नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा का नया घेरा, यातायात पुलिस के बेड़े में शामिल होंगे आधुनिक वाहन और एम्बुलेंस

एक्सप्रेसवे के सुरक्षा तंत्र में तकनीकी सुधारों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सड़कों पर नए सिरे से थर्मल पेंट के जरिए लेन मार्किंग की जा रही है और सोलर पावर्ड रोड मार्कर्स (कैट्स आई) लगाए जा रहे हैं, जो रात के अंधेरे में चालकों को स्पष्ट रास्ता दिखाने

May 13, 2026 - 09:10
 0  1
नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा का नया घेरा, यातायात पुलिस के बेड़े में शामिल होंगे आधुनिक वाहन और एम्बुलेंस
नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा का नया घेरा, यातायात पुलिस के बेड़े में शामिल होंगे आधुनिक वाहन और एम्बुलेंस

  • सड़क हादसों पर लगाम लगाने के लिए प्राधिकरण की बड़ी पहल, 24 घंटे गश्त के साथ मिलेगी तत्काल चिकित्सा सुविधा
  • एक्सप्रेसवे के सुरक्षा ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव, क्रेन और पेट्रोलिंग वाहनों से सुगम होगा यातायात का सफर

नोएडा और ग्रेटर नोएडा को जोड़ने वाली जीवनरेखा यानी एक्सप्रेसवे पर सफर करने वाले लाखों मुसाफिरों के लिए राहत और सुरक्षा की एक बड़ी खबर सामने आई है। बढ़ते यातायात के दबाव और लगातार होते सड़क हादसों को नियंत्रित करने के लिए नोएडा प्राधिकरण और यातायात पुलिस ने सुरक्षा के बुनियादी ढांचे को और अधिक मजबूत करने का निर्णय लिया है। इस योजना के तहत यातायात पुलिस के बेड़े में नई गाड़ियां, आधुनिक एम्बुलेंस और भारी क्षमता वाली क्रेनें शामिल की जा रही हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य एक्सप्रेसवे पर होने वाली दुर्घटनाओं के समय 'गोल्डन ऑवर' यानी शुरुआती महत्वपूर्ण समय में पीड़ितों को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना और खराब वाहनों के कारण लगने वाले जाम से निजात दिलाना है। यह सुरक्षा चक्र एक्सप्रेसवे के पूरे 24 किलोमीटर के हिस्से को कवर करेगा, जिससे यात्रियों का सफर न केवल तेज बल्कि सुरक्षित भी हो सकेगा।

यातायात पुलिस को मिलने वाले इन नए संसाधनों में एर्टिगा और बोलेरो जैसे शक्तिशाली वाहन शामिल हैं, जो 24 घंटे एक्सप्रेसवे पर गश्त करेंगे। इन वाहनों की तैनाती से नियमों का उल्लंघन करने वालों, विशेष रूप से ओवरस्पीडिंग और गलत लेन में ड्राइविंग करने वालों पर पैनी नजर रखी जा सकी। सूत्रों के अनुसार, इन वाहनों को चलाने के लिए दो पालियों में चालकों की व्यवस्था की गई है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में एक पल की भी ढील न आए। ये पेट्रोलिंग वाहन एक्सप्रेसवे के प्रमुख प्रवेश और निकास द्वारों पर तैनात रहेंगे, जहां से यातायात का सबसे अधिक दबाव रहता है। पुलिस बल को इन संसाधनों से लैस करने का निर्णय हाल ही में हुई उच्च स्तरीय बैठकों के बाद लिया गया है, जिसमें सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया था। किसी भी एक्सप्रेसवे पर दुर्घटना के बाद सबसे बड़ी चुनौती घायलों को समय पर अस्पताल पहुँचाना होती है। इस समस्या के समाधान के लिए विशेष रूप से 'फोर्स ट्रैवलर' जैसी सुसज्जित एम्बुलेंस को सेवा में लगाया जा रहा है। ये एम्बुलेंस केवल वाहन मात्र नहीं होंगी, बल्कि इनमें प्राथमिक उपचार के लिए जरूरी चिकित्सा उपकरण और प्रशिक्षित कर्मचारी भी तैनात रहेंगे। एक्सप्रेसवे पर निश्चित अंतराल पर इन एम्बुलेंस की तैनाती सुनिश्चित की जाएगी ताकि किसी भी आपात स्थिति में प्रतिक्रिया समय (रिस्पॉन्स टाइम) को न्यूनतम किया जा सके। इसके साथ ही, भारी वाहनों के खराब होने या दुर्घटनाग्रस्त होने की स्थिति में रास्ता साफ करने के लिए 12 टन क्षमता वाली हाइड्रा क्रेन भी उपलब्ध कराई जा रही है। अक्सर देखा जाता है कि एक छोटे से हादसे के बाद घंटों जाम लग जाता है, जिसे यह क्रेन मिनटों में साफ करने में सक्षम होगी।

सुरक्षा के लिए भारी निवेश और योजना

नोएडा प्राधिकरण ने एक्सप्रेसवे की सुरक्षा को अत्याधुनिक बनाने के लिए करोड़ों रुपये का बजट आवंटित किया है। हाल ही में 43.13 करोड़ रुपये की लागत से 20 किलोमीटर लंबी सर्विस रोड पर डब्लू-बीम क्रैश बैरियर लगाने की योजना को मंजूरी दी गई है। यह कदम नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने से पहले यातायात व्यवस्था को चाक-चौबंद करने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।

एक्सप्रेसवे के सुरक्षा तंत्र में तकनीकी सुधारों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सड़कों पर नए सिरे से थर्मल पेंट के जरिए लेन मार्किंग की जा रही है और सोलर पावर्ड रोड मार्कर्स (कैट्स आई) लगाए जा रहे हैं, जो रात के अंधेरे में चालकों को स्पष्ट रास्ता दिखाने में मदद करेंगे। एक्सप्रेसवे पर लगे पुराने और धुंधले पड़ चुके साइनबोर्ड्स को बदलकर अब अंतरराष्ट्रीय मानकों वाले नए बोर्ड लगाए जा रहे हैं। इन बोर्ड्स पर गति सीमा, निकटतम निकास और आपातकालीन संपर्क नंबरों की जानकारी प्रमुखता से दी गई है। इसके अलावा, कई संवेदनशील मोड़ों पर रंबल स्ट्रिप्स और गति अवरोधक संकेतकों को भी दुरुस्त किया गया है ताकि चालक अपनी गति पर नियंत्रण रख सकें और अनहोनी से बचा जा सके।

नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा बढ़ाने का यह निर्णय जेवर में बन रहे आगामी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की तैयारियों का भी हिस्सा है। हवाई अड्डे के संचालन के बाद इस मार्ग पर वाहनों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि होने की संभावना है, जिसमें विदेशी पर्यटकों और वीआईपी मूवमेंट की भी बहुलता होगी। इसे ध्यान में रखते हुए सुरक्षा मानकों को वैश्विक स्तर का बनाया जा रहा है। सर्विस रोड के किनारे स्थित गहरी नालियों और ग्रीन बेल्ट के पास बैरियर लगाने का कार्य भी युद्धस्तर पर चल रहा है, ताकि अनियंत्रित वाहन खाई में गिरने से बच सकें। प्राधिकरण और पुलिस का यह संयुक्त प्रयास न केवल दुर्घटनाओं की दर को कम करेगा, बल्कि इस एक्सप्रेसवे को देश के सबसे सुरक्षित गलियारों में से एक के रूप में स्थापित करेगा।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow