'लंबी लड़ाई के लिए तैयार था भारत': ऑपरेशन सिंदूर की पहली बरसी पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का बड़ा बयान।

भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली में आयोजित एक सुरक्षा शिखर सम्मेलन के दौरान 'ऑपरेशन सिंदूर' की पहली वर्षगांठ पर

Apr 30, 2026 - 12:44
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'लंबी लड़ाई के लिए तैयार था भारत': ऑपरेशन सिंदूर की पहली बरसी पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का बड़ा बयान।
'लंबी लड़ाई के लिए तैयार था भारत': ऑपरेशन सिंदूर की पहली बरसी पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का बड़ा बयान।
  • पाकिस्तान के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' नीति: राजनाथ सिंह बोले- आतंकवाद के केंद्र को खत्म करना हमारी प्राथमिकता
  • स्वेच्छा से रोका था सैन्य ऑपरेशन: रक्षा मंत्री ने सीमा पार बैठे दुश्मनों को दी कड़ी चेतावनी, कहा- भारत अब कमजोर नहीं

भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली में आयोजित एक सुरक्षा शिखर सम्मेलन के दौरान 'ऑपरेशन सिंदूर' की पहली वर्षगांठ पर देश की सैन्य तत्परता को लेकर कई बड़े खुलासे किए हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि एक वर्ष पहले जब सीमा पर तनाव चरम पर था और भारतीय सेना 'ऑपरेशन सिंदूर' को अंजाम दे रही थी, तब भारत किसी भी तरह की लंबी सैन्य मुठभेड़ के लिए पूरी तरह से तैयार था। रक्षा मंत्री के अनुसार, भारत ने इस ऑपरेशन को किसी बाहरी दबाव में आकर नहीं, बल्कि अपनी शर्तों पर और स्वेच्छा से रोकने का निर्णय लिया था। यह बयान इस बात की पुष्टि करता है कि वर्तमान सरकार के तहत भारतीय रक्षा बल न केवल त्वरित प्रतिक्रिया देने में सक्षम हैं, बल्कि वे लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष को झेलने और उसमें विजय प्राप्त करने की रणनीतिक गहराई भी रखते हैं। रक्षा मंत्री ने पड़ोसी देश पाकिस्तान के प्रति कड़ा रुख अपनाते हुए उसे अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद का प्रमुख केंद्र करार दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक आतंकवाद की जड़ें पूरी तरह से खत्म नहीं हो जातीं, तब तक दक्षिण एशिया में स्थायी शांति की कल्पना करना कठिन है। उनके संबोधन का मुख्य बिंदु यह था कि भारत अब केवल अपनी सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि वह उन स्रोतों को नष्ट करने की क्षमता रखता है जहाँ से भारत के खिलाफ साजिशें रची जाती हैं। राजनाथ सिंह ने यह भी साफ किया कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति में कोई लचीलापन नहीं है और सरकार 'जीरो टॉलरेंस' के सिद्धांत पर काम कर रही है, जिसका अर्थ है कि सुरक्षा के साथ किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्व क्षमता और साहसिक निर्णयों की सराहना करते हुए रक्षा मंत्री ने बताया कि कैसे बीते कुछ वर्षों में भारत की वैश्विक छवि एक सशक्त सैन्य शक्ति के रूप में उभरी है। उन्होंने कहा कि पहले के समय में भारत को केवल एक प्रतिक्रियावादी देश के रूप में देखा जाता था, लेकिन अब भारत रणनीतिक बढ़त बनाने वाले देश के रूप में जाना जाता है। प्रधानमंत्री के स्पष्ट निर्देशों के कारण ही भारतीय सेना को वह स्वायत्तता मिली है, जिसकी मदद से 'ऑपरेशन सिंदूर' जैसे जटिल और गुप्त अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया। इस ऑपरेशन की सफलता ने न केवल घुसपैठ की कोशिशों को नाकाम किया, बल्कि दुश्मन के हौसले भी पस्त कर दिए। 'ऑपरेशन सिंदूर' भारतीय रक्षा इतिहास का वह अध्याय है जहाँ सेना ने आधुनिक तकनीक और पारंपरिक शौर्य का अद्भुत तालमेल बिठाया था। रक्षा मंत्री का यह खुलासा कि भारत लंबी लड़ाई के लिए तैयार था, दुश्मन देशों को यह संदेश देता है कि भारत की सैन्य रसद और सामरिक योजना बेहद सुदृढ़ है। सीमा पार से होने वाली गतिविधियों पर चर्चा करते हुए राजनाथ सिंह ने बताया कि भारत अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन केवल डराने के लिए नहीं, बल्कि शांति स्थापित करने के लिए करता है। हालांकि, यदि शांति की अपील को कमजोरी समझा जाता है, तो भारत ईंट का जवाब पत्थर से देने में सक्षम है। उन्होंने सुरक्षा बलों के आधुनिकीकरण और स्वदेशी रक्षा उत्पादन (आत्मनिर्भर भारत) के महत्व को भी रेखांकित किया, जिसने युद्ध की स्थिति में विदेशों पर निर्भरता को कम किया है। यही कारण है कि ऑपरेशन के दौरान भारत के पास हथियारों और रसद की कोई कमी नहीं थी और सेना लंबे समय तक मोर्चा संभालने की मानसिक और भौतिक स्थिति में थी।

रक्षा मंत्री ने आतंकवाद की बदलती प्रकृति पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज आतंकवाद केवल हथियारों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हाइब्रिड वॉरफेयर और साइबर खतरों के माध्यम से भी फैल रहा है। पाकिस्तान द्वारा संचालित आतंकी इकोसिस्टम को ध्वस्त करने के लिए भारत अब बहुआयामी दृष्टिकोण अपना रहा है। इसमें वित्तीय प्रतिबंधों से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान को अलग-थलग करने तक की रणनीतियां शामिल हैं। उन्होंने विश्वास दिलाया कि सेना और खुफिया एजेंसियां आपसी तालमेल के साथ काम कर रही हैं ताकि भविष्य में 'ऑपरेशन सिंदूर' जैसी स्थिति आने पर और भी प्रभावी ढंग से जवाब दिया जा सके। सम्मेलन के दौरान यह बात भी सामने आई कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारतीय वायुसेना, थल सेना और नौसेना के बीच जो समन्वय दिखा, वह अद्वितीय था। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत की परमाणु नीति और सैन्य सिद्धांत हमेशा शांति के समर्थक रहे हैं, लेकिन रक्षात्मक बने रहने का मतलब यह नहीं है कि हम अपनी सुरक्षा से खिलवाड़ होने देंगे। उन्होंने देशवासियों को आश्वस्त किया कि भारतीय सीमाएं सुरक्षित हाथों में हैं और किसी भी विदेशी ताकत को भारत की संप्रभुता को चुनौती देने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार सुरक्षा ढांचे को और अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए निरंतर निवेश कर रही है।

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