनहरा बना सकते हैं। उन्होंने पंजाबियत और राज्य के विकास पर जोर दिया, कहा कि वे हमेशा पंजाब की बात करते हैं, लेकिन राजनीतिक पद के लिए धन का लेन-देन नहीं करेंगे। यह टिप्पणी पंजाब की राजनीति में कथित भ्रष्टाचार और पैसे के दम पर टिकट व पद वितरण की प्रथा पर सवाल खड़े करती है। इस बयान ने पंजाब की अन्य पार्टियों को तुरंत प्रतिक्रिया देने का मौका दिया। आम आदमी पार्टी के मुख्य प्रवक्ता कुलदीप सिंह ढालीवाल ने इसे कांग्रेस की आंतरिक सच्चाई बताया और कहा कि सिद्धू की शर्तीय राजनीति दर्शाती है कि वे पंजाब को सौदेबाजी का सामान बना रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कांग्रेस सिद्धू को मुख्यमंत्री चेहरा नहीं बनाती, तो क्या पंजाब को नुकसान होगा। ढालीवाल ने कहा कि सिद्धू ने पहले भी पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष, सांसद, विधायक और कैबिनेट मंत्री के पद संभाले, लेकिन अब 500 करोड़ की मांग का खुलासा कर रहे हैं। उन्होंने पूछा कि यह राशि कहां जाती है, क्या राज्य इकाई अध्यक्ष, हाईकमान, राहुल गांधी या मल्लिकार्जुन खड़गे को।
भाजपा ने भी नवजोत कौर के बयान का इस्तेमाल कांग्रेस पर हमलावर होने के लिए किया। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने कहा कि यह कांग्रेस की मनी बैग राजनीति को उजागर करता है, जहां वरिष्ठ नेता की पत्नी स्वीकार कर रही है कि मुख्यमंत्री पद खरीदा जा सकता है। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी का नैतिक पतन हो चुका है। पंजाब भाजपा प्रमुख सुनील जाखड़ ने कहा कि उन्हें भी कांग्रेस में रहते हुए इसी तरह की स्थिति का सामना करना पड़ा था, जहां उन्हें बताया गया था कि अच्छे काम से नहीं, बल्कि 350 करोड़ रुपये से मुख्यमंत्री पद मिलता है। जाखड़ ने कहा कि उनके पास ऑडियो रिकॉर्डिंग नहीं है, लेकिन शायद नवजोत कौर के पास हो। उन्होंने सिद्धू को धार्मिक मानदंड के आधार पर योग्य बताया, क्योंकि वे सिख हैं।नवजोत सिंह सिद्धू का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा है। वे मूल रूप से भाजपा से जुड़े थे, लेकिन 2017 में कांग्रेस में शामिल हो गए। 2019 के लोकसभा चुनाव में अमृतसर से कांग्रेस के टिकट पर जीत हासिल की। 2021 में उन्हें पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया, लेकिन 2022 के विधानसभा चुनावों में पार्टी की हार के बाद इस्तीफा दे दिया। उसी चुनाव में वे अमृतसर पूर्व सीट से हार गए। उसके बाद सिद्धू ने राजनीति से दूरी बना ली और IPL 2024 में क्रिकेट कमेंट्री में वापसी की। अप्रैल 2025 में उन्होंने अपना यूट्यूब चैनल 'नवजोत सिद्धू ऑफिशियल' लॉन्च किया, जहां वे जीवन अनुभव, क्रिकेट, कमेंट्री, प्रेरणादायक बातें और लाइफस्टाइल पर वीडियो शेयर करते हैं। 2024 के लोकसभा चुनावों में भी उन्होंने कैंपेन नहीं किया।
सिद्धू ने अप्रैल 2025 में यूट्यूब चैनल लॉन्च करते हुए राजनीतिक वापसी पर कहा था कि समय बताएगा, क्योंकि उनकी राजनीति हमेशा जनकल्याण के लिए रही है, न कि व्यवसाय के लिए। नवजोत कौर के बयान ने इन अटकलों को हवा दी है कि सिद्धू 2027 के चुनावों में वापसी कर सकते हैं, लेकिन शर्त के साथ। उन्होंने कहा कि सिद्धू प्रियंका गांधी वाड्रा से जुड़े हुए हैं और अगर हाईकमान उनकी क्षमता को पहचानता है, तो स्थिति अलग होगी। नवजोत कौर ने भाजपा में वापसी के सवाल पर कहा कि वे सिद्धू की ओर से कुछ नहीं कह सकतीं। यह घटनाक्रम पंजाब कांग्रेस के लिए चुनौतीपूर्ण है, जहां आगामी चुनावों में पार्टी को एकजुट होने की जरूरत है। 2022 के चुनावों में कांग्रेस ने 92 सीटें जीतीं, लेकिन AAP की लहर में सरकार गंवा दी। अब 2027 के लिए पार्टी में कई चेहरे उभर रहे हैं, जिनमें अमरिंदर सिंह राजा वाडिंग, प्रताप सिंह बाजवा और अन्य शामिल हैं। सिद्धू के समर्थक मानते हैं कि उनकी लोकप्रियता युवाओं और शहरी मतदाताओं में मजबूत है, लेकिन आंतरिक विरोध उनके रास्ते में बाधा है। नवजोत कौर ने कहा कि सिद्धू पंजाब को सुनहरा राज्य बना सकते हैं, लेकिन इसके लिए सत्ता का अधिकार जरूरी है।
राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात के दौरान नवजोत कौर ने कानून व्यवस्था पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में अपराध बढ़ रहे हैं और सरकार की लापरवाही से स्थिति बिगड़ रही है। मुलाकात के बाद उन्होंने राज्यपाल को विभिन्न मुद्दों पर ज्ञापन सौंपा। यह मुलाकात पंजाब में बढ़ते अपराध, ड्रग्स समस्या और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को उठाने का प्रयास था। नवजोत कौर ने कहा कि सिद्धू हमेशा पंजाब के हितों की बात करते हैं और राज्य को समृद्ध बनाने के लिए तैयार हैं। नवजोत कौर का बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। AAP ने इसे कांग्रेस की कमजोरी बताया, जबकि भाजपा ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। कांग्रेस की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन पार्टी सूत्रों का कहना है कि हाईकमान इस मुद्दे पर विचार करेगा। 2027 के चुनावों में पंजाब में AAP सत्तारूढ़ है, लेकिन कांग्रेस और भाजपा-एसएएस गठबंधन मजबूत चुनौती दे सकते हैं। सिद्धू की संभावित वापसी पार्टी के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है, अगर शर्त पूरी होती है।
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