ग्वालियर पुलिस की बड़ी सफलता: 12 राज्यों में आतंक मचाने वाला 'सीरियल' चोर गिरोह गिरफ्तार, 57 वारदातों का हुआ खुलासा

ग्वालियर पुलिस ने इन आरोपियों के पास से बड़ी मात्रा में चोरी का सामान बरामद करने की दिशा में भी कदम उठाए हैं। गिरफ्तार चोरों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस अब उन सुनारों और खरीदारों की भी तलाश कर रही है, जो चोरी

Mar 24, 2026 - 12:01
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ग्वालियर पुलिस की बड़ी सफलता: 12 राज्यों में आतंक मचाने वाला 'सीरियल' चोर गिरोह गिरफ्तार, 57 वारदातों का हुआ खुलासा
ग्वालियर पुलिस की बड़ी सफलता: 12 राज्यों में आतंक मचाने वाला 'सीरियल' चोर गिरोह गिरफ्तार, 57 वारदातों का हुआ खुलासा

  • फिल्मी स्टाइल में रेकी और एक ही इलाके को बार-बार निशाना बनाने वाला शातिर गैंग बेनकाब, मास्टरमाइंड अरविंद रजक चढ़ा हत्थे
  • मध्य प्रदेश से गुजरात तक फैला था चोरी का जाल: ग्वालियर पुलिस की गिरफ्त में आए अंतरराज्यीय चोरों ने उगले कई गहरे राज

मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले की पुलिस ने एक ऐसे अंतरराज्यीय चोर गिरोह को दबोचने में कामयाबी हासिल की है, जिसने अपनी शातिर कार्यप्रणाली से तीन राज्यों की पुलिस की नींद उड़ा रखी थी। यह गिरोह किसी साधारण अपराधी की तरह नहीं, बल्कि बिल्कुल फिल्मी अंदाज में वारदातों को अंजाम देता था। ग्वालियर पुलिस को पिछले कुछ समय से शहर के अलग-अलग इलाकों में हो रही लगातार चोरियों की शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद एक विशेष टीम का गठन किया गया। तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिरों तंत्र की मदद से पुलिस ने जब इस गैंग के सदस्यों को घेराबंदी कर पकड़ा, तो पूछताछ में जो तथ्य सामने आए, उन्होंने जांच अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। यह गिरोह न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि उत्तर प्रदेश और गुजरात जैसे बड़े राज्यों में भी सक्रिय था और अब तक दर्जनों बड़ी चोरियों को अंजाम दे चुका था।

पुलिस की शुरुआती पूछताछ में यह बेहद चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि यह गिरोह देश के 12 से ज्यादा प्रमुख शहरों में अब तक 57 से अधिक चोरियों की वारदातों को अंजाम दे चुका है। इस गैंग की सबसे बड़ी खासियत और पहचान इनका एक ही पैटर्न पर काम करना था। यह गिरोह जिस भी शहर या मोहल्ले में कदम रखता था, वहां केवल एक बार चोरी करके शांत नहीं बैठता था, बल्कि उसी विशेष इलाके को बार-बार अपना निशाना बनाता था। ग्वालियर पुलिस के अनुसार, इस गिरोह ने शहर के महाराजपुरा क्षेत्र में अकेले 7 बड़ी चोरियों को अंजाम दिया, जबकि बहोड़ापुर इलाके में 3 वारदातों को सफलतापूर्वक पूरा किया। इनका बार-बार एक ही जगह हमला करना स्थानीय पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया था, जिसे अब सुलझा लिया गया है।

