छत्तीसगढ़ की 35 बेटियां झारखंड में बंधक, वीडियो भेजकर मांगी मदद, नर्सिंग की नौकरी के बहाने जालसाजों ने बनाया शिकार

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब बंधक बनाई गई युवतियों में से एक ने साहस दिखाते हुए छिपकर एक वीडियो बनाया और उसे छत्तीसगढ़ में अपने परिचितों और परिजनों को भेजा। सोशल मीडिया और व्यक्तिगत संदेशों के माध्यम से प्र

May 9, 2026 - 09:47
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छत्तीसगढ़ की 35 बेटियां झारखंड में बंधक, वीडियो भेजकर मांगी मदद, नर्सिंग की नौकरी के बहाने जालसाजों ने बनाया शिकार
AI Image

  • कांकेर जिले की लड़कियों ने वीडियो भेजकर मांगी मदद, गढ़वा में कैद नर्सिंग स्टाफ की आपबीती आई सामने
  • अंतरराज्यीय मानव तस्करी की आशंका, नौकरी का झांसा देकर छत्तीसगढ़ की युवतियों को झारखंड में किया गया नजरबंद

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग अंतर्गत कांकेर जिले से रोजगार की तलाश में पड़ोसी राज्य झारखंड गईं 35 लड़कियों के बंधक बनाए जाने की खबर ने दोनों राज्यों के प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा दिया है। ये सभी लड़कियां बेहतर भविष्य और नर्सिंग के क्षेत्र में काम करने के उद्देश्य से झारखंड के गढ़वा जिले में स्थित एक निजी संस्थान में गई थीं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इन युवतियों को अच्छे वेतन और सुरक्षित कार्य वातावरण का प्रलोभन देकर ले जाया गया था, लेकिन वहां पहुँचते ही परिस्थितियां पूरी तरह बदल गईं। लड़कियों को एक बंद परिसर में रखा गया है और उन्हें उनकी मर्जी के बिना कहीं भी आने-जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है। इस घटना ने एक बार फिर आदिवासी बहुल क्षेत्रों से होने वाले पलायन और उसके पीछे छिपे संगठित गिरोहों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब बंधक बनाई गई युवतियों में से एक ने साहस दिखाते हुए छिपकर एक वीडियो बनाया और उसे छत्तीसगढ़ में अपने परिचितों और परिजनों को भेजा। सोशल मीडिया और व्यक्तिगत संदेशों के माध्यम से प्रसारित इस वीडियो में लड़कियां रोते हुए अपनी सुरक्षा की गुहार लगा रही हैं और वहां हो रहे दुर्व्यवहार की जानकारी दे रही हैं। वीडियो संदेश में स्पष्ट किया गया है कि उन्हें नर्सिंग की नौकरी देने के नाम पर धोखे से लाया गया और अब उन्हें एक कमरे में बंद कर दिया गया है। परिजनों को जैसे ही इस भयावह स्थिति का पता चला, उन्होंने तत्काल स्थानीय पुलिस और प्रशासन से संपर्क किया। कांकेर जिले के पुलिस अधीक्षक और कलेक्टर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल झारखंड के गढ़वा जिला प्रशासन से संपर्क स्थापित किया है।

पीड़ित लड़कियों के परिजनों ने बताया कि कुछ बिचौलियों ने उन्हें नर्सिंग ट्रेनिंग और निजी अस्पतालों में नौकरी दिलाने का झांसा दिया था। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से ताल्लुक रखने वाली ये लड़कियां परिवार की मदद करने के उद्देश्य से झारखंड जाने के लिए तैयार हो गई थीं। हालांकि, वहां पहुँचने के बाद उन्हें न तो कोई काम दिया गया और न ही उनके रहने और खाने की उचित व्यवस्था की गई। जब लड़कियों ने वापस लौटने की इच्छा जताई, तो उन्हें डराया-धमकाया गया और उनके मोबाइल फोन भी छीनने के प्रयास किए गए। बंधक बनाई गई अधिकांश लड़कियां कांकेर जिले के अंतागढ़, कोयलीबेड़ा और भानुप्रतापपुर जैसे संवेदनशील इलाकों की रहने वाली हैं, जो रोजगार के सीमित अवसरों के कारण अक्सर बाहरी राज्यों का रुख करती हैं। मानव तस्करी और बंधक बनाए जाने के मामलों में अक्सर देखा गया है कि फर्जी प्लेसमेंट एजेंसियां सोशल मीडिया या स्थानीय एजेंटों के माध्यम से ग्रामीण युवाओं को निशाना बनाती हैं। किसी भी दूसरे राज्य में नौकरी के लिए जाने से पहले संबंधित संस्थान का पंजीकरण और श्रम विभाग की अनुमति की जांच करना अनिवार्य है।

छत्तीसगढ़ सरकार ने इस संवेदनशील मामले में त्वरित हस्तक्षेप करते हुए एक विशेष टीम का गठन किया है, जो लड़कियों को सुरक्षित वापस लाने के लिए झारखंड रवाना होने की तैयारी कर रही है। गढ़वा जिले की पुलिस ने भी सूचना मिलते ही उस संभावित स्थान की पहचान कर ली है, जहां इन लड़कियों को रखे जाने की सूचना मिली थी। स्थानीय प्रशासन द्वारा उस भवन की घेराबंदी की गई है और संस्थान के संचालकों से पूछताछ की जा रही है। यह जांच का विषय है कि क्या इस संस्थान के पास नर्सिंग ट्रेनिंग या स्टाफ रखने के वैध दस्तावेज हैं और छत्तीसगढ़ की इन लड़कियों का पंजीकरण अंतरराज्यीय प्रवासी श्रमिक अधिनियम के तहत किया गया था या नहीं।

झारखंड और छत्तीसगढ़ के बीच सीमावर्ती क्षेत्रों में इस तरह के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं, जहां नर्सिंग और सिलाई-कढ़ाई के नाम पर युवतियों को ले जाया जाता है और बाद में उन्हें बंधक बनाकर शोषण किया जाता है। गढ़वा में हुई यह घटना एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा होने की ओर इशारा करती है जो छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचल क्षेत्रों में सक्रिय है। पुलिस अब उन स्थानीय बिचौलियों की तलाश कर रही है जिन्होंने इन लड़कियों को गढ़वा भेजने का प्रबंध किया था। शुरुआती जांच में कुछ ऐसे नाम सामने आए हैं जो पूर्व में भी मानव तस्करी की संदिग्ध गतिविधियों में शामिल रहे हैं। छत्तीसगढ़ पुलिस ने प्रभावित परिवारों को आश्वस्त किया है कि सभी बेटियों को जल्द ही सुरक्षित घर वापस लाया जाएगा।

बंधक बनाई गई लड़कियों की सुरक्षा को लेकर कांकेर में जबरदस्त आक्रोश देखा जा रहा है। सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि न केवल लड़कियों को वापस लाया जाए, बल्कि उन दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए जिन्होंने इन मासूमों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है। प्रशासन अब लड़कियों के बयान दर्ज करने की प्रतीक्षा कर रहा है ताकि यह पता चल सके कि वहां उनके साथ किसी प्रकार का शारीरिक या मानसिक उत्पीड़न तो नहीं हुआ है। इस बीच, गढ़वा जिला प्रशासन ने लड़कियों को प्रारंभिक सुरक्षा प्रदान की है और उनके भोजन तथा स्वास्थ्य की देखभाल के लिए निर्देश जारी किए हैं।

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