शुभांशु शुक्ला की पीएम मोदी से मुलाकात- अंतरिक्ष अनुभव और गगनयान मिशन पर हुई विस्तृत चर्चा।
भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला, जो अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर एक्सिओम-4 मिशन के तहत भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले पहले
भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला, जो अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर एक्सिओम-4 मिशन के तहत भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले पहले अंतरिक्ष यात्री बने, ने 18 अगस्त 2025 को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। यह मुलाकात प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास, 7 लोक कल्याण मार्ग, पर हुई। इस दौरान दोनों के बीच अंतरिक्ष यात्रा, भारत के महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन, और विज्ञान व प्रौद्योगिकी में देश की प्रगति पर लंबी और दिलचस्प बातचीत हुई। प्रधानमंत्री ने हल्के-फुल्के अंदाज में शुभांशु से पूछा, “मैंने जो होमवर्क दिया था, उसे पूरा किया या नहीं?” इस सवाल पर शुभांशु ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “सर, होमवर्क पर बहुत अच्छी प्रगति हुई है।”
शुभांशु शुक्ला ने 25 जून 2025 को फ्लोरिडा के नासा कैनेडी स्पेस सेंटर से एक्सिओम-4 मिशन के तहत अपनी अंतरिक्ष यात्रा शुरू की थी। यह मिशन एक निजी अंतरिक्ष उड़ान थी, जिसे अमेरिकी कंपनी एक्सिओम स्पेस ने संचालित किया और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) व नासा ने समर्थन दिया। 26 जून को शुभांशु आईएसएस पहुंचे और वहां 18 दिन बिताए। इस दौरान उन्होंने 60 से अधिक वैज्ञानिक प्रयोग किए, जिनमें मेथी और मूंग के बीजों का अंकुरण, साइनोबैक्टीरिया, माइक्रोएल्गी, और टार्डीग्रेड्स (सूक्ष्म जीव) से संबंधित अध्ययन शामिल थे।
ये प्रयोग भारत के गगनयान मिशन और भविष्य के अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए महत्वपूर्ण हैं। 15 जुलाई को शुभांशु पृथ्वी पर लौटे और 18 अगस्त को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उनका भव्य स्वागत हुआ। प्रधानमंत्री के साथ मुलाकात में शुभांशु ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष में रहना एक अनोखा अनुभव था। सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण (माइक्रोग्रैविटी) की स्थिति में शरीर को ढलने में चार-पांच दिन लगे। पृथ्वी पर लौटने के बाद भी उन्हें चलने में परेशानी हुई, क्योंकि शरीर को सामान्य गुरुत्वाकर्षण में फिर से ढलना पड़ा। उन्होंने यह भी बताया कि अंतरिक्ष में धरती को देखना सबसे खूबसूरत अनुभव था। “वह नीला गोला और उसकी हल्की धुंध देखकर ऐसा लगता था कि शब्दों में इसे बयां नहीं किया जा सकता,” शुभांशु ने कहा। उन्होंने अपने साथ ले गए भारतीय तिरंगे और मिशन पैच को प्रधानमंत्री को भेंट किया, जिसे उन्होंने आईएसएस पर अपने साथ रखा था। यह तिरंगा 29 जून को उस समय पृष्ठभूमि में लहरा रहा था, जब शुभांशु ने आईएसएस से प्रधानमंत्री के साथ डिजिटल बातचीत की थी।
प्रधानमंत्री ने इस मुलाकात में शुभांशु को दिए गए “होमवर्क” का जिक्र किया। दरअसल, 29 जून को आईएसएस से हुई बातचीत में पीएम मोदी ने शुभांशु से कहा था कि वे अपनी अंतरिक्ष यात्रा के हर अनुभव को बारीकी से रिकॉर्ड करें। यह अनुभव गगनयान मिशन, भारत के अपने अंतरिक्ष स्टेशन की स्थापना, और 2040 तक चंद्रमा पर भारतीय अंतरिक्ष यात्री की लैंडिंग जैसे महत्वाकांक्षी लक्ष्यों के लिए उपयोगी होंगे। शुभांशु ने बताया कि उन्होंने अपने अनुभवों को व्यवस्थित रूप से दर्ज किया है, और ये जानकारियां भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को मजबूत करेंगी। उन्होंने यह भी साझा किया कि आईएसएस पर उनके सहयोगियों ने उनके “होमवर्क” के बारे में मजाक भी किया था, क्योंकि प्रधानमंत्री का यह सवाल चर्चा का विषय बन गया था। शुभांशु ने बताया कि गगनयान मिशन को लेकर न केवल भारत में, बल्कि पूरी दुनिया में उत्साह है। उनके अंतरराष्ट्रीय सहयोगी गगनयान के प्रक्षेपण के बारे में जानना चाहते थे और कई ने इसे देखने के लिए भारत आने की इच्छा जताई। उन्होंने कहा, “लोग मुझसे गगनयान की लॉन्च तारीख तक पूछते थे।” यह मिशन भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन है, जिसे 2027 में लॉन्च करने की योजना है। इसरो के इस मिशन में शुभांशु और उनके सहयोगी ग्रुप कैप्टन प्रशांत बालकृष्णन नायर सहित चार अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं।
