कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 के लिए पंजीकरण शुरू: शिव भक्तों का इंतजार खत्म, जानें आवेदन की पूरी प्रक्रिया।
हिंदू धर्म में सबसे पवित्र मानी जाने वाली कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 के लिए विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर घोषणा कर दी है। शिव
- हिमालय की गोद में बसे महादेव के धाम की यात्रा का मार्ग प्रशस्त, 19 मई तक करें आधिकारिक वेबसाइट पर आवेदन
- लिपुलेख और नाथू ला दर्रे से गुजरेगी पावन यात्रा, चयन प्रक्रिया और कड़े मेडिकल टेस्ट से गुजरेंगे श्रद्धालु
हिंदू धर्म में सबसे पवित्र मानी जाने वाली कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 के लिए विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर घोषणा कर दी है। शिव भक्तों के लिए यह वर्ष विशेष होने वाला है क्योंकि लंबे समय के इंतजार के बाद एक बार फिर भगवान शिव के निवास स्थान के दर्शन की राह आसान हुई है। भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा आयोजित इस यात्रा के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिसके माध्यम से श्रद्धालु अपनी आस्था और साहस के संगम वाली इस यात्रा का हिस्सा बन सकेंगे। इस साल की यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह भारत और चीन के बीच कूटनीतिक और सांस्कृतिक सेतु के रूप में भी देखी जा रही है। इच्छुक यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे समय सीमा का ध्यान रखते हुए जल्द से जल्द अपनी दावेदारी प्रस्तुत करें।
यात्रा के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 19 मई 2026 निर्धारित की गई है। श्रद्धालुओं को अपना पंजीकरण आधिकारिक वेबसाइट www.kmy.gov.in पर जाकर ऑनलाइन माध्यम से करना होगा। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि केवल ऑनलाइन आवेदन ही स्वीकार किए जाएंगे और किसी भी प्रकार का पत्राचार या फैक्स के माध्यम से आवेदन मान्य नहीं होगा। आवेदन प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाया गया है ताकि देशभर से श्रद्धालु बिना किसी बाधा के इसमें भाग ले सकें। आवेदकों को सलाह दी गई है कि वे फॉर्म भरते समय अपने पासपोर्ट के विवरण और व्यक्तिगत जानकारी को बेहद सावधानी से भरें, क्योंकि छोटी सी त्रुटि भी चयन प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न कर सकती है। कैलाश मानसरोवर की यह कठिन और दुर्गम यात्रा दो प्रमुख रास्तों से संचालित की जाती है। पहला रास्ता उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से होकर गुजरता है, जिसमें यात्रियों को धारचूला से आगे काफी लंबी ट्रेकिंग करनी पड़ती है। इस मार्ग से कुल 10 जत्थे भेजे जाएंगे, जिनमें प्रत्येक में 50 श्रद्धालु शामिल होंगे। वहीं, दूसरा वैकल्पिक मार्ग सिक्किम के नाथू ला दर्रे से होकर जाता है, जो वरिष्ठ नागरिकों और उन लोगों के लिए अधिक उपयुक्त माना जाता है जो कम पैदल चलना चाहते हैं। इस मार्ग से भी 50-50 यात्रियों के 10 जत्थे रवाना होंगे। यात्री आवेदन करते समय अपनी पसंद के मार्ग का चयन कर सकते हैं, हालांकि अंतिम आवंटन उपलब्ध स्लॉट और चयन प्रक्रिया के आधार पर किया जाएगा।
आयु और पात्रता मानदंड
कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए आवेदक की आयु 1 जनवरी 2026 तक न्यूनतम 18 वर्ष और अधिकतम 70 वर्ष के बीच होनी चाहिए। आवेदक के पास कम से कम 1 सितंबर 2026 तक वैध एक साधारण भारतीय पासपोर्ट होना अनिवार्य है। विदेशी नागरिक या ओसीआई कार्ड धारक इस सरकारी यात्रा के लिए पात्र नहीं हैं।
दस्तावेजों की बात करें तो आवेदकों के पास एक वैध भारतीय पासपोर्ट के साथ-साथ आधार कार्ड या पैन कार्ड जैसे पहचान पत्र होने आवश्यक हैं। पंजीकरण के दौरान पासपोर्ट के पहले और अंतिम पन्ने की स्कैन कॉपी (PDF फॉर्मेट में) और हाल ही में खींची गई पासपोर्ट साइज फोटो (JPG फॉर्मेट में) अपलोड करनी होगी। इसके अतिरिक्त, यदि कोई व्यक्ति अपने किसी साथी के साथ यात्रा करना चाहता है, तो उसे 'ग्रुप' विकल्प का चयन करना होगा, जिससे एक ही यूजर आईडी से अधिकतम दो लोगों का आवेदन किया जा सकता है। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि जो लोग पहले भी यह यात्रा कर चुके हैं, उनकी तुलना में पहली बार जाने वाले आवेदकों को वरीयता दी जाएगी।
चयन की प्रक्रिया पूरी तरह से कंप्यूटराइज्ड ड्रॉ के माध्यम से संपन्न होती है, जो लिंग संतुलन और निष्पक्षता सुनिश्चित करती है। ड्रॉ में चुने गए संभावित यात्रियों को ईमेल और एसएमएस के जरिए सूचित किया जाता है। हालांकि, चयन होना यात्रा की पुष्टि नहीं है; इसके बाद यात्रियों को दिल्ली में एक अत्यंत कड़े और विस्तृत मेडिकल टेस्ट से गुजरना होता है। यह परीक्षण दिल्ली हार्ट एंड लंग इंस्टीट्यूट (DHLI) और आईटीबीपी (ITBP) बेस अस्पताल में किया जाता है। चूंकि यह यात्रा 19,500 फीट तक की ऊंचाई पर होती है, इसलिए यात्रियों का शारीरिक रूप से पूरी तरह फिट होना अनिवार्य है। उच्च रक्तचाप, मधुमेह, अस्थमा या हृदय संबंधी बीमारियों से ग्रस्त लोगों को सुरक्षा कारणों से अनुमति नहीं दी जाती है। मेडिकल परीक्षण में सफल होने के बाद ही यात्रियों को अपना यात्रा शुल्क जमा करना होता है। यात्रा की लागत मार्ग के आधार पर भिन्न हो सकती है, जिसमें परिवहन, आवास, भोजन और वीजा शुल्क शामिल होते हैं। सफल यात्रियों को हिमालय की उच्च चोटियों के अनुसार खुद को ढालने के लिए कुछ दिनों तक दिल्ली और रास्ते में विभिन्न पड़ावों पर रुकना पड़ता है, जिसे 'एक्लिमैटाइजेशन' प्रक्रिया कहा जाता है। इस दौरान अनुभवी डॉक्टर और आईटीबीपी के जवान यात्रियों की सेहत पर लगातार नजर रखते हैं। जो यात्री अंतिम चरण तक फिट पाए जाते हैं, उन्हें ही सीमा पार तिब्बत (चीन) में प्रवेश करने की अनुमति दी जाती है।
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