देश- विदेश: ईरान-इजरायल युद्ध: ईरान ने इजरायल पर सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलें दागी, भारी तबाही हुई।
मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। 13 जून 2025 से शुरू हुआ इजरायल और ईरान के बीच सैन्य टकराव अब एक ...
मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। 13 जून 2025 से शुरू हुआ इजरायल और ईरान के बीच सैन्य टकराव अब एक पूर्ण युद्ध का रूप ले चुका है। ईरान ने इजरायल पर सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं, जिससे तेल अवीव, यरुशलम, और अन्य प्रमुख शहरों में भारी तबाही हुई है। इस युद्ध की शुरुआत इजरायल के "ऑपरेशन राइजिंग लायन" से हुई, जिसके तहत उसने ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर हमले किए। जवाब में, ईरान ने "ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस III" के तहत इजरायल पर मिसाइलों और ड्रोनों की बौछार की।
- युद्ध की शुरुआत
इजरायल और ईरान के बीच तनाव कोई नई बात नहीं है। 1980 के दशक में इस्लामिक क्रांति के बाद से दोनों देशों के रिश्ते खराब रहे हैं। ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर इजरायल हमेशा से चिंतित रहा है। 7 अक्टूबर 2023 को हमास के इजरायल पर हमले, जिसमें ईरान की वित्तीय और सैन्य सहायता की भूमिका थी, ने इस तनाव को और बढ़ा दिया। इसके बाद इजरायल ने सीरिया और लेबनान में ईरानी समर्थित समूहों पर हमले तेज किए।
13 जून 2025 को इजरायल ने "ऑपरेशन राइजिंग लायन" शुरू किया, जिसका उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को नष्ट करना था। इजरायली वायुसेना ने तेहरान, इस्फहान, और नतांज में परमाणु और सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। इन हमलों में ईरान के कई वरिष्ठ सैन्य कमांडर और परमाणु वैज्ञानिक मारे गए। सैटेलाइट तस्वीरों में करमानशाह और तबरीज के मिसाइल बेसों को भारी नुकसान पहुंचा दिखाया गया। जवाब में, ईरान ने 13 जून की रात को "ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस III" शुरू किया, जिसमें उसने 100 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन इजरायल पर दागे। इन हमलों ने तेल अवीव, यरुशलम, और हाइफा जैसे शहरों को निशाना बनाया, जिससे इजरायल में भारी नुकसान हुआ।
- मिसाइल हमला
ईरान ने इस युद्ध में अपनी उन्नत बैलिस्टिक मिसाइलों, जैसे फतह-1, शहाब-3, गदर, खोर्रमशहर, और पहली बार सजील मिसाइलों का इस्तेमाल किया। फतह-1 एक हाइपरसोनिक मिसाइल है, जो ध्वनि की गति से पांच गुना तेज उड़ती है, जिससे इसे रोकना बेहद मुश्किल है। 18 जून तक, ईरान ने इजरायल पर लगभग 400 बैलिस्टिक मिसाइलें और सैकड़ों ड्रोन दागे, जिनमें से कुछ ने इजरायल के आयरन डोम, डेविड स्लिंग, और एरो डिफेंस सिस्टम को भेद दिया।तेल अवीव में ईरानी मिसाइलों ने भारी तबाही मचाई। सोरोका मेडिकल सेंटर और वोल्फसन मेडिकल सेंटर जैसे महत्वपूर्ण ढांचों को नुकसान पहुंचा। बीरशेवा और होलोन में मिसाइल हमलों में कम से कम 24 लोगों की मौत और 1300 से अधिक घायल हुए। तेल अवीव में इजरायली सेना के मुख्यालय "किरयात" को विशेष रूप से निशाना बनाया गया। इजरायल के मजबूत वायु रक्षा तंत्र ने अधिकांश मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया, लेकिन कुछ मिसाइलें जमीन पर गिरने में कामयाब रहीं, जिससे रिहायशी इलाकों और कार्यालयों को नुकसान पहुंचा। इजरायली सेना ने दावा किया कि उसने ईरान के 40% बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चरों को नष्ट या निष्क्रिय कर दिया है, जिससे ईरान की हमले की क्षमता कमजोर हुई है।
- इजरायल का जवाबी हमला
इजरायल ने ईरान के खिलाफ अपने हमले तेज कर दिए हैं। 50 से अधिक फाइटर जेट्स ने तेहरान, इस्फहान, और फोर्डो में परमाणु और सैन्य ठिकानों पर हमले किए। इजरायली सेना ने ईरान के रक्षा मंत्रालय मुख्यालय, तेल डिपो, और गैस रिफाइनरियों को निशाना बनाया। इन हमलों में तेहरान के एक रिहायशी परिसर में 60 लोगों की मौत हुई, जिनमें 20 बच्चे शामिल थे। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया कि इन हमलों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को कई साल पीछे धकेल दिया है। उन्होंने कहा, "ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई सहित कोई भी अब सुरक्षित नहीं है।" इजरायली सेना ने यह भी दावा किया कि उसने कोई विमान या पायलट नहीं खोया, जो उसकी सैन्य श्रेष्ठता को दर्शाता है। इस युद्ध ने वैश्विक शक्तियों को भी प्रभावित किया है। अमेरिका ने इजरायल का खुलकर समर्थन किया और मिसाइल हमलों को रोकने में उसकी मदद की। अमेरिकी सेना ने सऊदी अरब, इटली, और स्कॉटलैंड में अपने सैन्य अड्डों से F-16 विमान और युद्धपोत तैनात किए हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को चेतावनी दी कि यदि वह अमेरिकी ठिकानों पर हमला करता है, तो परिणाम गंभीर होंगे।
दूसरी ओर, रूस और चीन ने ईरान का समर्थन किया है। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई ने अमेरिका को चेतावनी दी कि यदि उसने युद्ध में हस्तक्षेप किया, तो "अंजाम बुरा होगा।" संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने दोनों देशों से हमले रोकने की अपील की है। इस युद्ध ने मध्य पूर्व में अस्थिरता को बढ़ा दिया है। ईरान में हजारों लोग विस्थापित हुए हैं, और तेहरान में धमाकों की आवाजें आम हो गई हैं। इजरायल में सायरन की आवाजों और बंकरों में छिपते लोगों का मंजर युद्ध की भयावहता को दर्शाता है। ईरान में फंसे भारतीय नागरिकों की वापसी के लिए भारत ने "ऑपरेशन सिंधु" शुरू किया है, जिसके तहत 110 भारतीयों को सुरक्षित निकाला गया। जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला II ने चेतावनी दी कि यह युद्ध क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो यह विश्व युद्ध जैसी स्थिति पैदा कर सकता है। ईरान के पास अभी भी 3000 बैलिस्टिक मिसाइलों का भंडार है, और उसकी उन्नत मिसाइलें इजरायल के रक्षा तंत्र को चुनौती दे रही हैं। दूसरी ओर, इजरायल की सैन्य और तकनीकी श्रेष्ठता उसे युद्ध में बढ़त दे रही है। ईरान और इजरायल के बीच यह युद्ध न केवल मध्य पूर्व, बल्कि वैश्विक शांति के लिए एक बड़ा खतरा बन गया है। दोनों देशों के बीच मिसाइलों और ड्रोनों की बौछार ने हजारों लोगों की जान ले ली है और क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ा दिया है।
What's Your Reaction?







