स्वास्थ्य और चेतना का संगम- सद्गुरु ने साझा किए बादाम के सेवन से जुड़े अनमोल स्वास्थ्य सूत्र
पोषण के साथ-साथ सद्गुरु सचेत होकर खाने की आदत यानी 'माइंडफुल ईटिंग' की बात करते हैं। उनका कहना है कि भोजन को शरीर का हिस्सा बनने के लिए उसे सही रूप में ग्रहण करना आवश्यक है। बादाम को यदि शहद के साथ मिलाकर लिया जाए, तो इसकी शक्ति और भी बढ़ जा
- बादाम खाने का पारंपरिक तरीका बनाम आधुनिक भूल; ईशा फाउंडेशन के संस्थापक ने समझाए इसके पीछे के वैज्ञानिक तथ्य
- ऊर्जा और मानसिक स्पष्टता के लिए बादाम का सही उपयोग, छिलके उतारकर सेवन करने की दी विशेष सलाह
ईशा फाउंडेशन के संस्थापक और आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु जग्गी वासुदेव अक्सर आधुनिक जीवनशैली में प्राचीन भारतीय आयुर्वेद और विज्ञान के समावेश पर जोर देते हैं। इसी क्रम में उन्होंने बादाम जैसे 'सुपरफूड' के सेवन के सही तरीके पर विस्तार से प्रकाश डाला है। सद्गुरु का मानना है कि भोजन केवल पेट भरने का साधन नहीं है, बल्कि यह शरीर के भीतर ऊर्जा का एक स्रोत है। उनके अनुसार, बादाम पोषक तत्वों का खजाना हैं, लेकिन यदि इन्हें गलत तरीके से खाया जाए, तो इनका पूर्ण लाभ शरीर को प्राप्त नहीं हो पाता। बादाम में उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन, स्वस्थ वसा और विटामिन-ई प्रचुर मात्रा में होते हैं, जो मस्तिष्क की कार्यक्षमता और शारीरिक ऊर्जा के लिए अनिवार्य हैं। सद्गुरु बादाम के सेवन के संबंध में सबसे महत्वपूर्ण नियम यह बताते हैं कि इन्हें कभी भी कच्चा या सीधे पैकेट से निकालकर नहीं खाना चाहिए। उनका वैज्ञानिक तर्क यह है कि बादाम के छिलके में 'टैनिन' और 'फाइटिक एसिड' जैसे तत्व पाए जाते हैं। ये तत्व बादाम के भीतर के पोषक तत्वों को जकड़ कर रखते हैं और मानव शरीर के पाचन तंत्र के लिए इन्हें अवशोषित करना कठिन बना देते हैं। सद्गुरु के अनुसार, प्रकृति ने बीजों के चारों ओर एक सुरक्षा कवच बनाया है ताकि वे प्रतिकूल परिस्थितियों में भी जीवित रह सकें। जब हम इन बीजों को बिना भिगोए खाते हैं, तो हमारा शरीर उनके भीतर मौजूद खनिजों को पूरी तरह नहीं सोख पाता, जिससे बादाम का सेवन निष्प्रभावी हो जाता है।
बादाम को रात भर पानी में भिगोने की प्रक्रिया को सद्गुरु एक जैविक क्रिया के रूप में देखते हैं। वे समझाते हैं कि जब बादाम को 8 से 10 घंटे तक पानी में रखा जाता है, तो बीज को यह संकेत मिलता है कि अब उसके अंकुरित होने का समय आ गया है। इस अवस्था में बादाम के भीतर मौजूद 'एंजाइम' सक्रिय हो जाते हैं और वह अपनी सुषुप्त अवस्था से बाहर आ जाता है। भिगोने के बाद बादाम न केवल चबाने में नरम हो जाता है, बल्कि इसका पाचन भी सुगम हो जाता है। सद्गुरु के अनुसार, भिगोया हुआ बादाम शरीर में 'प्राण' यानी जीवन ऊर्जा को बढ़ाने में अधिक सहायक सिद्ध होता है, जो ध्यान और योग करने वाले व्यक्तियों के लिए अत्यंत लाभकारी है। छिलका उतारने के महत्व पर विशेष बल देते हुए सद्गुरु कहते हैं कि बादाम का भूरा छिलका असल में शरीर के लिए