बिहार चुनाव 2025: लोक गायिका मैथिली ठाकुर ने थामा भाजपा का दामन, कहा- नीतीश कुमार से प्रेरित होकर समाज सेवा का संकल्प।
बिहार की राजनीति में मंगलवार को एक नया संगीतमय मोड़ आ गया। प्रसिद्ध लोक गायिका और भजन सम्राज्ञी मैथिली ठाकुर ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। पटना के होटल
बिहार की राजनीति में मंगलवार को एक नया संगीतमय मोड़ आ गया। प्रसिद्ध लोक गायिका और भजन सम्राज्ञी मैथिली ठाकुर ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। पटना के होटल चाणक्य स्थित भाजपा मीडिया सेंटर में आयोजित विशेष मिलन समारोह में बिहार भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता दिलाई। यह कदम बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से ठीक पहले उठाया गया है, जिससे सियासी हलचल तेज हो गई है। मैथिली ठाकुर, जो मिथिला क्षेत्र की बेटी के रूप में जानी जाती हैं, ने शामिल होते ही कहा कि उनका उद्देश्य चुनाव लड़ना नहीं, बल्कि समाज सेवा करना है। उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से प्रेरणा लेने का जिक्र किया और कहा कि वे एनडीए सरकार के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए आई हैं। यह प्रवेश न केवल भाजपा को सांस्कृतिक चेहरे के रूप में मजबूत करता है, बल्कि मिथिला क्षेत्र में पार्टी की पैठ बढ़ाने का प्रयास भी माना जा रहा है।
मैथिली ठाकुर का जन्म 25 वर्ष पहले मधुबनी जिले के एक साधारण परिवार में हुआ था। उनके पिता रमेश ठाकुर एक सामान्य व्यवसायी हैं, जबकि मां घर संभालती हैं। बचपन से ही संगीत के प्रति उनका लगाव देखकर परिवार ने उन्हें क्लासिकल म्यूजिक की ट्रेनिंग दी। मात्र 11 साल की उम्र में वे जी टीवी के लोकप्रिय चिल्ड्रन शो 'सारेगामापा लिटिल चैंप्स' में शामिल हुईं। इस शो ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। मैथिली ने मिथिला लोक संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनके गीत जैसे 'लागे नाहीं छोड़ देब लउका', 'राम भजन' और 'मिथिला की बेटी' ने करोड़ों दिलों को छुआ। वे यूट्यूब पर लाखों सब्सक्राइबर्स वाली चैनल की मालकिन हैं, जहां उनके भजन और लोकगीत वायरल होते रहते हैं। मैथिली ने कई फिल्मों में भी गीत गाए हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिथिला संस्कृति का प्रचार किया है। 2023 में उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से सम्मानित भी किया गया। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सोशल मीडिया पर उनके फॉलोअर्स की संख्या करोड़ों में है।
भाजपा में शामिल होने से पहले मैथिली ठाकुर पर सियासी अटकलों का दौर चल रहा था। हाल ही में उनकी भाजपा चुनाव प्रभारी विनोद तावड़े और केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय के साथ तस्वीरें वायरल हुईं, जिसके बाद चर्चाएं तेज हो गईं। मैथिली के पिता रमेश ठाकुर ने भी तावड़े से मुलाकात की थी। इन मुलाकातों के बाद यह साफ हो गया कि मैथिली राजनीति की ओर कदम बढ़ा रही हैं। मंगलवार दोपहर पटना पहुंचीं मैथिली को सीधे भाजपा मीडिया सेंटर ले जाया गया। वहां प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने उनका स्वागत किया। जायसवाल ने कहा कि मैथिली ठाकुर जैसी कलाकार का भाजपा परिवार में आना गौरव की बात है। वे मिथिला की बेटी हैं और पूरी दुनिया उन्हें सलाम करती है। हम उनका इस्तेमाल प्रचार के लिए नहीं, बल्कि समाज सेवा के लिए करेंगे। समारोह में पूर्व राजद विधायक भरत बिंद भी भाजपा में शामिल हुए, जिससे कार्यक्रम और भव्य हो गया। जायसवाल ने कहा कि आने वाले दिनों में महागठबंधन के कई नेता भाजपा में आएंगे।
