नेपाल में सत्ता परिवर्तन के साथ ही बड़ा राजनीतिक उलटफेर, पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक हिरासत में।

नेपाल के राजनीतिक इतिहास में यह घटनाक्रम एक नए युग की आहट माना जा रहा है। शनिवार तड़के नेपाल पुलिस की विशेष

Mar 28, 2026 - 15:05
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नेपाल में सत्ता परिवर्तन के साथ ही बड़ा राजनीतिक उलटफेर, पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक हिरासत में।
नेपाल में सत्ता परिवर्तन के साथ ही बड़ा राजनीतिक उलटफेर, पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक हिरासत में।
  • नवनियुक्त बालेन्द्र शाह सरकार का पहला बड़ा प्रहार, पिछले साल हुए हिंसक प्रदर्शनों में 'आपराधिक लापरवाही' के आरोप में हुई गिरफ्तारियां
  • काठमांडू से भक्तपुर तक पुलिस की भारी तैनाती, पूर्व सत्ताधीशों पर कानूनी शिकंजा कसने से हिमालयी राष्ट्र की राजनीति में मचा हड़कंप

नेपाल के राजनीतिक इतिहास में यह घटनाक्रम एक नए युग की आहट माना जा रहा है। शनिवार तड़के नेपाल पुलिस की विशेष टुकड़ियों ने भक्तपुर जिले के गुंडू स्थित केपी शर्मा ओली के निजी आवास और सूर्यविनायक स्थित रमेश लेखक के निवास पर एक साथ छापेमारी की। सुरक्षा बलों की भारी मौजूदगी के बीच दोनों नेताओं को हिरासत में लिया गया। यह कार्रवाई उस समय हुई जब देश में बालेन्द्र शाह के नेतृत्व वाली नई सरकार ने कार्यभार संभाला ही था। पुलिस प्रशासन के अनुसार, यह गिरफ्तारियां पिछले साल सितंबर में हुए देशव्यापी 'जन जेड' (Gen Z) विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई मौतों और उन प्रदर्शनों को कुचलने के लिए अपनाए गए दमनकारी तरीकों की जांच के संदर्भ में की गई हैं।

बालेन्द्र शाह की सरकार ने सत्ता संभालते ही यह स्पष्ट कर दिया था कि वे जनता के प्रति जवाबदेही और न्याय को अपनी प्राथमिकता बनाएंगे। शुक्रवार शाम को आयोजित पहली कैबिनेट बैठक में सरकार ने गौरी बहादुर कार्की आयोग की रिपोर्ट को पूरी तरह से लागू करने का निर्णय लिया था। यह आयोग पिछले साल के हिंसक प्रदर्शनों की जांच के लिए गठित किया गया था, जिसमें दर्जनों युवाओं की जान गई थी। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से तत्कालीन नेतृत्व को आपराधिक लापरवाही और गैर-इरादतन हत्या जैसे गंभीर मामलों के लिए जिम्मेदार ठहराने की सिफारिश की गई थी। इसी रिपोर्ट के आधार पर गृह मंत्रालय ने पुलिस को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए, जिसके बाद शनिवार की सुबह इन हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारियों की गवाह बनी।

पिछले साल सितंबर में जब तत्कालीन सरकार ने सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाया था, तो उसके खिलाफ युवाओं का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा था। उस दौरान हुए प्रदर्शनों में पुलिस की गोलीबारी से लगभग 19 लोगों की मौत हुई थी और कुल मिलाकर यह आंकड़ा 75 के पार चला गया था। जांच आयोग ने पाया कि प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए न्यूनतम बल के प्रयोग के बजाय अत्यधिक क्रूरता दिखाई गई थी। आयोग की रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि तत्कालीन प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने जमीनी स्थिति की जानकारी होने के बावजूद बल प्रयोग को रोकने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए। इसी को आधार बनाकर पुलिस ने अब धारा 181 और 182 के तहत मामला दर्ज किया है, जिसमें दोषी पाए जाने पर 10 साल तक की जेल का प्रावधान है।

इनसेट: 'जनरेशन जेड' विद्रोह का प्रभाव नेपाल में पिछले साल हुए युवा विद्रोह ने न केवल केपी शर्मा ओली की सरकार को हिला दिया था, बल्कि पारंपरिक राजनीतिक दलों के आधार को भी ध्वस्त कर दिया था। इसी जनाक्रोश की लहर पर सवार होकर बालेन्द्र शाह और उनकी पार्टी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। युवाओं की मांग थी कि प्रदर्शनों के दौरान मारे गए साथियों को न्याय मिले और जिम्मेदार नेताओं को सजा दी जाए।

इस गिरफ्तारी के बाद नेपाल के राजनीतिक गलियारों में तनाव की स्थिति बनी हुई है। केपी शर्मा ओली की पार्टी के समर्थकों ने कई स्थानों पर पुलिस की कार्रवाई का विरोध करने का प्रयास किया, लेकिन प्रशासन ने राजधानी और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को बेहद कड़ा कर दिया है। नवनियुक्त गृह मंत्री ने सोशल मीडिया के माध्यम से जनता को संबोधित करते हुए कहा कि कानून की नजर में कोई भी व्यक्ति बड़ा नहीं है और यह कार्रवाई किसी भी प्रकार की प्रतिशोध की भावना से नहीं, बल्कि न्याय की स्थापना के लिए की गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह उन परिवारों के लिए न्याय की शुरुआत है जिन्होंने पिछले साल के संघर्षों में अपने अपनों को खोया है।

पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और रमेश लेखक को वर्तमान में काठमांडू जिला पुलिस सर्कल के हिरासत केंद्र में रखा गया है। चूंकि शनिवार को नेपाल में सार्वजनिक अवकाश होता है, इसलिए उन्हें रविवार को अदालत में पेश किए जाने की संभावना है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि उनके पास पर्याप्त साक्ष्य और जांच रिपोर्ट मौजूद है जो इन नेताओं की सीधी जवाबदेही को पुष्ट करती है। इस कानूनी प्रक्रिया के दौरान कई अन्य उच्च पदस्थ अधिकारियों और पुलिस प्रमुखों पर भी गाज गिरने की संभावना है, जिनके नाम आयोग की रिपोर्ट में शामिल हैं। सरकार ने संकेत दिए हैं कि वे इस मामले में किसी भी स्तर पर ढिलाई बरतने के मूड में नहीं हैं।

इस घटनाक्रम ने दक्षिण एशिया के अन्य देशों का ध्यान भी अपनी ओर खींचा है। अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों का मानना है कि नेपाल की यह नई सरकार एक संदेश देने की कोशिश कर रही है कि वह पुराने ढर्रे की राजनीति को बदलकर एक नई जवाबदेह व्यवस्था कायम करना चाहती है। हालांकि, विपक्ष ने इस कार्रवाई को राजनीतिक द्वेष से प्रेरित बताया है और इसे लोकतंत्र पर हमला करार दिया है। केपी शर्मा ओली की पार्टी ने आपातकालीन बैठक बुलाकर इस कदम के खिलाफ रणनीति बनाने की घोषणा की है, जिससे आने वाले दिनों में नेपाल की सड़कों पर एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने के आसार हैं।

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