Politics News: आपातकाल की 50वीं बरसी- बीजेपी 'संविधान हत्या दिवस' के रूप में मनाएगी, दिल्ली में विशेष आयोजन।
भारत में आपातकाल की घोषणा के 50 वर्ष पूरे हो गए हैं। इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) 25 जून 1975 को तत्कालीन इंदिरा गांधी...
आज भारत में आपातकाल की घोषणा के 50 वर्ष पूरे हो गए हैं। इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) 25 जून 1975 को तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार द्वारा लगाए गए आपातकाल को 'संविधान हत्या दिवस' के रूप में मनाने जा रही है। दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम में इस ऐतिहासिक घटना की 50वीं बरसी पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा, जिसे संस्कृति मंत्रालय ने "संविधान हत्या दिवस 2025: स्वतंत्रता के इतिहास का काला अध्याय" नाम दिया है। इस कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, और संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत सहित कई वरिष्ठ नेता हिस्सा लेंगे। बीजेपी का कहना है कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को आपातकाल के दौरान हुए लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन और संवैधानिक मूल्यों पर हमले की जानकारी देना है। पार्टी का मानना है कि 1975-1977 के बीच का यह दौर भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय था, जब नागरिकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, प्रेस की आजादी, और मौलिक अधिकारों को कुचल दिया गया था। कार्यक्रम के माध्यम से बीजेपी यह संदेश देना चाहती है कि संविधान की रक्षा और लोकतंत्र की मजबूती के लिए सतर्कता जरूरी है।
25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की थी, जिसे आधिकारिक तौर पर "आंतरिक अशांति" के आधार पर लागू किया गया। यह निर्णय इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस फैसले के बाद आया, जिसमें इंदिरा गांधी का रायबरेली से लोकसभा चुनाव जीतना अवैध घोषित किया गया था। आपातकाल के दौरान:
नागरिक अधिकार निलंबित: मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया, जिसमें बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता शामिल थी।
प्रेस पर सेंसरशिप: समाचार पत्रों और मीडिया पर कठोर सेंसरशिप लागू की गई।
विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी: जयप्रकाश नारायण, मोरारजी देसाई, अटल बिहारी वाजपेयी, और लालकृष्ण आडवाणी जैसे प्रमुख विपक्षी नेताओं को जेल में डाल दिया गया।
मजबूर नसबंदी अभियान: संजय गांधी के नेतृत्व में जबरन नसबंदी कार्यक्रम चलाया गया, जिसने लाखों लोगों को प्रभावित किया।
संवैधानिक संशोधन: 42वां संशोधन लाकर संविधान में व्यापक बदलाव किए गए, जिसे कई लोग लोकतंत्र को कमजोर करने वाला मानते हैं।
आपातकाल 21 मार्च 1977 को समाप्त हुआ, और 1977 के आम चुनाव में कांग्रेस की हार के साथ जनता पार्टी की सरकार बनी। इस दौर को भारतीय लोकतंत्र के लिए एक सबक के रूप में देखा जाता है। त्यागराज स्टेडियम में होने वाला यह कार्यक्रम सुबह 10 बजे शुरू होगा। संस्कृति मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित इस समारोह में निम्नलिखित गतिविधियां शामिल होंगी:
प्रदर्शनी: आपातकाल के दौरान हुए अत्याचारों और लोकतंत्र पर हमले को दर्शाने वाली एक विशेष प्रदर्शनी।
वक्तव्य: गृह मंत्री अमित शाह मुख्य वक्ता होंगे और आपातकाल के प्रभावों पर प्रकाश डालेंगे।
डॉक्यूमेंट्री: आपातकाल के इतिहास और उस दौरान लोगों के संघर्ष को दिखाने वाली एक लघु फिल्म प्रदर्शित की जाएगी।
चर्चा सत्र: युवाओं को आपातकाल के सबक और संविधान की महत्ता के बारे में जागरूक करने के लिए विशेषज्ञों के साथ चर्चा।
इसके अलावा, बीजेपी ने देशभर में जिला स्तर पर भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई है, जिसमें पार्टी कार्यकर्ता और स्थानीय नेता हिस्सा लेंगे।कांग्रेस ने बीजेपी के इस कदम को "राजनीतिक नाटक" करार दिया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा, "बीजेपी आपातकाल का इस्तेमाल अपने राजनीतिक एजेंडे को बढ़ाने के लिए कर रही है। आज वह संविधान की बात करते हैं, लेकिन उनकी नीतियां संविधान के मूल्यों के खिलाफ हैं।" कांग्रेस का यह भी दावा है कि आपातकाल के बाद से पार्टी ने लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए, और बीजेपी को इतिहास को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत करने का अधिकार नहीं है।X पर #Emergency50Years और #SanvidhanHatyaDiwas ट्रेंड कर रहे हैं। बीजेपी समर्थकों ने आपातकाल को "लोकतंत्र का गला घोंटने" वाला कृत्य बताया, जबकि कांग्रेस समर्थकों ने बीजेपी पर "संविधान को कमजोर करने" का आरोप लगाया। कई न्यूट्रल यूजर्स ने इस मौके पर संविधान और लोकतंत्र की रक्षा पर जोर देने की बात कही।
- बीजेपी का राजनीतिक संदेश
बीजेपी ने आपातकाल को बार-बार कांग्रेस पर हमला करने के लिए एक मुद्दा बनाया है। पार्टी का कहना है कि कांग्रेस ने 1975 में संविधान और लोकतंत्र को "हत्या" करने का प्रयास किया था। गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में X पर एक पोस्ट में कहा, "आपातकाल भारतीय लोकतंत्र पर एक बदनुमा दाग है। हम नई पीढ़ी को यह बताएंगे कि कैसे कांग्रेस ने संविधान को रौंदा और लोगों के अधिकार छीने।" वहीं, संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि यह आयोजन केवल इतिहास को याद करने के लिए नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एक संकल्प है।
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