नीट 2026 पेपर लीक- 'प्राइवेट माफिया' नामक डिजिटल सिंडिकेट का हुआ पर्दाफाश, परीक्षा से हफ्तों पहले मोबाइल पर तैर रहे थे प्रश्न

हॉस्टल मालिक की गवाही के बाद राजस्थान पुलिस ने जयपुर, सीकर और देहरादून जैसे शहरों में ताबड़तोड़ छापेमारी की है। इस मामले में अब तक 45 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें सीकर के एक करियर काउंसलर को मुख्य सूत्रधार (मास्टरमाइंड) के

May 13, 2026 - 09:23
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नीट 2026 पेपर लीक- 'प्राइवेट माफिया' नामक डिजिटल सिंडिकेट का हुआ पर्दाफाश, परीक्षा से हफ्तों पहले मोबाइल पर तैर रहे थे प्रश्न
नीट 2026 पेपर लीक- 'प्राइवेट माफिया' नामक डिजिटल सिंडिकेट का हुआ पर्दाफाश, परीक्षा से हफ्तों पहले मोबाइल पर तैर रहे थे प्रश्न
  • नीट 2026 पेपर लीक मामले में राजस्थान के हॉस्टल मालिक ने किया बड़ा खुलासा, वॉट्सऐप चैट से सामने आए सनसनीखेज तथ्य
  • राजस्थान पुलिस की एसओजी और सीबीआई की जांच में तेजी, हॉस्टल मालिक की गवाही ने खोली पेपर लीक की पूरी कड़ियां

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी 2026 (NEET-UG 2026) की शुचिता पर उठ रहे सवालों के बीच राजस्थान से एक ऐसा खुलासा हुआ है जिसने पूरे सिस्टम को हिलाकर रख दिया है। राजस्थान के कोचिंग हब माने जाने वाले इलाके के एक हॉस्टल मालिक ने इस पूरे पेपर लीक मामले की कड़ियों को जोड़ते हुए कई चौंकाने वाले राज उगले हैं। हॉस्टल मालिक ने पुलिस को दी गई अपनी गवाही में बताया कि किस तरह परीक्षा से काफी समय पहले ही कुछ छात्रों और बिचौलियों के मोबाइल पर प्रश्नपत्रों की सामग्री उपलब्ध थी। इस खुलासे के बाद यह स्पष्ट होता जा रहा है कि पेपर लीक की घटना कोई छोटी-मोटी चूक नहीं थी, बल्कि इसके पीछे एक बहुत बड़ा संगठित गिरोह काम कर रहा था। हॉस्टल मालिक के दावों और उनके द्वारा सौंपे गए डिजिटल साक्ष्यों ने अब जांच एजेंसियों की दिशा पूरी तरह बदल दी है। जांच के दौरान सबसे महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में एक वॉट्सऐप चैट सामने आई है, जिसे 'प्राइवेट माफिया' नाम के ग्रुप के जरिए संचालित किया जा रहा था। इस ग्रुप में करीब 400 से अधिक सदस्य जुड़े हुए थे, जिनमें कुछ कोचिंग संचालक, हॉस्टल मालिक और बिचौलिये शामिल थे। हॉस्टल मालिक ने बताया कि इस ग्रुप में एक 'गेस पेपर' (अनुमानित प्रश्नपत्र) साझा किया गया था, जिसमें कुल 410 प्रश्न थे। चौंकाने वाली बात यह है कि 3 मई 2026 को हुई नीट की परीक्षा में इस गेस पेपर से 120 से अधिक प्रश्न हूबहू मेल खा रहे थे। विशेष रूप से केमिस्ट्री और बायोलॉजी के प्रश्न पत्र का एक बड़ा हिस्सा इस ग्रुप पर पहले ही सर्कुलेट हो चुका था। हॉस्टल मालिक ने जब अपने हॉस्टल में रहने वाले कुछ छात्रों के पास इन प्रश्नों को देखा, तो उन्हें शक हुआ और उन्होंने इसकी जानकारी पुलिस को दी।

पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (एसओजी) की जांच में यह बात भी सामने आई है कि इस पेपर लीक के तार केवल राजस्थान तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि यह नेटवर्क उत्तराखंड, महाराष्ट्र और केरल तक फैला हुआ है। हॉस्टल मालिक द्वारा उपलब्ध कराई गई वॉट्सऐप चैट से पता चला है कि इस प्रश्नपत्र को शुरू में 5 लाख रुपये प्रति छात्र के हिसाब से बेचा जा रहा था। जैसे-जैसे परीक्षा की तारीख नजदीक आती गई, गिरोह ने अपनी रणनीति बदली और कीमत घटाकर 30 हजार रुपये तक कर दी ताकि अधिक से अधिक छात्रों को इसमें फंसाया जा सके। यह डिजिटल साक्ष्य इस बात की पुष्टि करते हैं कि पेपर लीक की योजना हफ्तों पहले बनाई गई थी और इसे बहुत ही गोपनीय तरीके से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए छात्रों तक पहुँचाया गया था।

गेस पेपर के नाम पर असली सवालों का खेल

इस गिरोह की कार्यशैली बहुत ही शातिर थी। वे पेपर को सीधे 'लीक पेपर' कहने के बजाय 'मोस्ट इम्पॉर्टेंट गेस पेपर' या 'टेस्ट सीरीज' के नाम से छात्रों को देते थे। इसके पीछे की मंशा यह थी कि यदि मामला पकड़ा भी जाए, तो वे इसे केवल एक बेहतर अनुमान (Guess) बताकर बच सकें। लेकिन 410 प्रश्नों में से 120 से अधिक प्रश्नों का शब्द-दर-शब्द मिल जाना किसी इत्तेफाक से कहीं अधिक बड़ी साजिश की ओर संकेत करता है।

हॉस्टल मालिक की गवाही के बाद राजस्थान पुलिस ने जयपुर, सीकर और देहरादून जैसे शहरों में ताबड़तोड़ छापेमारी की है। इस मामले में अब तक 45 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें सीकर के एक करियर काउंसलर को मुख्य सूत्रधार (मास्टरमाइंड) के रूप में देखा जा रहा है। हॉस्टल मालिक ने पुलिस को बताया कि कुछ संदिग्ध लोग लगातार हॉस्टल के आसपास देखे जा रहे थे और वे छात्रों को एकांत में ले जाकर मोबाइल पर कुछ दिखा रहे थे। जब उन्होंने उन छात्रों के फोन चेक किए, तो उन्हें 'प्राइवेट माफिया' ग्रुप के स्क्रीनशॉट्स मिले, जिसमें नीट परीक्षा के मूल प्रश्नपत्र जैसे दिखने वाले सवाल मौजूद थे। हॉस्टल मालिक ने निडर होकर इन डिजिटल चैट्स का बैकअप लिया और पुलिस को सौंप दिया, जो अब इस केस में सबसे बड़ा सबूत बन गया है।

इस बड़े खुलासे के बाद केंद्र सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने भी स्वीकार किया है कि जांच एजेंसियों द्वारा साझा किए गए इनपुट बहुत गंभीर हैं। हॉस्टल मालिक द्वारा उजागर किए गए तथ्यों के आधार पर यह संदेह जताया जा रहा है कि प्रश्नपत्र की चोरी या तो प्रिंटिंग प्रेस के स्तर पर हुई है या फिर उसे तैयार करने वाली टीम के किसी सदस्य ने इस गोपनीय जानकारी को बेचा है। वॉट्सऐप चैट की टाइमस्टैम्प से यह भी पता चला है कि यह जानकारी परीक्षा से करीब 15-20 दिन पहले ही बाजार में आ चुकी थी। इसने न केवल परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि उन लाखों मेहनती छात्रों के भविष्य को भी अधर में डाल दिया है जिन्होंने ईमानदारी से तैयारी की थी।

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