शेयर बाजार में ब्लैक मंडे- प्रधानमंत्री की बचत अपील के बाद सेंसेक्स 900 अंक लुढ़का, निफ्टी में भी बड़ी गिरावट

सेक्टरवार विश्लेषण करें तो आभूषण और गोल्ड लोन कंपनियों के शेयर सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। प्रधानमंत्री द्वारा शादियों में सोने की खरीदारी कम करने और इसे एक वर्ष तक टालने की सलाह के बाद टाइटन, कल्याण ज्वेलर्स और सेनको गोल्ड जैसी कंपनियों के शेयरों में 5 से 9 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।

May 11, 2026 - 11:20
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शेयर बाजार में ब्लैक मंडे- प्रधानमंत्री की बचत अपील के बाद सेंसेक्स 900 अंक लुढ़का, निफ्टी में भी बड़ी गिरावट
प्रतीकात्मक चित्र, AI Image

  • निवेशकों में हड़कंप: पीएम मोदी के 'किफायत' संदेश से कंजम्पशन सेक्टर के शेयर टूटे, बाजार में मची भारी बिकवाली
  • विदेशी मुद्रा भंडार बचाने की चुनौती: सोने और ईंधन के कम इस्तेमाल की सलाह का असर, दलाल स्ट्रीट पर लाल निशान का दबदबा

भारतीय शेयर बाजार के लिए सप्ताह का पहला दिन यानी सोमवार 'ब्लैक मंडे' साबित हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्र के नाम दिए गए एक संबोधन के बाद, जिसमें उन्होंने देश के नागरिकों से विदेशी मुद्रा भंडार बचाने के लिए ईंधन, सोने और अन्य आयातित वस्तुओं के इस्तेमाल में कटौती करने की अपील की थी, घरेलू बाजारों में जबरदस्त बिकवाली देखी गई। सोमवार सुबह कारोबार की शुरुआत होते ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स करीब 900 से 1000 अंकों तक टूट गया, वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी 23,950 के महत्वपूर्ण स्तर के नीचे फिसलकर 23,900 के आसपास कारोबार करता नजर आया। इस भारी गिरावट ने निवेशकों की संपत्ति को चंद मिनटों में ही करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया है, जिससे बाजार में अनिश्चितता का माहौल बन गया है। बाजार में इस गिरावट के पीछे सबसे प्रमुख कारण प्रधानमंत्री की वह अपील मानी जा रही है जिसमें उन्होंने देश के करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) को नियंत्रित करने के लिए 'किफायत' और 'मितव्ययिता' का मंत्र दिया है। उन्होंने विशेष रूप से पेट्रोल, डीजल, खाद्य तेल और सोने की खपत कम करने के साथ-साथ अनावश्यक विदेश यात्राओं से बचने का सुझाव दिया है। इस संदेश को बाजार ने 'उपभोग' (Consumption) और 'मांग' (Demand) में कमी के संकेत के रूप में लिया है। इसके चलते आभूषण, ऑटोमोबाइल, विमानन और एफएमसीजी (FMCG) सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा मार पड़ी है। निवेशकों को डर है कि यदि जनता ने खर्च कम किया तो इन क्षेत्रों से जुड़ी कंपनियों के लाभ मार्जिन और राजस्व में आगामी तिमाहियों में भारी गिरावट आ सकती है।

सेक्टरवार विश्लेषण करें तो आभूषण और गोल्ड लोन कंपनियों के शेयर सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। प्रधानमंत्री द्वारा शादियों में सोने की खरीदारी कम करने और इसे एक वर्ष तक टालने की सलाह के बाद टाइटन, कल्याण ज्वेलर्स और सेनको गोल्ड जैसी कंपनियों के शेयरों में 5 से 9 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। इसी तरह, ईंधन की खपत कम करने की अपील का असर ऑटोमोबाइल और तेल मार्केटिंग कंपनियों पर दिखा। निवेशकों को आशंका है कि यदि वर्क-फ्रॉम-होम दोबारा बढ़ता है और लोग निजी वाहनों का प्रयोग कम करते हैं, तो वाहनों की बिक्री और पेट्रोलियम उत्पादों की मांग पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इस वजह से मारुति सुजुकी, एमएंडएम और बीपीसीएल जैसे दिग्गज शेयरों में भी बिकवाली का दबाव देखा गया। प्रधानमंत्री की अपील को एक आर्थिक संकट प्रबंधन की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार में आ रही गिरावट और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार ने 'मांग प्रबंधन' के जरिए रुपये को सहारा देने की कोशिश की है। विदेशी मुद्रा प्रबंधन को लेकर सरकार की चिंताओं ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) को भी सतर्क कर दिया है। बाजार में चल रहे उतार-चढ़ाव के बीच विदेशी निवेशकों ने अपनी पोजीशन कम करना शुरू कर दिया है, जिससे रुपये पर दबाव और बढ़ गया है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जिसने पहले ही महंगाई की चिंता बढ़ा रखी थी। ऐसे में पीएम मोदी के संदेश ने बाजार को यह संकेत दिया है कि सरकार आने वाले समय में राजकोषीय असंतुलन को रोकने के लिए कुछ कड़े कदम उठा सकती है। इस संभावित सख्ती के डर से बैंकिंग और वित्तीय सेवा क्षेत्र (Bank Nifty) में भी भारी गिरावट आई, जिससे एसबीआई और एचडीएफसी बैंक जैसे हेवीवेट शेयरों ने सूचकांक को नीचे खींचने का काम किया।

बाजार में केवल कंजम्पशन सेक्टर ही नहीं, बल्कि एविएशन और होटल इंडस्ट्री भी लाल निशान में कारोबार कर रही है। प्रधानमंत्री ने देशवासियों से अनावश्यक विदेश यात्राओं और विदेशी छुट्टियों से बचने का आग्रह किया है, जिसका सीधा असर इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो) और बड़े होटल समूहों के शेयरों पर पड़ा है। यह गिरावट उस समय आई है जब बाजार पहले से ही पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं से जूझ रहा था। तकनीकी रूप से देखें तो निफ्टी का 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे गिरना एक कमजोर रुझान का संकेत है, जिससे छोटे और मध्यम स्तर के निवेशकों (Midcap & Smallcap) में डर बढ़ गया है। हालांकि, इस गिरावट के बीच कुछ क्षेत्रों में खरीदारी भी देखी जा रही है। आईटी और फार्मा सेक्टर के चुनिंदा शेयर हरे निशान में कारोबार कर रहे हैं। आईटी शेयरों में मजबूती का मुख्य कारण डॉलर के मुकाबले रुपये का कमजोर होना है, जिससे निर्यात-आधारित कंपनियों को फायदा होने की उम्मीद है। साथ ही, डिफेंस और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में भी कुछ स्थिरता देखी गई है क्योंकि ये क्षेत्र सरकार की लंबी अवधि की प्राथमिकताओं में शामिल हैं। बाजार का एक वर्ग यह भी मान रहा है कि यह गिरावट केवल एक 'नी-जर्क रिएक्शन' (तत्काल प्रतिक्रिया) है और जैसे ही बाजार इस नए घटनाक्रम को पचा लेगा, स्थितियां धीरे-धीरे सामान्य होने लगेंगी।

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