'कर्नल सोफिया पर विवादित टिप्पणी पर मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह की माफी, सुप्रीम कोर्ट की फटकार और SIT जांच।
मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री कुंवर विजय शाह एक बार फिर अपने विवादित बयानों के कारण सुर्खियों में हैं। इस बार, उन्होंने भारतीय सेना की कर्नल सोफिया ...
मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री कुंवर विजय शाह एक बार फिर अपने विवादित बयानों के कारण सुर्खियों में हैं। इस बार, उन्होंने भारतीय सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक टिप्पणी की, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने उनकी माफी को "घड़ियाली आंसू" करार देते हुए खारिज कर दिया और मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का आदेश दिया। विजय शाह ने अपने बयान के लिए कई बार माफी मांगी, जिसमें उन्होंने कहा, "मैं भूलवश कहे गए अपने शब्दों के लिए भारतीय सेना, बहन कर्नल सोफिया से और समस्त देशवासियों से पूरी तरह क्षमा प्रार्थी हूं।" यह मामला न केवल उनके राजनीतिक करियर के लिए चुनौती बन गया है, बल्कि भारतीय सेना और सामाजिक संवेदनाओं के प्रति उनके रवैये पर भी सवाल उठा रहा है। इस बयान ने तुरंत विवाद खड़ा कर दिया। सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ आक्रोश फैल गया, और विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस ने इसे भारतीय सेना और नारी शक्ति का अपमान बताते हुए शाह के इस्तीफे की मांग की। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने ट्वीट किया, "भाजपा की मध्य प्रदेश सरकार के एक मंत्री ने हमारी वीर बेटी कर्नल सोफिया कुरैशी के बारे में बेहद अपमानजनक, शर्मनाक और ओछी टिप्पणी की है।"
11 मई को, मध्य प्रदेश के महू में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में विजय शाह ने भारतीय सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी की। कर्नल सोफिया ने हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले के जवाब में भारतीय सेना द्वारा संचालित "ऑपरेशन सिंदूर" की प्रेस ब्रीफिंग दी थी। इस ऑपरेशन को देश भर में सराहा गया, और कर्नल सोफिया की साहसिक भूमिका ने उन्हें राष्ट्रीय नायिका बना दिया। लेकिन विजय शाह ने मंच से बोलते हुए उन्हें "आतंकवादियों की बहन" कहकर संबोधित किया, जिससे उपस्थित लोग और बाद में पूरा देश स्तब्ध रह गया।
- माफी का सिलसिला: तीन बार क्षमा याचना
विवाद बढ़ने के बाद, विजय शाह ने तुरंत माफी मांगने की कोशिश की। उनकी पहली माफी आजतक से बातचीत के दौरान आई, जिसमें उन्होंने कहा कि वह कर्नल सोफिया को अपनी "सगी बहन से भी ज्यादा" सम्मान देते हैं और उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया। दूसरी माफी वीडियो के जरिए आई, जब उनके खिलाफ मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश पर महू के मानपुर थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152, 196(1)(बी), और 197(1)(सी) के तहत एफआईआर दर्ज की गई। 23 मई को, शाह ने तीसरी बार माफी मांगी। सोशल मीडिया पर अपलोड किए गए एक वीडियो में उन्होंने कहा, "जय हिन्द, पिछले दिनों पहलगाम में हुए जघन्य हत्याकांड से मैं मन से बहुत दुखी एवं विचलित हूं। मेरे कहे गए शब्दों से समुदाय, धर्म, देशवासियों को दुख पहुंचा है, यह मेरी भाषाई भूल थी। मैं भूलवश कहे गए अपने शब्दों के लिए भारतीय सेना, बहन कर्नल सोफिया से और समस्त देशवासियों से पूरी तरह क्षमा प्रार्थी हूं।" हालांकि, उनकी माफी में "यदि" और "भूलवश" जैसे शब्दों का इस्तेमाल सुप्रीम कोर्ट को रास नहीं आया। जस्टिस सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा, "आपकी माफी में ईमानदारी नहीं है। आप कहते हैं 'यदि मैंने ठेस पहुंचाई,' यह माफी मांगने का तरीका नहीं है। यह घड़ियाली आंसू हैं।"
- सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 14 मई को विजय शाह के बयान का स्वतः संज्ञान लेते हुए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। हाई कोर्ट ने उनकी टिप्पणी को "गटर की भाषा" और "अपमानजनक" करार दिया। इसके बाद, शाह ने हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन वहां भी उन्हें राहत नहीं मिली। 19 मई को, सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने शाह को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा, "आप एक जनप्रतिनिधि हैं। आपकी बातों का असर होता है। आपने ऐसी घटिया भाषा का इस्तेमाल किया कि पूरा देश शर्मसार है।" कोर्ट ने उनकी माफी को "कानूनी प्रक्रिया से बचने की कोशिश" बताते हुए खारिज कर दिया और तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की SIT गठित करने का आदेश दिया, जिसमें एक महिला अधिकारी शामिल होगी। SIT को 28 मई तक अपनी पहली रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद, मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) ने 20 मई को SIT का गठन कर दिया। इस टीम में सागर जोन के पुलिस महानिरीक्षक प्रमोद वर्मा, उप पुलिस महानिरीक्षक कल्याण चक्रवर्ती, और पुलिस अधीक्षक वाहिनी सिंह शामिल हैं। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि ये अधिकारी मध्य प्रदेश कैडर के हो सकते हैं, लेकिन मूल रूप से राज्य के निवासी नहीं होने चाहिए। SIT का नेतृत्व आईजी रैंक के अधिकारी प्रमोद वर्मा कर रहे हैं, और इसकी जांच निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ होनी है। कोर्ट ने शाह की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है, लेकिन उन्हें जांच में पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया गया है। विजय शाह का यह बयान उनके पहले के विवादों को भी सामने लाया। वह पहले भी महिलाओं, विशेषकर मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पत्नी और अभिनेत्री विद्या बालन पर अभद्र टिप्पणियों के लिए विवादों में रहे हैं। उनके इस इतिहास ने बीजेपी के लिए स्थिति को और जटिल कर दिया। कांग्रेस ने इसे बीजेपी की "तुच्छ मानसिकता" का उदाहरण बताते हुए शाह को मंत्रिमंडल से हटाने की मांग की।
कर्नल सोफिया कुरैशी की बहादुरी और ऑपरेशन सिंदूर में उनकी भूमिका ने देश में एकता और गर्व की भावना को बढ़ाया। उनके परिवार और सिविल सोसाइटी ने शाह के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। सुप्रीम कोर्ट ने भी सेना के सम्मान को सर्वोपरि रखते हुए कहा, "हमारी सेना पर पूरा देश गर्व करता है। आपके बयान ने इस सम्मान को ठेस पहुंचाई। बीजेपी, जो खुद को अनुशासित पार्टी के रूप में पेश करती है, अब दबाव में है। शाह आदिवासी वोट बैंक का बड़ा चेहरा हैं, और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई से पार्टी को राजनीतिक नुकसान हो सकता है। हालांकि, पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इस मामले में शाह से रिपोर्ट मांगी है, और यह देखना बाकी है कि बीजेपी इस मामले में क्या कदम उठाएगी।
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