Life Style: सर्दियों में है जोड़ों का दर्द और अकड़न? आर्थराइटिस न होने पर भी क्यों होता है, एम्स की रुमेटोलॉजी प्रमुख डॉ. उमा कुमार से जानें कारण और बचाव। 

नई दिल्ली। सर्दी आते ही बहुत से लोग सुबह उठते ही जोड़ों में अकड़न, घुटनों में दर्द, कमर में भारीपन या कंधों में खिंचाव की शिकायत करने लगते हैं

Nov 26, 2025 - 12:58
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Life Style: सर्दियों में है जोड़ों का दर्द और अकड़न? आर्थराइटिस न होने पर भी क्यों होता है, एम्स की रुमेटोलॉजी प्रमुख डॉ. उमा कुमार से जानें कारण और बचाव। 
Life Style: सर्दियों में है जोड़ों का दर्द और अकड़न? आर्थराइटिस न होने पर भी क्यों होता है, एम्स की रुमेटोलॉजी प्रमुख डॉ. उमा कुमार से जानें कारण और बचाव। 

नई दिल्ली। सर्दी आते ही बहुत से लोग सुबह उठते ही जोड़ों में अकड़न, घुटनों में दर्द, कमर में भारीपन या कंधों में खिंचाव की शिकायत करने लगते हैं। हैरानी की बात यह है कि यह दर्द उन लोगों को भी परेशान करता है जिन्हें आर्थराइटिस, गठिया या कोई पुरानी बीमारी नहीं है। एम्स दिल्ली की रुमेटोलॉजी विभाग की प्रमुख प्रोफेसर डॉ. उमा कुमार बताती हैं कि सर्दियों में तापमान और वायुमंडलीय दबाव में बदलाव, कम शारीरिक सक्रियता, मांसपेशियों में संकुचन और जीवनशैली की कुछ गलत आदतें इसके प्रमुख कारण हैं। अच्छी बात यह है कि कुछ आसान उपायों से इस दर्द को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

सर्दियों में जब तापमान गिरता है तो जोड़ों के आसपास मौजूद सिनोवियल द्रव (जोड़ों को चिकनाई देने वाला तरल पदार्थ) गाढ़ा हो जाता है। यही कारण है कि सुबह उठते ही जोड़ अकड़ जाते हैं। डॉ. उमा कुमार कहती हैं कि यह प्रक्रिया बिल्कुल वैसी ही है जैसे ठंड में तेल गाढ़ा हो जाता है और मशीन सुस्त पड़ जाती है। जैसे-जैसे दिन चढ़ता है और शरीर गर्म होता है, यह तरल पदार्थ पतला हो जाता है और अकड़न कम हो जाती है। दूसरा बड़ा कारण वायुमंडलीय दबाव में कमी है। सर्दी में हवा का दबाव कम होने से जोड़ों के अंदर और बाहर का दबाव असंतुलित हो जाता है, जिससे दर्द और सूजन बढ़ती है।

शारीरिक गतिविधि कम होना भी एक प्रमुख वजह है। सर्दियों में लोग बाहर टहलना, व्यायाम करना या घर के काम भी कम कर देते हैं। इससे रक्त संचार धीमा पड़ता है और मांसपेशियां कड़ी हो जाती हैं। मांसपेशियां जब कमजोर और कड़ी हो जाती हैं तो जोड़ों पर दबाव बढ़ जाता है। डॉ. उमा बताती हैं कि जो लोग साल भर व्यायाम करते हैं, उन्हें सर्दी में भी कम परेशानी होती है। इसके अलावा ठंड में लोग गर्म कपड़ों की कई परतें पहन लेते हैं, जिससे शरीर का लचीलापन कम हो जाता है और मांसपेशियों में खिंचाव बढ़ जाता है।

खान-पान भी कम जिम्मेदार नहीं है। सर्दियों में लोग तले-भुने, चटपटे और मीठे पदार्थ ज्यादा खाते हैं। इससे वजन बढ़ता है और जोड़ों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। खासकर घुटनों और कमर पर। विटामिन डी की कमी भी एक बड़ा कारण है। सर्दियों में धूप कम मिलती है, जिससे शरीर में विटामिन डी का स्तर गिर जाता है। यह हड्डियों और मांसपेशियों दोनों को कमजोर करता है। डॉ. उमा कुमार कहती हैं कि 50 वर्ष से कम उम्र के लोग भी इस मौसम में जोड़ों के दर्द की शिकायत लेकर आते हैं, जबकि पहले यह समस्या सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित थी। इसका मुख्य कारण बदलती जीवनशैली है।

तो बचाव के लिए क्या करें? डॉ. उमा कुमार के अनुसार सबसे पहला और सबसे आसान उपाय है सुबह उठते ही गुनगुने पानी में नींबू निचोड़कर पीना। इससे शरीर हाइड्रेट रहता है और जोड़ों का तरल पदार्थ पतला रहता है। रोजाना कम से कम 30 मिनट हल्की सैर या घर में ही स्ट्रेचिंग जरूर करें। सूरज निकलने पर 15-20 मिनट धूप जरूर लें। इससे विटामिन डी की पूर्ति होगी। खाने में हरी सब्जियां, मौसमी फल, बादाम, अखरोट और तिल शामिल करें। तिल में कैल्शियम और ओमेगा-3 भरपूर होता है जो जोड़ों के लिए बहुत फायदेमंद है। ठंड से बचने के लिए गर्म लेकिन हल्के कपड़े पहनें। भारी स्वेटर या कई परतें न पहनें।

घर में कुछ आसान व्यायाम भी कर सकते हैं। जैसे कुर्सी पर बैठकर पैरों को आगे-पीछे करना, हाथों को घुमाना, गर्दन को धीरे-धीरे दाएं-बाएं करना। ये व्यायाम रक्त संचार बढ़ाते हैं और अकड़न दूर करते हैं। अगर दर्द ज्यादा हो तो गुनगुने पानी की थैली से सिकाई करें। सरसों का तेल या तिल का तेल गुनगुना करके हल्के हाथों से मालिश करें। इसमें लहसुन की कुछ कलियां डालकर गर्म करें तो और फायदा होता है। डॉ. उमा सलाह देती हैं कि अगर दर्द एक सप्ताह से ज्यादा रहे या सूजन दिखे तो डॉक्टर से जरूर मिलें।

विशेषज्ञों के अनुसार सर्दियों में कैफीन और नमक का सेवन भी कम करना चाहिए। ये दोनों शरीर से पानी खींचते हैं, जिससे जोड़ों में सूखापन बढ़ता है। रात को सोते समय एक गिलास दूध में हल्दी डालकर पीना भी बहुत फायदेमंद है। हल्दी में करक्यूमिन होता है जो सूजन कम करता है। अदरक वाली चाय या सूप भी अच्छा विकल्प है। सबसे जरूरी है नियमित दिनचर्या। सुबह जल्दी उठें, व्यायाम करें और रात को समय से सोएं।

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