कार्यक्रम के बाद मैथिली ठाकुर ने मीडिया से खुलकर बात की। उन्होंने कहा, 'बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से प्रेरित होकर आज मैं उनके सहयोग के लिए यहां पर खड़ी हूं। मैं समाज सेवा के लिए आई हूं और उनके विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने आई हूं। मैं मिथिला की बेटी हूं और मेरा प्राण मिथिलांचल में बसता है।' मैथिली ने स्पष्ट किया कि उनका चुनाव लड़ना उद्देश्य नहीं है। वे पार्टी के हर निर्देश का पालन करेंगी। अगर पार्टी कहेगी तो वे प्रचार में उतरेंगी, लेकिन मुख्य लक्ष्य विकास और सेवा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की और कहा कि मोदी जी हमेशा प्रेरणा देते हैं। एनडीए सरकार के विकास कार्यों से प्रभावित होकर उन्होंने यह फैसला लिया। मैथिली ने मिथिला संस्कृति को बढ़ावा देने का भी वादा किया। उन्होंने कहा कि संगीत के माध्यम से वे हमेशा समाज को जोड़ती रहीं, अब राजनीतिक मंच से यह काम जारी रखेंगी। उनकी यह बातें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईं। एक वीडियो में वे भावुक नजर आईं और कहा कि राजनीति में आने का मन पहले नहीं था, लेकिन तावड़े जी और राय जी की बातों से नजरिया बदला।
मैथिली ठाकुर के भाजपा में शामिल होने से बिहार चुनाव 2025 के समीकरण बदल सकते हैं। चर्चा है कि उन्हें दरभंगा जिले की अलीनगर विधानसभा सीट से टिकट मिल सकता है। यह सीट भाजपा का गढ़ रही है, लेकिन 2020 में यहां से विधायक मिश्रीलाल यादव हैं। उनके टिकट कटने की संभावना जताई जा रही है। अलीनगर में मुस्लिम और यादव वोटरों की अच्छी संख्या है, लेकिन मैथिली की लोकप्रियता से भाजपा को फायदा हो सकता है। कुछ स्रोतों के अनुसार, वारिसनगर सीट से भी उनकी दावेदारी है। मैथिली ने अपने गांव से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी, लेकिन पार्टी फैसला लेगी। भाजपा की रणनीति साफ है कि मैथिली को प्रचार का चेहरा बनाकर युवाओं और महिलाओं को जोड़ा जाए। मिथिला क्षेत्र में उनकी पकड़ मजबूत है, जहां लोक संगीत का बोलबाला है। विपक्षी दल राजद ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी। राजद प्रवक्ता ने कहा कि भाजपा कलाकारों को सियासी मोहरा बना रही है। लेकिन भाजपा नेता इसे सांस्कृतिक एकीकरण का कदम बता रहे हैं।
इस प्रवेश से भाजपा कार्यकर्ताओं में दो राय हैं। दरभंगा और मधुबनी के कुछ स्थानीय नेता पटना पहुंचे और विरोध प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि बाहरी कलाकार को टिकट देकर स्थानीय कार्यकर्ताओं का अपमान हो रहा है। एक नेता ने कहा कि मैथिली ने कभी राजनीति का अनुभव नहीं लिया, फिर वे कैसे विधायक बनेंगी। लेकिन प्रदेश नेतृत्व ने विरोध को दबा दिया। जायसवाल ने कार्यकर्ताओं से अपील की कि मैथिली पार्टी की ताकत बढ़ाएंगी। सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई। कुछ यूजर्स ने उन्हें बधाई दी, तो कुछ ने वंशवाद पर सवाल उठाए। एक पोस्ट में लिखा गया कि भाजपा में अब गायकों का बोलबाला हो गया। मैथिली के फैंस खुश हैं और कह रहे हैं कि वे मिथिला का सम्मान बढ़ाएंगी।
मैथिली ठाकुर का राजनीति में प्रवेश बिहार के सांस्कृतिक परिदृश्य को नया आयाम देगा। वे भोजपुरी गायकों मनोज तिवारी और पवन सिंह की तरह भाजपा का चेहरा बन सकती हैं। तिवारी दिल्ली मेयर से सांसद बने, जबकि पवन सिंह पूर्वांचल में सक्रिय हैं। मैथिली की तुलना उनसे की जा रही है। लेकिन मैथिली ने साफ कहा कि उनका फोकस सेवा पर है, न कि सत्ता पर। उन्होंने नीतीश कुमार के विकास मॉडल की तारीफ की, जो एनडीए का हिस्सा है। बिहार चुनाव नवंबर में हैं, और भाजपा 160 से ज्यादा सीटों पर दावा कर रही है। मैथिली का प्रवेश एनडीए को मजबूत कर सकता है। विपक्ष तेजस्वी यादव की अगुवाई में हमलावर है, लेकिन भाजपा विकास और संस्कृति पर जोर दे रही है।
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