'नमो 108' कमल से लेकर बनारसी सिल्क तक, वियतनामी राष्ट्रपति टो लैम को भेंट किए पीएम मोदी के तोहफों में दिखी भारत की समृद्ध विरासत और आध्यात्मिक झलक
वियतनाम के राष्ट्रपति की यह यात्रा तब हो रही है जब दक्षिण चीन सागर और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भू-राजनीतिक चुनौतियां बढ़ रही हैं। ऐसे समय में भारत और वियतनाम का एक साथ आना स्थिरता का संकेत है। पीएम मोदी द्वारा दिए गए उपहारों चाहे वह आध्यात्मिक बुद्ध
- भारत-वियतनाम मित्रता की नई मिसाल: पीएम मोदी ने वियतनामी राष्ट्रपति टो लैम को भेंट किए अनमोल सांस्कृतिक उपहार
- वियतनाम के राष्ट्रपति की ऐतिहासिक भारत यात्रा: बोधगया की यादों और पारंपरिक कलाकृतियों के साथ विदा हुए टो लैम
भारत और वियतनाम के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों को एक नई ऊंचाई देते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वियतनाम के राष्ट्रपति टो लैम की तीन दिवसीय राजकीय यात्रा के दौरान उन्हें भारतीय कला और आध्यात्मिकता से ओतप्रोत कई विशेष उपहार भेंट किए। टो लैम 5 से 7 मई 2026 तक भारत के दौरे पर रहे, जो राष्ट्रपति पद संभालने के बाद उनकी पहली भारत यात्रा थी। इस यात्रा का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह दोनों देशों के बीच 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' (Comprehensive Strategic Partnership) की 10वीं वर्षगांठ के अवसर पर हुई। द्विपक्षीय वार्ताओं और रक्षा-सुरक्षा समझौतों के साथ-साथ, पीएम मोदी द्वारा दिए गए इन तोहफों ने दोनों देशों के बीच 'सॉफ्ट डिप्लोमेसी' और सांस्कृतिक जुड़ाव को मजबूती प्रदान की। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दिए गए उपहारों में सबसे अनूठा और चर्चा का केंद्र 'नमो 108' (Namoh 108) कमल रहा। यह भारत के राष्ट्रीय पुष्प कमल की एक विशेष किस्म है, जिसे उत्तर प्रदेश के लखनऊ स्थित 'नेशनल बॉटैनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट' (NBRI) द्वारा विकसित किया गया है। इस कमल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें ठीक 108 पंखुड़ियां होती हैं। भारतीय परंपरा और बौद्ध धर्म में 108 का अंक अत्यंत पवित्र माना जाता है, जो माला के मनकों और ब्रह्मांडीय गणनाओं से जुड़ा है। यह उपहार न केवल भारत की जैव-तकनीकी प्रगति को दर्शाता है, बल्कि वियतनाम के साथ हमारे साझा बौद्ध विरासत के प्रति सम्मान भी प्रकट करता है। 'नमो' शब्द संस्कृत से लिया गया है जिसका अर्थ 'नमन' होता है, जो इस भेंट को एक गहरा आध्यात्मिक अर्थ प्रदान करता है।
पीएम मोदी ने राष्ट्रपति टो लैम को पीतल से बनी भगवान बुद्ध की एक अत्यंत सुंदर और कलात्मक प्रतिमा भी भेंट की। इस प्रतिमा में बुद्ध को बोधि वृक्ष के नीचे ध्यान की मुद्रा में दिखाया गया है। चूंकि राष्ट्रपति टो लैम ने अपनी यात्रा की शुरुआत बोधगया के महाबोधि मंदिर में प्रार्थना करके की थी, इसलिए यह उपहार उनके लिए अत्यंत प्रासंगिक और भावुक कर देने वाला था। यह प्रतिमा उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद के कुशल कारीगरों द्वारा तैयार की गई है, जो अपनी पीतल कला