31 महीने बाद सीएम योगी से मिले बृजभूषण शरण सिंह- गिले-शिकवे मिटाने की मुलाकात या सियासी रणनीति?

Political News: उत्तर प्रदेश की राजनीति में हाल ही में एक ऐसी घटना हुई, जिसने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी। कैसरगंज से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के पूर्व ....

Jul 23, 2025 - 11:30
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31 महीने बाद सीएम योगी से मिले बृजभूषण शरण सिंह- गिले-शिकवे मिटाने की मुलाकात या सियासी रणनीति?
31 महीने बाद सीएम योगी से मिले बृजभूषण शरण सिंह- गिले-शिकवे मिटाने की मुलाकात या सियासी रणनीति?

उत्तर प्रदेश की राजनीति में हाल ही में एक ऐसी घटना हुई, जिसने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी। कैसरगंज से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने 21 जुलाई, 2025 को लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके सरकारी आवास, 5 कालिदास मार्ग, पर मुलाकात की। यह मुलाकात करीब 31 महीने बाद हुई, जो कई मायनों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बृजभूषण ने इस मुलाकात के बाद स्पष्ट किया कि वह खुद सीएम से मिलने नहीं गए थे, बल्कि योगी आदित्यनाथ ने उन्हें बुलाया था। उन्होंने इसे एक व्यक्तिगत मुलाकात बताया, जिसमें गिले-शिकवे साझा किए गए, लेकिन सियासी जानकार इसे 2027 के विधानसभा चुनावों की रणनीति से जोड़कर देख रहे हैं।

बृजभूषण शरण सिंह और योगी आदित्यनाथ के बीच लंबे समय से तनाव की खबरें सामने आती रही हैं। बृजभूषण, जो पूर्वांचल की राजनीति में एक कद्दावर नेता माने जाते हैं, कई बार योगी सरकार की नीतियों और प्रशासनिक फैसलों की खुलकर आलोचना करते रहे हैं। उन्होंने समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव को “छोटा भाई” कहकर तारीफ की और सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार और ठेकों में धांधली जैसे मुद्दों पर सवाल उठाए। जनवरी 2023 में उनके खिलाफ महिला पहलवानों द्वारा यौन शोषण के आरोप लगने के बाद से उनकी योगी सरकार से दूरी और बढ़ गई थी। इस दौरान बृजभूषण ने यह फैसला किया था कि वह तब तक मुख्यमंत्री से नहीं मिलेंगे, जब तक उन्हें खुद न बुलाया जाए।

2023 में गोंडा में बृजभूषण के जन्मदिन के अवसर पर योगी आदित्यनाथ का एक कार्यक्रम प्रस्तावित था, जो रद्द हो गया। इस घटना ने दोनों नेताओं के बीच तनाव को और बढ़ा दिया। बृजभूषण ने तब एक अधिकारी से स्पष्ट कहा था, “जब तक मुख्यमंत्री मुझे नहीं बुलाएंगे, मैं उनसे मिलने नहीं जाऊंगा।” इस पृष्ठभूमि में, 21 जुलाई, 2025 की मुलाकात को एक महत्वपूर्ण घटना के रूप में देखा जा रहा है। बृजभूषण ने दावा किया कि यह मुलाकात मुख्यमंत्री के बुलावे पर हुई, जिसमें कोई राजनीतिक चर्चा नहीं हुई, बल्कि यह एक पारिवारिक और व्यक्तिगत बातचीत थी।

21 जुलाई, 2025 को बृजभूषण शरण सिंह लखनऊ में मुख्यमंत्री के सरकारी आवास पर पहुंचे। यह मुलाकात करीब 30 से 55 मिनट तक चली, जैसा कि विभिन्न स्रोतों ने बताया। मुलाकात के बाद बृजभूषण ने मीडिया से बातचीत में कहा, “मैं खुद मिलने नहीं गया था। मुख्यमंत्री ने मुझे बुलाया था, इसलिए मैं गया। यह मुलाकात 31 महीने बाद हुई। मेरे और उनके बीच 56 साल पुराना रिश्ता है। हमने बस अपने गिले-शिकवे और दुख-सुख साझा किए। इसमें कोई राजनीति नहीं थी।” हालांकि, उनकी बॉडी लैंग्वेज और सीमित जवाबों से कुछ स्रोतों ने अनुमान लगाया कि वह मुलाकात से पूरी तरह संतुष्ट नहीं थे।

बृजभूषण ने यह भी बताया कि जनवरी 2023 में उनके खिलाफ लगे आरोपों के बाद उन्होंने अपनी लड़ाई खुद लड़ने का फैसला किया था। उन्होंने कहा, “मैंने तय किया था कि यह मेरी लड़ाई है, और मैं इसे अकेले लडूंगा।” इस दौरान उनके बेटे—प्रतीक भूषण सिंह (गोंडा सदर से बीजेपी विधायक) और करण भूषण सिंह (कैसरगंज से बीजेपी सांसद)—मुख्यमंत्री से मिलते रहे, लेकिन बृजभूषण ने खुद दूरी बनाए रखी।

