'मैं नहीं, हम सब मिलकर चलाएंगे सरकार', मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से पहले शुभेंदु अधिकारी का बड़ा संकल्प
मुख्यमंत्री के रूप में शुभेंदु अधिकारी के सामने सबसे बड़ी चुनौती राज्य की अर्थव्यवस्था को पुनः जीवित करना और औद्योगिक निवेश को वापस लाना है। उन्होंने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि उनकी पहली प्राथमिकता 'मोदी की गारंटी' को बंगाल के हर घर
- पश्चिम बंगाल में नए युग का उदय, शुभेंदु अधिकारी के हाथों में प्रदेश की कमान
- ब्रिगेड परेड मैदान में ऐतिहासिक शपथ ग्रहण समारोह, ममता बनर्जी के 15 साल के वर्चस्व का अंत
पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज एक नया इतिहास रचा जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता शुभेंदु अधिकारी आज कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड मैदान में हजारों समर्थकों और गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। यह पल केवल एक व्यक्ति का मुख्यमंत्री बनना नहीं है, बल्कि बंगाल की सत्ता संरचना में आए उस व्यापक बदलाव का प्रतीक है, जिसके लिए भाजपा ने पिछले कई वर्षों से संघर्ष किया था। 2026 के विधानसभा चुनावों में मिली प्रचंड जीत ने यह साफ कर दिया कि बंगाल की जनता अब एक नई प्रशासनिक और वैचारिक दिशा की ओर बढ़ना चाहती है। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से ठीक पहले शुभेंदु अधिकारी ने अपनी कार्यशैली के संकेत देते हुए कहा कि उनकी सरकार किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि सामूहिक भागीदारी और सबका साथ-सबका विकास के मंत्र पर आधारित होगी।
विधानसभा चुनाव के नतीजों ने पूरे देश को चौंका दिया है, जहां भाजपा ने 293 सीटों में से 207 सीटों पर कब्जा जमाकर बहुमत का जादुई आंकड़ा पार कर लिया। तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के लंबे शासन को उखाड़ फेंकने में शुभेंदु अधिकारी की रणनीतियों और उनके जमीनी संघर्ष ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई। सबसे दिलचस्प मुकाबला भवानीपुर सीट पर देखने को मिला, जहां शुभेंदु ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उनके ही गढ़ में 15,000 से अधिक वोटों के अंतर से शिकस्त दी। यह जीत केवल एक सीट की नहीं थी, बल्कि यह बंगाल की राजनीति में आए उस गहरे परिवर्तन की गूंज थी जिसने तृणमूल के किले को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। इस प्रचंड जीत के बाद भाजपा विधायक दल की बैठक में सर्वसम्मति से शुभेंदु अधिकारी को नेता चुना गया, जिसके बाद राज्यपाल आर.एन. रवि ने उन्हें सरकार बनाने का न्योता दिया।
आज सुबह 11 बजे होने वाला शपथ ग्रहण समारोह किसी उत्सव से कम नहीं है। ब्रिगेड परेड मैदान, जो ऐतिहासिक रूप से बंगाल की राजनीतिक शक्ति का केंद्र रहा है, आज केसरिया रंग में रंगा नजर आ रहा है। इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा शासित कई राज्यों के मुख्यमंत्री शिरकत कर रहे हैं। प्रधानमंत्री की उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि केंद्र सरकार बंगाल के विकास और वहां की कानून व्यवस्था में सुधार को अपनी शीर्ष प्राथमिकताओं में रखती है। सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के बीच लाखों कार्यकर्ताओं का हुजूम कोलकाता की सड़कों पर उमड़ा है, जो बंगाल के पहले भाजपा मुख्यमंत्री के 'राजतिलक' का गवाह बनने के लिए उत्साहित हैं। पश्चिम बंगाल के पिछले तीन मुख्यमंत्री ज्योति बसु, बुद्धदेव भट्टाचार्य और ममता बनर्जी सभी कोलकाता से ताल्लुक रखते थे। शुभेंदु अधिकारी पिछले लगभग 55 वर्षों में राज्य के ऐसे पहले मुख्यमंत्री होंगे जो ग्रामीण बंगाल (पूर्व मेदिनीपुर) के हृदय स्थल से आते हैं। यह बंगाल की सत्ता का कोलकाता के अभिजात्य वर्ग से निकलकर ग्रामीण क्षेत्रों की ओर स्थानांतरण माना जा रहा है।
शुभेंदु अधिकारी का राजनीतिक सफर संघर्षों से भरा रहा है। पूर्व मेदिनीपुर के रहने वाले शुभेंदु ने अपने करियर की शुरुआत जमीनी स्तर के आंदोलनों से की थी। नंदीग्राम आंदोलन के दौरान उन्होंने जिस तरह से किसानों की आवाज उठाई, उसने उन्हें बंगाल की राजनीति में एक बड़े जननेता के रूप में स्थापित कर दिया था। साल 2020 में तृणमूल कांग्रेस का साथ छोड़कर भाजपा में शामिल होने का उनका फैसला एक बड़ा जुआ माना जा रहा था, लेकिन समय के साथ उन्होंने साबित कर दिया कि वे बंगाल की नब्ज को बेहतर समझते हैं। विपक्ष के नेता के रूप में उन्होंने विधानसभा के भीतर और बाहर सरकार की नीतियों का प्रखर विरोध किया, जिससे जनता के बीच उनकी छवि एक ऐसे योद्धा की बनी जो सत्ता की आंखों में आंखें डालकर सच बोल सकता है।
मुख्यमंत्री के रूप में शुभेंदु अधिकारी के सामने सबसे बड़ी चुनौती राज्य की अर्थव्यवस्था को पुनः जीवित करना और औद्योगिक निवेश को वापस लाना है। उन्होंने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि उनकी पहली प्राथमिकता 'मोदी की गारंटी' को बंगाल के हर घर तक पहुँचाना है। केंद्र सरकार की जनहितकारी योजनाओं, जैसे कि आयुष्मान भारत और पीएम किसान सम्मान निधि, जिन्हें पूर्ववर्ती सरकार ने लागू करने में अड़चनें पैदा की थीं, उन्हें अब पूरे प्रदेश में प्राथमिकता के आधार पर लागू किया जाएगा। इसके अलावा, महिलाओं की सुरक्षा और भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति उनकी सरकार का मुख्य आधार होगी। उन्होंने प्रशासनिक तंत्र को भी संकेत दिया है कि अब केवल काम करने वालों को ही सम्मान मिलेगा।
बंगाल में चुनाव के बाद हुई हिंसा की घटनाओं ने राष्ट्रीय स्तर पर चिंता पैदा की थी। शपथ ग्रहण से पहले शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक की हत्या और कई कार्यकर्ताओं पर हुए हमलों ने स्थिति को तनावपूर्ण बना दिया था। ऐसे माहौल में सत्ता संभालना शुभेंदु के लिए कांटों भरा ताज पहनने जैसा है। हालांकि, उन्होंने अपने समर्थकों से शांति बनाए रखने की अपील की है और कहा है कि अब बदला लेने का नहीं, बल्कि बंगाल को बदलने का समय है। वे एक ऐसी न्यायपूर्ण व्यवस्था स्थापित करना चाहते हैं जहां किसी भी राजनीतिक दल के कार्यकर्ता को अपने विचारों के कारण भयभीत न होना पड़े। उनका 'भॉय आउट, भोर्सा इन' (डर बाहर, भरोसा अंदर) का नारा इसी नई कार्यप्रणाली का उद्घोष है।
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