इस पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड अरविंद रजक नाम का एक शातिर अपराधी है, जो पहले भी कई बार कानून के शिकंजे में आ चुका है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, अरविंद रजक पेशेवर रूप से इतना अभ्यस्त हो चुका है कि जेल की सलाखें भी उसके इरादों को नहीं बदल पाईं। वह पहले भी उत्तर प्रदेश के कानपुर में चोरी के ही संगीन आरोपों में जेल की सजा काट चुका है। लेकिन जेल से रिहा होने के बाद उसने सुधरने के बजाय अपने गिरोह को और अधिक संगठित किया और नए शहरों में वारदातों का जाल फैलाना शुरू कर दिया। अरविंद ही वह व्यक्ति है जो गिरोह के अन्य सदस्यों को चोरी की बारीकियां सिखाता था और यह तय करता था कि किस घर या दुकान में सेंधमारी करनी है। ग्वालियर पुलिस की जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि इस गिरोह ने मध्य प्रदेश के ग्वालियर और आसपास के जिलों के अलावा उत्तर प्रदेश के कानपुर, झांसी और गुजरात के कई औद्योगिक शहरों को अपनी कर्मस्थली बनाया था। इनका नेटवर्क इतना मजबूत था कि एक राज्य में वारदात करने के बाद ये तुरंत दूसरे राज्य की सीमा में प्रवेश कर जाते थे, जिससे स्थानीय पुलिस के लिए इन्हें ट्रैक करना नामुमकिन हो जाता था।

गिरोह की कार्यप्रणाली किसी थ्रिलर फिल्म की पटकथा जैसी प्रतीत होती है। चोरी करने से पहले ये लोग उस इलाके की कई दिनों तक रेकी करते थे। रेकी के दौरान ये फेरीवाले या कबाड़ी बनकर घूमते थे ताकि किसी को शक न हो। जब इन्हें पक्का यकीन हो जाता था कि किसी घर में ताला लटका है या परिवार बाहर गया है, तब ये आधी रात के सन्नाटे में अपना काम शुरू करते थे। चोरी के दौरान ये आधुनिक कटर और औजारों का इस्तेमाल करते थे ताकि ताले और तिजोरियां बिना शोर किए तोड़े जा सकें। चोरी के बाद ये माल को तुरंत ठिकाने लगाने के बजाय कुछ दिनों तक छिपा कर रखते थे और फिर उसे गिरोह के सरगना के निर्देश पर बेचा जाता था।

ग्वालियर पुलिस ने इन आरोपियों के पास से बड़ी मात्रा में चोरी का सामान बरामद करने की दिशा में भी कदम उठाए हैं। गिरफ्तार चोरों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस अब उन सुनारों और खरीदारों की भी तलाश कर रही है, जो चोरी के जेवरात और कीमती सामान को औने-पौने दामों पर खरीदते थे। पूछताछ के दौरान गिरोह ने स्वीकार किया है कि वे नकदी और सोने-चांदी के गहनों को प्राथमिकता देते थे क्योंकि उन्हें ले जाना और छिपाना आसान होता था। पुलिस को उम्मीद है कि रिमांड के दौरान इनसे अभी कई और अनसुलझी वारदातों की गुत्थी सुलझेगी, जो अन्य राज्यों के पुलिस थानों में दर्ज हैं।

इस गिरोह की गिरफ्तारी से न केवल ग्वालियर बल्कि उत्तर प्रदेश और गुजरात की पुलिस ने भी राहत की सांस ली है। ग्वालियर पुलिस अब उन शहरों की पुलिस से भी संपर्क साध रही है जहां इस गिरोह ने 57 चोरियों को अंजाम देने की बात कबूली है। इस बड़ी सफलता के बाद पुलिस महानिरीक्षक ने टीम को पुरस्कृत करने की घोषणा भी की है। फिलहाल, सभी आरोपी पुलिस रिमांड पर हैं और उनसे गहनता से पूछताछ की जा रही है ताकि गिरोह के किसी भी बचे हुए सदस्य या मददगार को भी जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजा जा सके। यह गिरफ्तारी शहर में बढ़ रहे अपराध ग्राफ को नीचे लाने में एक मील का पत्थर साबित होगी।

प्रशासनिक स्तर पर इस कार्रवाई को लेकर यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो और चाहे वह कितने भी राज्यों में अपनी पहचान क्यों न बदल ले, कानून के हाथ अंततः उस तक पहुंच ही जाते हैं। ग्वालियर की जनता के लिए भी यह एक बड़ी राहत है, विशेषकर उन क्षेत्रों के निवासियों के लिए जो बार-बार हो रही इन चोरियों से दहशत में थे। पुलिस ने आम जनता से भी अपील की है कि वे अपने घरों की सुरक्षा के प्रति जागरूक रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत नजदीकी थाने में दें ताकि भविष्य में ऐसे पेशेवर गिरोहों को पनपने का मौका न मिले।

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