पश्चिम बंगाल में बड़ी कार्रवाई- शुभेंदु अधिकारी के पीए हत्याकांड के तीनों शार्प शूटर गिरफ्तार, उत्तर प्रदेश से जुड़े तार

जांच के दौरान पुलिस और सीआईडी (CID) की टीम को कई महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे थे। घटनास्थल से मिले कारतूसों और सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण से यह स्पष्ट हो गया था कि हमलावरों ने आस्ट्रिया निर्मित ग्लॉक पिस्तौल जैसे परिष्कृत हथियारों का उपयोग किया था। इसके अलावा, हमलावरों द्वारा उपयोग की गई कार के तार उत्तर प्र

May 11, 2026 - 11:22
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पश्चिम बंगाल में बड़ी कार्रवाई- शुभेंदु अधिकारी के पीए हत्याकांड के तीनों शार्प शूटर गिरफ्तार, उत्तर प्रदेश से जुड़े तार
पश्चिम बंगाल में बड़ी कार्रवाई- शुभेंदु अधिकारी के पीए हत्याकांड के तीनों शार्प शूटर गिरफ्तार, उत्तर प्रदेश से जुड़े तार

  • साजिश का पर्दाफाश: मध्यग्राम में चंद्रनाथ रथ की हत्या मामले में पुलिस को मिली बड़ी सफलता, बारासत कोर्ट में पेशी की तैयारी
  • सुनियोजित हत्या का सनसनीखेज अंत: शूटरों की पहचान और गिरफ्तारी के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में उबाल

पश्चिम बंगाल की राजनीति में हाल ही में हुए सबसे सनसनीखेज हत्याकांडों में से एक, भाजपा नेता और नवनियुक्त मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक (PA) चंद्रनाथ रथ की हत्या के मामले में पुलिस को एक बहुत बड़ी सफलता हाथ लगी है। बंगाल पुलिस के विशेष जांच दल (SIT) ने इस जघन्य अपराध को अंजाम देने वाले तीनों शार्प शूटरों को गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई उस समय हुई जब पुलिस की विभिन्न टीमें राज्य की सीमाओं और पड़ोसी राज्यों में संदिग्धों की तलाश में छापेमारी कर रही थीं। गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों का संबंध उत्तर प्रदेश से बताया जा रहा है, जो पेशेवर अपराधी और शूटर माने जाते हैं। इस गिरफ्तारी के बाद अब इस हत्याकांड के पीछे छिपी गहरी साजिश और इसके राजनीतिक आयामों के बेनकाब होने की संभावना प्रबल हो गई है। चंद्रनाथ रथ की हत्या 6 मई 2026 की रात उत्तर 24 परगना जिले के मध्यग्राम इलाके में उस समय कर दी गई थी, जब वे अपने घर से महज कुछ दूरी पर थे। मोटरसाइकिल पर सवार हमलावरों ने उनके वाहन को रोककर बेहद करीब से उन पर अंधाधुंध गोलियां बरसाई थीं। इस हमले में चंद्रनाथ को सिर, छाती और पेट में कई गोलियां लगी थीं, जिससे उनकी मौके पर ही मृत्यु हो गई थी। घटना के बाद से ही पूरे इलाके में तनाव व्याप्त था और भाजपा ने इसे एक 'टारगेटेड पॉलिटिकल मर्डर' करार दिया था। पुलिस ने शुरुआती जांच में पाया कि यह कोई सामान्य अपराध नहीं था, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति के तहत की गई 'सुपारी किलिंग' (Contract Killing) थी, जिसे अंजाम देने के लिए पेशेवर अपराधियों को काम पर रखा गया था।