के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। प्रतिमा में बुद्ध 'अभय मुद्रा' में हैं, जो निडरता और सुरक्षा का प्रतीक है। वृक्ष की बारीक शाखाओं और पत्तियों का काम भारतीय धातु शिल्प की उत्कृष्टता को जीवंत करता है। उपहारों की इस श्रृंखला में वाराणसी का विश्वप्रसिद्ध 'बनारसी सिल्क' भी शामिल था। यह सिल्क फैब्रिक विशेष रूप से वियतनाम की पारंपरिक पोशाक 'आओ दाई' (Ao dai) को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। गहरे फुकिया (Fuchsia) रंग के इस कपड़े पर बनी नक्काशी भारतीय और वियतनामी सौंदर्यशास्त्र का एक अद्भुत संगम पेश करती है, जो दोनों देशों के अटूट संबंधों का प्रतीक है। उपहारों के साथ-साथ वियतनामी प्रतिनिधिमंडल के स्वागत में भारतीय व्यंजनों का भी विशेष ध्यान रखा गया। राष्ट्रपति टो लैम के सम्मान में आयोजित भोज में भारत के विभिन्न क्षेत्रों के प्रसिद्ध और जीआई (GI) टैग प्राप्त व्यंजनों को परोसा गया। इनमें बिहार का मशहूर 'सिलाव खाजा', 'गया का अनरसा', और 'मिथिला मखाना' शामिल थे। चूंकि राष्ट्रपति ने बिहार की यात्रा की थी, इसलिए वहां के पारंपरिक स्वादों को मेनू में शामिल करना एक विचारशील कदम था। इसके अलावा महाराष्ट्र के 'रत्नागिरी हापुस आम' और 'हाजीपुर का मालभोग केला' भी परोसे गए। भोजन में श्रीअन्न (मिलेट्स) से बनी न्यूट्रिशन बार भी शामिल थी, जो वैश्विक स्तर पर भारत के मोटे अनाज अभियान को रेखांकित करती है।
इस यात्रा के दौरान केवल उपहारों का ही आदान-प्रदान नहीं हुआ, बल्कि पीएम मोदी और राष्ट्रपति टो लैम ने द्विपक्षीय संबंधों को 'उन्नत व्यापक रणनीतिक साझेदारी' (Enhanced Comprehensive Strategic Partnership) तक ले जाने पर सहमति व्यक्त की। दोनों नेताओं ने रक्षा, समुद्र सुरक्षा, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे 13 महत्वपूर्ण क्षेत्रों में समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए। भारत ने वियतनाम के साथ अपने व्यापार को 2030 तक 25 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य भी निर्धारित किया है। पीएम मोदी ने वियतनाम को भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति और इंडो-पैसिफिक विजन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताया। इन कूटनीतिक समझौतों के पीछे छिपी सांस्कृतिक गर्मजोशी ने इस यात्रा को और भी सफल बना दिया। वियतनाम के राष्ट्रपति की यह यात्रा तब हो रही है जब दक्षिण चीन सागर और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भू-राजनीतिक चुनौतियां बढ़ रही हैं। ऐसे समय में भारत और वियतनाम का एक साथ आना स्थिरता का संकेत है। पीएम मोदी द्वारा दिए गए उपहारों चाहे वह आध्यात्मिक बुद्ध प्रतिमा हो या वैज्ञानिक रूप से विकसित नमो कमल ने यह संदेश दिया है कि भारत अपनी जड़ों और परंपराओं को आधुनिकता के साथ जोड़कर वैश्विक मित्र बनाना चाहता है। राष्ट्रपति टो लैम ने भी भारत के आतिथ्य की सराहना की और बोधगया में मिले आध्यात्मिक अनुभव को अपने जीवन का एक यादगार पल बताया। इन तोहफों ने दोनों देशों के बीच 'जन-से-जन' (People-to-People) संपर्क को और प्रगाढ़ करने का काम किया है।
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