पाचन में बाधक है। आयुर्वेद और आधुनिक पोषण विज्ञान दोनों ही इस बात का समर्थन करते हैं कि बादाम के छिलके में मौजूद रसायन शरीर में पित्त दोष को बढ़ा सकते हैं और पेट में जलन या अपच का कारण बन सकते हैं। छिलका उतार देने से बादाम का सार तत्व यानी उसकी गिरी सुपाच्य हो जाती है। सद्गुरु का सुझाव है कि सुबह खाली पेट 5 से 10 भिगोए हुए और छिले हुए बादाम खाना शरीर को दिन भर के लिए स्थिर ऊर्जा प्रदान करने का सबसे उत्तम मार्ग है। यह मस्तिष्क की कोशिकाओं के नवीनीकरण में भी मदद करता है।
सद्गुरु के अनुसार बादाम सेवन के चरण:
रात को सोने से पहले ताजे पानी में बादाम भिगोएं।
सुबह बादाम का भूरा छिलका पूरी तरह से हटा दें।
बादाम को खूब चबा-चबाकर खाएं, ताकि वह मुंह की लार के साथ मिलकर तरल हो जाए।
इसे सुबह के नाश्ते से कम से कम 20-30 मिनट पहले खाली पेट लेना सबसे अधिक प्रभावकारी होता है।
पोषण के साथ-साथ सद्गुरु सचेत होकर खाने की आदत यानी 'माइंडफुल ईटिंग' की बात करते हैं। उनका कहना है कि भोजन को शरीर का हिस्सा बनने के लिए उसे सही रूप में ग्रहण करना आवश्यक है। बादाम को यदि शहद के साथ मिलाकर लिया जाए, तो इसकी शक्ति और भी बढ़ जाती है। सद्गुरु विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों के लिए बादाम के इस तरीके को अनुशंसित करते हैं क्योंकि यह हड्डियों को मजबूती प्रदान करने के साथ-साथ स्मरण शक्ति को भी तीक्ष्ण बनाता है। उनके अनुसार, जिस तरह से हम अपने विचारों को शुद्ध रखते हैं, उसी तरह हमारे भोजन का स्वरूप भी शुद्ध और ग्रहण करने योग्य होना चाहिए।
आधुनिक भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर बादाम को 'स्नैक्स' की तरह कभी भी खा लेते हैं, जिसे सद्गुरु गलत अभ्यास मानते हैं। वे कहते हैं कि बादाम एक भारी खाद्य पदार्थ है, जिसे पचाने के लिए शरीर को समय और सही ऊर्जा की आवश्यकता होती है। इसलिए इसे अन्य भारी भोजन के साथ खाने के बजाय सुबह के समय लेना चाहिए। सद्गुरु का यह भी मानना है कि यदि किसी व्यक्ति को बादाम खाने के बाद भारीपन महसूस होता है, तो उसे बादाम का पेस्ट बनाकर गुनगुने पानी या दूध के साथ लेना चाहिए। इससे पोषक तत्व सीधे रक्त प्रवाह में मिल जाते हैं और पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता। आध्यात्मिक गुरु के इन स्वास्थ्य सूत्रों का मूल आधार यह है कि हम जो कुछ भी खाते हैं, वह हमारे सूक्ष्म शरीर और चेतना को प्रभावित करता है। बादाम के सही सेवन से न केवल शारीरिक स्वास्थ्य सुधरता है, बल्कि मानसिक स्पष्टता और एकाग्रता में भी वृद्धि होती है। सद्गुरु का यह मार्गदर्शन उन लोगों के लिए एक दिशा-निर्देश है जो प्राकृतिक और सात्विक आहार के माध्यम से एक स्वस्थ जीवन जीना चाहते हैं। बादाम खाने का यह सरल सा बदलाव लंबे समय में गंभीर रोगों से बचाव और दीर्घायु होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उनकी यह सलाह वर्तमान समय में बढ़ती जीवनशैली संबंधी बीमारियों के समाधान के रूप में देखी जा रही है।
What's Your Reaction?







