पूर्व IRGC कमांडर हुसैन कनानी का बड़ा दावा: सऊदी अरब के पास न्यूक्लियर बम, अमेरिका-इजरायल को पूरी जानकारी
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच मिडिल ईस्ट में युद्ध का खतरा मंडरा रहा है। इस संकट के बीच ईरान के पूर्व IRGC कमांडर हुसैन
- सऊदी अरब ने बना लिया परमाणु बम: ईरान के पूर्व कमांडर हुसैन कनानी का इंटरव्यू, अमेरिका चुप्पी साधे
- ईरान-अमेरिका तनाव में सनसनी: पूर्व IRGC अधिकारी बोले- सऊदी के पास न्यूक्लियर बम, यूएस और इजरायल जानते हैं
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच मिडिल ईस्ट में युद्ध का खतरा मंडरा रहा है। इस संकट के बीच ईरान के पूर्व IRGC कमांडर हुसैन कनानी ने एक इंटरव्यू में सनसनीखेज दावा किया है कि सऊदी अरब ने परमाणु बम बना लिया है और अमेरिका तथा इजरायल को इसकी पूरी जानकारी है। कनानी ने कहा कि सऊदी अरब के पास न्यूक्लियर बम है और अमेरिका इसकी गतिविधियों से वाकिफ है। उन्होंने ईरान के पास पुख्ता खुफिया जानकारी होने का भी जिक्र किया।हुसैन कनानी, जो ईरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के पूर्व वरिष्ठ कमांडर हैं, ने आरटी अरबी को दिए इंटरव्यू में दावा किया कि सऊदी अरब के पास वर्तमान में न्यूक्लियर बम है। उन्होंने कहा कि यह दावा खुफिया जानकारी पर आधारित है और अमेरिका तथा इजरायल दोनों को इसकी पूरी जानकारी है। कनानी ने कहा कि सऊदी अरब एक न्यूक्लियर देश है और वाशिंगटन तथा तेल अवीव इसकी गतिविधियों से अच्छी तरह वाकिफ हैं। उन्होंने ईरान के पास कई जानकारियां होने का जिक्र किया।
- साक्ष्य और स्रोत का जिक्र
कनानी ने कहा कि ईरान के पास पुख्ता खुफिया जानकारी है। उन्होंने अन्य अरब देशों से उदाहरण देते हुए यमन के कुछ लोगों का जिक्र किया जो सऊदी अरब की न्यूक्लियर साइट पर काम कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि सऊदी अरब के पास न्यूक्लियर बम के पूरे सबूत हैं। हालांकि, उन्होंने कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया और यह दावा बिना प्रमाण के है।
- अमेरिका और इजरायल पर आरोप
कनानी ने आरोप लगाया कि अमेरिका सब कुछ जानते हुए भी चुप्पी साधे हुए है। उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन ईरान पर नो न्यूक्लियर वेपन्स की शर्त थोप रहा है लेकिन सऊदी अरब के सिविलियन न्यूक्लियर प्रोग्राम को हरी झंडी दे दी गई है। उन्होंने इजरायल को भी इसकी जानकारी होने का दावा किया। कनानी ने अमेरिका और इजरायली खुफिया एजेंसियों पर ईरान में विरोध प्रदर्शनों को समर्थन देने का भी आरोप लगाया। सऊदी अरब लंबे समय से सिविलियन न्यूक्लियर प्रोग्राम विकसित कर रहा है। हाल में अमेरिका और सऊदी अरब के बीच सिविल न्यूक्लियर सहयोग पर संयुक्त घोषणा हुई है जो दशकों लंबे बहु-अरब डॉलर के न्यूक्लियर एनर्जी पार्टनरशिप की कानूनी नींव बनाती है। यह समझौता अमेरिकी कंपनियों को सऊदी अरब के सिविल न्यूक्लियर सहयोगी के रूप में पसंदीदा बनाता है और मजबूत नॉन-प्रोलिफरेशन स्टैंडर्ड्स के साथ किया जाएगा। सऊदी अरब ने न्यूक्लियर पावर प्लांट बनाने की योजना बनाई है लेकिन आधिकारिक तौर पर कोई परमाणु हथियार कार्यक्रम नहीं है।
- ट्रंप प्रशासन और सऊदी न्यूक्लियर डील
ट्रंप प्रशासन ने सऊदी अरब के साथ सिविल न्यूक्लियर सहयोग को बढ़ावा दिया है। नवंबर 2025 में अमेरिका और सऊदी अरब ने सिविल न्यूक्लियर एनर्जी पर संयुक्त घोषणा की जो अमेरिकी कंपनियों को प्रमुख भूमिका देती है। यह डील अमेरिकी न्यूक्लियर इंडस्ट्री को मजबूत करने और सप्लाई चेन को सुरक्षित करने के उद्देश्य से है। समझौते में मजबूत नॉन-प्रोलिफरेशन स्टैंडर्ड्स का उल्लेख है लेकिन यूरेनियम संवर्धन या रीप्रोसेसिंग पर स्पष्ट प्रतिबंध का जिक्र नहीं है।
यह दावा ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच आया है जहां ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम पर अमेरिका सख्त रुख अपना रहा है। कनानी ने कहा कि अमेरिका ईरान पर न्यूक्लियर वेपन्स न बनाने की शर्त थोप रहा है लेकिन सऊदी प्रोग्राम को समर्थन दे रहा है। उन्होंने अमेरिकी हमले पर ईरान की अनकन्वेंशनल प्रतिक्रिया की चेतावनी दी जिसमें इजरायल पर कार्रवाई या होर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग बाधित करना शामिल हो सकता है। यह दावा बिना प्रमाण के है और सऊदी अरब, अमेरिका या इजरायल की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि या खंडन नहीं आया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सऊदी अरब के पास परमाणु हथियार होने का कोई प्रमाण नहीं है। दावा ईरान-अमेरिका तनाव और क्षेत्रीय हथियार दौड़ की आशंका को बढ़ाता है।
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