यूट्यूब का नया एआई फीचर: अब आपकी पसंद के वीडियो ही दिखेंगे, एलन मस्क के एक्स से आगे निकला गूगल का कदम।
वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म यूट्यूब पर एक बड़ा बदलाव आने वाला है, जो उपयोगकर्ताओं को उनकी सच्ची पसंद के अनुसार कंटेंट दिखाने पर
नई दिल्ली। वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म यूट्यूब पर एक बड़ा बदलाव आने वाला है, जो उपयोगकर्ताओं को उनकी सच्ची पसंद के अनुसार कंटेंट दिखाने पर केंद्रित है। 25 नवंबर 2025 को सामने आई रिपोर्ट्स के अनुसार, यूट्यूब एक नया एआई आधारित टूल 'योर कस्टम फीड' टेस्ट कर रहा है, जिसमें यूजर्स सरल प्रॉम्प्ट्स के जरिए होमपेज रेकमेंडेशन्स को खुद कस्टमाइज कर सकेंगे। उदाहरण के लिए, अगर आप कहेंगे 'इतिहास पॉडकास्ट पसंद हैं' या 'कम्यूनिटी वीडियो दिखाओ', तो एल्गोरिदम उसी दिशा में कंटेंट को एडजस्ट कर देगा। यह फीचर यूट्यूब के मौजूदा एल्गोरिदम को और पर्सनलाइज्ड बनाएगा, जहां अब तक एल्गोरिदम यूजर के वॉच हिस्ट्री, लाइक्स और सब्सक्रिप्शन्स के आधार पर अनुमान लगाता था। लेकिन अब यूजर्स खुद अपनी रुचि बता सकेंगे, जिससे अनचाहे वीडियो कम दिखेंगे। यह बदलाव एलन मस्क के एक्स (पूर्व ट्विटर) प्लेटफॉर्म से आगे निकलने जैसा लगता है, जहां मस्क ने सितंबर 2025 में कहा था कि एक्स का एल्गोरिदम नवंबर तक पूरी तरह एआई आधारित हो जाएगा। यूट्यूब का यह कदम उपयोगकर्ताओं को अधिक नियंत्रण देगा और कंटेंट क्रिएटर्स के लिए नई चुनौतियां खड़ी करेगा।
यूट्यूब का एल्गोरिदम हमेशा से विवादों में रहा है। यह 2011 से काम कर रहा है और यूजर्स को होमपेज, सजेस्टेड वीडियो और सर्च रिजल्ट्स में कंटेंट दिखाने का जिम्मा संभालता है। 2025 में एल्गोरिदम में कई अपडेट्स आए हैं, जो पर्सनलाइजेशन पर जोर देते हैं। पहले यह वॉच टाइम, लाइक्स, कमेंट्स और शेयर्स पर निर्भर था, लेकिन अब व्यूअर सैटिस्फैक्शन, रिटेंशन रेट और फीडबैक सिग्नल्स को प्राथमिकता मिल रही है। यूट्यूब के प्रोडक्ट मैनेजर टॉड बोप्रे ने क्रिएटर इनसाइडर चैनल पर कहा कि एल्गोरिदम अब 'वर्ड ऑफ माउथ' की तरह काम करता है। मतलब, अगर आप फिशिंग वीडियो देखते हैं, तो एल्गोरिदम अन्य यूजर्स की पसंद के आधार पर आपके लिए बेस्ट कंटेंट चुनता है। लेकिन नया फीचर इससे आगे जाता है। 'योर कस्टम फीड' में यूजर्स टेक्स्ट प्रॉम्प्ट एंटर कर सकेंगे, जैसे 'म्यूजिक वीडियो कम, न्यूज ज्यादा'। एआई तुरंत फीड को अपडेट कर देगा, भले ही आपका हिस्ट्री इससे मेल न खाता हो। यह फीचर अभी टेस्टिंग फेज में है और 2026 की शुरुआत में रोलआउट हो सकता है।
यह बदलाव एल्गोरिदम की कमियों को दूर करने के लिए है। अक्सर यूजर्स शिकायत करते हैं कि एल्गोरिदम रैंडम वीडियो दिखाता है, जैसे एक बार कुकिंग वीडियो देखने पर महीनों तक किचन टिप्स भरे पड़ते हैं। नया टूल यूजर्स को 'नॉट इंटरेस्टेड' बटन से आगे ले जाता है। अब वे एक्टिवली अपनी पसंद सेट कर सकेंगे। यूट्यूब के एल्गोरिदम इंजीनियर रेने रिची ने कहा कि 2025 में एआई लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (एलएलएम) का इस्तेमाल बढ़ा है, जो कैप्शन्स, डिस्क्रिप्शन्स और ऑडियो से थीम्स पहचानते हैं। इससे ग्लोबल पर्सनलाइजेशन संभव हुआ है। उदाहरण के लिए, दो यूजर्स एक ही सर्च करेंगे, लेकिन रिजल्ट्स अलग-अलग दिखेंगे। यह फीचर यूट्यूब म्यूजिक के 2025 रीकैप से प्रेरित लगता है, जहां एआई चैट असिस्टेंट यूजर्स से उनकी लिस्टनिंग हैबिट्स पर बात करता है। रीकैप अब स्टेटिक स्लाइडशो नहीं, बल्कि कन्वर्सेशनल है।