  • सियासी मायने और अटकलें

हालांकि बृजभूषण इस मुलाकात को व्यक्तिगत और शिष्टाचार भेंट बता रहे हैं, लेकिन सियासी गलियारों में इसे 2027 के विधानसभा चुनावों और बीजेपी की संगठनात्मक रणनीति से जोड़ा जा रहा है। पूर्वांचल में बृजभूषण का मजबूत जनाधार है, खासकर गोंडा, बलरामपुर, बहराइच, और श्रावस्ती जैसे क्षेत्रों में। उन्हें पूर्वांचल का “किंगमेकर” माना जाता है। उनकी सियासी ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में उनके बेटे करण भूषण सिंह ने कैसरगंज से जीत हासिल की, भले ही बृजभूषण को टिकट नहीं मिला।

सूत्रों के अनुसार, यह मुलाकात बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व की पहल पर हो सकती है, ताकि 2027 के चुनावों से पहले पार्टी में एकजुटता का संदेश दिया जाए। 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी का उत्तर प्रदेश में प्रदर्शन अपेक्षा से कमजोर रहा, और समाजवादी पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। ऐसे में, बृजभूषण जैसे प्रभावशाली नेताओं को साथ लाना बीजेपी के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है। कुछ जानकारों का मानना है कि इस मुलाकात के बाद बृजभूषण को पार्टी संगठन में कोई बड़ा पद मिल सकता है।

दूसरी ओर, कुछ स्रोतों ने संकेत दिया कि यह मुलाकात पूरी तरह संतोषजनक नहीं रही। बृजभूषण की बॉडी लैंग्वेज और उनके सीमित जवाबों से लगता है कि उनकी अपेक्षाएं पूरी नहीं हुईं। गोरखपुर और देवीपाटन क्षेत्रों में ठेकों और सरकारी कामकाज को लेकर बृजभूषण और योगी सरकार के बीच तनाव की बातें भी सामने आई हैं। बृजभूषण की बेबाक शैली और प्रशासनिक भ्रष्टाचार पर उनके बयानों ने भी इस दूरी को बढ़ाया था।

  • बृजभूषण का राजनीतिक सफर

बृजभूषण शरण सिंह उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक दबंग और प्रभावशाली चेहरा रहे हैं। वह छह बार सांसद रह चुके हैं—दो बार कैसरगंज, दो बार गोंडा, और एक बार बलरामपुर से। उनकी पत्नी भी एक बार सांसद रह चुकी हैं। वह भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के अध्यक्ष रहे और राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। हालांकि, 2023 में महिला पहलवानों द्वारा यौन शोषण के आरोपों के बाद उनकी सियासी राह मुश्किल हो गई थी। बीजेपी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में उनका टिकट काट दिया, और उनकी जगह उनके बेटे करण भूषण को उम्मीदवार बनाया गया।

बृजभूषण की समाजवादी पार्टी के प्रति नरम रुख और अखिलेश यादव की तारीफ ने भी सियासी अटकलों को जन्म दिया था। कुछ समय पहले उन्होंने अखिलेश को “कृष्ण का वंशज” तक कहा था, जिससे यह कयास लगे कि वह बीजेपी से अलग राह चुन सकते हैं। लेकिन इस मुलाकात ने इन अटकलों पर कुछ हद तक विराम लगा दिया।

यह मुलाकात उत्तर प्रदेश की राजनीति में कई बदलाव ला सकती है। पूर्वांचल में बृजभूषण का प्रभाव निर्विवाद है, और उनकी नाराजगी बीजेपी के लिए नुकसानदायक हो सकती है। खासकर तब, जब समाजवादी पार्टी ने आजमगढ़ में पीडीए भवन बनाकर पूर्वांचल में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की है। बीजेपी के लिए बृजभूषण को साथ लाना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि वह ठाकुर समुदाय में मजबूत प्रभाव रखते हैं, जो पूर्वांचल की कई सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाता है।

हालांकि, कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह मुलाकात सिर्फ एक औपचारिक शिष्टाचार थी, और दोनों नेताओं के बीच गहरी सियासी सहमति बनना अभी बाकी है। बृजभूषण की बेबाक छवि और योगी की सख्त प्रशासनिक शैली को देखते हुए, दोनों के बीच तनाव पूरी तरह खत्म होने में समय लग सकता है।

बृजभूषण शरण सिंह और योगी आदित्यनाथ की 31 महीने बाद हुई मुलाकात ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। बृजभूषण का दावा कि वह मुख्यमंत्री के बुलावे पर गए, और यह मुलाकात व्यक्तिगत थी, इसे सियासी हलकों में एक रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है। यह मुलाकात बीजेपी के लिए 2027 के चुनावों से पहले एकजुटता का संदेश दे सकती है।

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