ताइवान के वैज्ञानिकों का नया सीरम: चूहों में 20 दिनों में बाल उगाए, लेकिन इंसानों के लिए अभी उम्मीदों का इंतजार।

गंजापन या बाल झड़ने की समस्या आज दुनिया भर में करोड़ों लोगों को परेशान कर रही है। पुरुषों में 50 साल की उम्र तक आधे से ज्यादा लोग इसका शिकार हो जाते हैं, जबकि

Nov 7, 2025 - 18:14
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ताइवान के वैज्ञानिकों का नया सीरम: चूहों में 20 दिनों में बाल उगाए, लेकिन इंसानों के लिए अभी उम्मीदों का इंतजार।
ताइवान के वैज्ञानिकों का नया सीरम: चूहों में 20 दिनों में बाल उगाए, लेकिन इंसानों के लिए अभी उम्मीदों का इंतजार।

गंजापन या बाल झड़ने की समस्या आज दुनिया भर में करोड़ों लोगों को परेशान कर रही है। पुरुषों में 50 साल की उम्र तक आधे से ज्यादा लोग इसका शिकार हो जाते हैं, जबकि महिलाओं में भी यह आम हो रहा है। बाजार में मिनॉक्सिडिल जैसी दवाएं और हेयर ट्रांसप्लांट जैसे उपाय मौजूद हैं, लेकिन इनके साइड इफेक्ट्स और ऊंची लागत से लोग परेशान हैं। ऐसे में ताइवान के नेशनल ताइवान यूनिवर्सिटी (एनटीयू) के वैज्ञानिकों ने एक नया सीरम विकसित किया है, जो चूहों पर परीक्षण में मात्र 20 दिनों में बालों की पूरी ग्रोथ लौटा देता है। यह खोज बालों के इलाज में नई उम्मीद जगाती है, लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि इंसानों पर यह अभी परीक्षण के चरण में है। स्टडी के अनुसार, यह सीरम प्राकृतिक फैटी एसिड्स पर आधारित है और त्वचा के नीचे मौजूद फैट सेल्स को सक्रिय करके बालों की जड़ों को जगाता है। आइए जानते हैं इस सीरम से जुड़ी हर महत्वपूर्ण बात।

यह खोज एनटीयू के प्रोफेसर सुंग-जान लिन और उनके टीम ने की है। रिसर्च जर्नल सेल मेटाबॉलिज्म में 22 अक्टूबर 2025 को प्रकाशित हुई। वैज्ञानिकों ने देखा कि त्वचा पर मामूली चोट या जलन से कभी-कभी बाल घने उग आते हैं। इसे हाइपरट्राइकोसिस कहते हैं। इस प्रक्रिया को समझने के लिए टीम ने चूहों पर प्रयोग किया। पहले उन्होंने चूहों की पीठ पर बाल साफ किए और एक केमिकल से हल्की जलन पैदा की। इसके 10-11 दिनों में नई बाल उगने लगे और 20 दिनों में पूरी त्वचा बालों से ढक गई। लेकिन जलन पैदा करना सुरक्षित नहीं था, इसलिए टीम ने फैट सेल्स की जांच की। पाया कि जलन से फैट सेल्स फैटी एसिड्स छोड़ते हैं, जो बालों की जड़ों में मौजूद स्टेम सेल्स को सक्रिय करते हैं।

फिर वैज्ञानिकों ने सीधे फैटी एसिड्स वाला सीरम बनाया। इसमें मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड्स जैसे ओलेइक एसिड (सी18:1) और पामिटोलेइक एसिड (सी16:1) हैं। ये एसिड्स शराब में घोलकर त्वचा पर लगाए गए। बिना जलन पैदा किए भी चूहों में 20 दिनों में बाल उग आए। प्रोफेसर लिन ने कहा, 'ये एसिड्स हमारे शरीर और जैतून जैसे पौधों में प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं। इसलिए ये सुरक्षित हैं।' टीम ने लैब में मानव बालों की जड़ों पर भी टेस्ट किया, जहां सकारात्मक संकेत मिले। प्रोफेसर लिन ने खुद अपने पैरों पर तीन हफ्तों तक लगाकर देखा। उन्होंने न्यू साइंटिस्ट को बताया, 'मेरी जांघों पर बालों की ग्रोथ बढ़ गई।' लेकिन यह व्यक्तिगत अनुभव है, न कि क्लिनिकल ट्रायल।