जांच के दौरान पुलिस और सीआईडी (CID) की टीम को कई महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे थे। घटनास्थल से मिले कारतूसों और सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण से यह स्पष्ट हो गया था कि हमलावरों ने आस्ट्रिया निर्मित ग्लॉक पिस्तौल जैसे परिष्कृत हथियारों का उपयोग किया था। इसके अलावा, हमलावरों द्वारा उपयोग की गई कार के तार उत्तर प्रदेश के नंबर प्लेट और ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म 'ओएलएक्स' (OLX) से जुड़े पाए गए थे। इन्ही कड़ियों को जोड़ते हुए पश्चिम बंगाल पुलिस की टीम ने उत्तर प्रदेश में दबिश दी और स्थानीय पुलिस के सहयोग से इन तीनों शूटरों को धर दबोचा। पुलिस अब इन्हें ट्रांजिट रिमांड पर लेकर बारासत कोर्ट में पेश करने की प्रक्रिया पूरी कर रही है, ताकि इनसे गहन पूछताछ की जा सके। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान के साथ ही यह बात भी सामने आई है कि वे अंतरराज्यीय गिरोहों का हिस्सा रहे हैं। इस हत्याकांड में इस्तेमाल किए गए वाहनों के रजिस्ट्रेशन नंबरों के साथ की गई छेड़छाड़ यह दर्शाती है कि हत्या की साजिश कई दिनों पहले रची गई थी। इस हत्याकांड ने पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद की हिंसा और कानून व्यवस्था की स्थिति पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुभेंदु अधिकारी ने इस घटना को अपनी व्यक्तिगत क्षति बताते हुए इसे लोकतंत्र पर हमला करार दिया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि यह उनके करीबी सहयोगियों को डराने और राजनीतिक प्रतिशोध लेने की एक घिनौनी कोशिश है। हालांकि, सत्तारूढ़ दल ने इन आरोपों को निराधार बताया था। अब तीनों मुख्य शूटरों की गिरफ्तारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अपराध का जाल बंगाल की सीमाओं के पार तक फैला हुआ था। पुलिस अब उस 'मास्टरमाइंड' की तलाश कर रही है जिसने इन शूटरों को सुपारी दी थी और चंद्रनाथ रथ की हत्या का आदेश दिया था।

जांच में शामिल अधिकारियों के अनुसार, हमलावरों ने चंद्रनाथ रथ की गतिविधियों की कई दिनों तक रेकी की थी। वे जानते थे कि चंद्रनाथ कब और किस रास्ते से अपने घर लौटते हैं। वारदात के दिन हमलावरों ने दो वाहनों का इस्तेमाल किया था एक चार पहिया वाहन जिसने रथ की कार का रास्ता रोका और दूसरी मोटरसाइकिल जिस पर सवार होकर शूटरों ने फायरिंग की। इस सुनियोजित हमले ने पुलिस की कार्यप्रणाली को भी चुनौती दी थी, लेकिन तकनीकी साक्ष्यों और कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) के माध्यम से पुलिस आरोपियों तक पहुंचने में सफल रही। गिरफ्तार किए गए तीनों संदिग्धों से पूछताछ में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि उन्हें इस काम के लिए कितनी राशि दी गई थी और उनके स्थानीय संपर्क कौन थे।

मध्यग्राम और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था अभी भी कड़ी है। पुलिस अधिकारियों ने जनता से शांति बनाए रखने की अपील की है और अफवाहों पर ध्यान न देने को कहा है। चंद्रनाथ रथ के परिजनों और भाजपा कार्यकर्ताओं में इस गिरफ्तारी के बाद न्याय की उम्मीद जगी है। भाजपा नेतृत्व ने मांग की है कि इस मामले की जांच किसी केंद्रीय एजेंसी से कराई जाए ताकि पर्दे के पीछे छिपे असली चेहरों को सजा मिल सके। दूसरी ओर, पुलिस का दावा है कि उनके पास पर्याप्त सबूत हैं जो इन शूटरों को इस हत्याकांड से सीधे तौर पर जोड़ते हैं। आने वाले दिनों में कुछ और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है, जो इस मामले में स्थानीय मददगारों की भूमिका को स्पष्ट करेंगी।

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