शुभांशु का अनुभव इस मिशन की तैयारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। प्रधानमंत्री ने शुभांशु की उपलब्धि को देश के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह मिशन भारत की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं का पहला कदम है। भारत 2035 तक अपना अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने और 2040 तक चंद्रमा पर अपने अंतरिक्ष यात्री को उतारने की योजना बना रहा है। पीएम मोदी ने इसरो और सरकार के समर्थन का जिक्र करते हुए कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि शुभांशु का मिशन न केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह युवाओं को विज्ञान और प्रौद्योगिकी में करियर बनाने के लिए प्रेरित करेगा।
शुभांशु ने अपनी अंतरिक्ष यात्रा के दौरान किए गए प्रयोगों के बारे में भी विस्तार से बताया। उन्होंने मेथी और मूंग के बीजों को अंतरिक्ष में उगाकर खाद्य उत्पादन की संभावनाओं का अध्ययन किया। इसके अलावा, साइनोबैक्टीरिया और माइक्रोएल्गी जैसे सूक्ष्म जीवों पर किए गए प्रयोगों से अंतरिक्ष में दीर्घकालिक मिशनों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई। शुभांशु ने अपने साथ गाजर का हलवा, मूंग दाल का हलवा, और आम का रस जैसी भारतीय मिठाइयां भी ले गए थे, जो अंतरिक्ष में भोजन की चुनौतियों को समझने में मददगार रहीं। उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष में जगह की कमी और सामान की लागत के कारण कम स्थान में अधिक पोषण और कैलोरी वाला भोजन ले जाना जरूरी होता है। इस मुलाकात का एक भावनात्मक क्षण तब आया, जब शुभांशु ने तिरंगे के महत्व के बारे में बात की।
उन्होंने कहा कि आईएसएस पर तिरंगा लगाना उनके लिए सबसे भावुक करने वाला पल था। यह तिरंगा उनकी अंतरिक्ष यात्रा का प्रतीक बना और भारत की शान को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित किया। 29 जून को जब उन्होंने आईएसएस से पीएम मोदी से बात की, तो तिरंगा उनकी पृष्ठभूमि में लहरा रहा था, जिसने पूरे देश को गर्व से भर दिया। शुभांशु ने यह भी कहा कि अंतरिक्ष से धरती को देखना और भारत माता की जय कहना उनके लिए अविस्मरणीय अनुभव था। प्रधानमंत्री ने शुभांशु को गले लगाकर उनका स्वागत किया और उनकी उपलब्धि के लिए बधाई दी। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर इस मुलाकात का एक 10 मिनट का वीडियो साझा किया, जिसमें दोनों के बीच की बातचीत के कुछ खास पल दिखाए गए। पीएम ने लिखा, “शुभांशु शुक्ला के साथ बहुत अच्छी बातचीत हुई। हमने उनके अंतरिक्ष अनुभवों, विज्ञान और प्रौद्योगिकी में प्रगति, और गगनयान मिशन पर चर्चा की। भारत को उनकी इस उपलब्धि पर गर्व है।” इस पोस्ट ने शुभांशु की उपलब्धि को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक चर्चा में ला दिया।
शुभांशु की इस उपलब्धि का जश्न संसद में भी मनाया गया। 18 अगस्त को लोकसभा में उनके मिशन और भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम पर विशेष चर्चा हुई। विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में कहा कि शुभांशु के प्रयोगों में स्वदेशी तकनीक का उपयोग हुआ, जो आत्मनिर्भर भारत के मंत्र को दर्शाता है। हालांकि, कुछ विपक्षी दलों ने इस चर्चा का बहिष्कार किया, क्योंकि वे मतदाता धोखाधड़ी जैसे अन्य मुद्दों पर चर्चा की मांग कर रहे थे। शुभांशु का स्वागत दिल्ली में भी जोरदार तरीके से हुआ। उनके आगमन पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, और कई नागरिकों ने उनकी अगवानी की। शुभांशु के परिवार ने भी उनकी उपलब्धि पर गर्व जताया।
उनकी बहन शुचि ने कहा कि अंतरिक्ष से धरती का दृश्य देखकर उन्हें गर्व महसूस हुआ। उनके पिता ने बताया कि शुभांशु की सुरक्षित वापसी के लिए उन्होंने भगवान से प्रार्थना की थी। यह मुलाकात भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक प्रेरणा स्रोत बनी। शुभांशु ने युवाओं को संदेश दिया कि वे बड़े सपने देखें और कभी हार न मानें। उन्होंने कहा, “स्काई इज नेवर द लिमिट।” उनकी यह यात्रा न केवल भारत के लिए, बल्कि पोलैंड और हंगरी जैसे देशों के लिए भी महत्वपूर्ण थी, जिन्होंने चार दशकों बाद मानव अंतरिक्ष मिशन में हिस्सा लिया। शुभांशु का अनुभव गगनयान मिशन को मजबूत करने और भारत को अंतरिक्ष अनुसंधान में अग्रणी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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