सीरम कैसे काम करता है? बालों की जड़ें यानी हेयर फॉलिकल्स तीन चरणों में काम करती हैं: ग्रोथ (एनाजेन), ट्रांजिशन (कैटाजेन) और रेस्टिंग (टेलोजन)। गंजेपन में जड़ें रेस्टिंग मोड में चली जाती हैं। यह सीरम फैट सेल्स को तोड़कर फैटी एसिड्स निकालता है। ये एसिड्स स्टेम सेल्स में पीजीसी1-आल्फा प्रोटीन को सक्रिय करते हैं, जो माइटोकॉन्ड्रिया बढ़ाते हैं। इससे सेल्स को ऊर्जा मिलती है और वे ग्रोथ मोड में आ जाते हैं। स्टडी में पाया कि सैचुरेटेड फैटी एसिड्स काम नहीं करते, सिर्फ मोनोअनसैचुरेटेड ही प्रभावी हैं। यह तरीका मौजूदा दवाओं से अलग है। मिनॉक्सिडिल ब्लड फ्लो बढ़ाता है, फिनास्टेराइड हार्मोन को ब्लॉक करता है, लेकिन ये साइड इफेक्ट्स जैसे स्किन इरिटेशन या सेक्शुअल प्रॉब्लम्स पैदा कर सकते हैं। यह सीरम नैचुरल और टॉपिकल है, इसलिए कम जोखिम वाला लगता है।

अभी तक यह सिर्फ चूहों पर सफल रहा है। चूहों के बालों का साइकिल इंसानों से तेज है, इसलिए 20 दिनों में रिजल्ट आना आसान है। इंसानों में पैटर्न बाल्डनेस जेनेटिक और हार्मोनल होता है, जो चूहों जैसा नहीं। यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिल्वेनिया के डॉ. जॉर्ज कोट्सारेलिस ने न्यूजवीक को कहा, 'चूहों में सभी फॉलिकल्स रेस्टिंग स्टेज में होते हैं, इसलिए इफेक्ट ड्रामेटिक लगता है। इंसानों में 90 प्रतिशत फॉलिकल्स पहले से ग्रोथ में होते हैं।' डॉ. कोट्सारेलिस ने बताया कि पैटर्न बाल्डनेस में रेस्टिंग फॉलिकल्स 15-20 प्रतिशत बढ़ जाते हैं, तो जलन से 3-4 महीनों में कुछ ग्रोथ हो सकती है, लेकिन 20 दिन अवास्तविक है। एनडीटीवी की रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने कहा कि मानव ट्रायल्स के बिना इसे ब्रेकथ्रू न कहें। टीम ने पेटेंट कर लिया है और विभिन्न डोज पर इंसानी स्कैल्प टेस्ट की योजना बना रही है। अगर सफल रहा, तो यह ओवर-द-काउंटर प्रोडक्ट बन सकता है।

दुनिया में गंजापन एक बड़ी समस्या है। वर्ल्ड पॉपुलेशन रिव्यू के अनुसार, अमेरिका में 42 प्रतिशत पुरुष गंजे हैं। भारत में भी लाखों लोग हेयर ट्रांसप्लांट कराते हैं, जो महंगा है। यह सीरम सस्ता और आसान हो सकता है। लेकिन सावधानी बरतें। बाजार में कई फर्जी प्रोडक्ट्स आ सकते हैं, जो इस रिसर्च का फायदा उठाएं। डॉक्टरों का कहना है कि डाइट, स्ट्रेस मैनेजमेंट और अप्रूvd ट्रीटमेंट्स ही अभी सुरक्षित हैं। ताइवान में श्वाइट्जर बायोटेक कंपनी भी इसी तरह का सीरम बना रही है, जो दो महीनों में रिजल्ट दिखाता है।

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