एलन मस्क का एक्स प्लेटफॉर्म इस रेस में पीछे रह गया। सितंबर 2025 में मस्क ने ट्वीट किया कि एक्स का एल्गोरिदम नवंबर तक पूरी तरह एआई बेस्ड हो जाएगा। उन्होंने कहा कि यूजर्स ग्रोक एआई से फीड एडजस्ट कर सकेंगे, और कोड हर दो हफ्ते में ओपन सोर्स होगा। लेकिन नवंबर 26, 2025 तक एक्स पर ऐसा कोई बड़ा अपडेट नहीं आया। इसके उलट, यूट्यूब ने कस्टम फीड टूल को टेस्टिंग में ला दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि गूगल का यह कदम एक्स को चुनौती देगा। एक्स पर एल्गोरिदम पहले से ही पर्सनलाइज्ड है, लेकिन प्रॉम्प्ट बेस्ड कस्टमाइजेशन की कमी है। मस्क ने ग्रोक को इंटीग्रेट करने का वादा किया था, लेकिन डिले हो गया। यूट्यूब के फीचर से यूजर्स को लगेगा कि वे कंटेंट को कंट्रोल कर रहे हैं, जो एंगेजमेंट बढ़ाएगा।
क्रिएटर्स के लिए यह बदलाव दोहरी तलवार है। एक तरफ, पर्सनलाइजेशन से टारगेटेड ऑडियंस मिलेगी। अगर कोई यूजर 'हिस्ट्री पॉडकास्ट' सेट करता है, तो हिस्ट्री चैनल्स को बूस्ट मिलेगा। लेकिन दूसरी तरफ, एल्गोरिदम अब रिटेंशन और सैटिस्फैक्शन पर ज्यादा फोकस करेगा। 2025 में वॉच टाइम से ज्यादा महत्वपूर्ण है कि व्यूअर वीडियो खत्म करे, कमेंट करे या प्लेलिस्ट में ऐड करे। अगर 10 सेकंड में वीडियो बंद हो जाए, तो प्रमोशन रुक जाएगा। क्रिएटर्स को सलाह दी जा रही है कि टाइटल, थंबनेल और पहले 15 सेकंड्स पर ध्यान दें। यूट्यूब ट्रेंड्स एआई अब रीयल-टाइम सर्च स्पाइक्स और सोशल चैटर एनालाइज करता है। मल्टीलिंगुअल वीडियो को प्रमोट करने के लिए कैप्शन्स जरूरी हैं।
यह अपडेट यूट्यूब की 2025 की रणनीति का हिस्सा है। कंपनी ने कहा कि एल्गोरिदम अब यूजर सैटिस्फैक्शन सर्वे और सेंटिमेंट एनालिसिस पर निर्भर करेगा। होमपेज पर सब्सक्रिप्शन्स, न्यू वीडियो और सिमिलर व्यूअर्स के कंटेंट का मिक्स दिखेगा। शॉर्ट्स और लॉन्ग-फॉर्म वीडियो के एल्गोरिदम अलग हैं, लेकिन दोनों का लक्ष्य सेशन एक्सटेंड करना है। यूट्यूब ने फील्टर बटन्स ऐड किए हैं, जैसे 'फॉर यू', 'ट्रेंडिंग' या 'म्यूजिक', जो मूड के अनुसार सॉर्ट करते हैं। इससे दो यूजर्स एक ही वीडियो देखने पर अलग सजेशन्स पाएंगे।
सोशल मीडिया पर इस फीचर को सराहा जा रहा है। एक्स पर यूजर्स कह रहे हैं कि यह एल्गोरिदम की तानाशाही को खत्म करेगा। एक यूजर ने लिखा, 'अब यूट्यूब मेरी बात सुनेगा, न कि सिर्फ अनुमान लगाएगा।' लेकिन कुछ क्रिएटर्स चिंतित हैं कि छोटे चैनल्स को नुकसान हो सकता है। विशेषज्ञ अमित यादव कहते हैं कि एल्गोरिदम अब मल्टी-आर्म्ड बैंडिट एल्गोरिदम यूज करता है, जो रीयल-टाइम टेस्टिंग से सजेशन्स सुधारता है। यूट्यूब डेटा एपीआई में नए एंडपॉइंट्स हैं, जो रिटेंशन और डेमोग्राफिक्स देते हैं।
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