UP: भ्रष्टाचार पर योगी सरकार का हंटर चला- दो राज्य कर अधिकारी निलंबित, एक के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश।
योगी आदित्यनाथ सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस नीति को और मजबूत करते हुए राज्य कर विभाग के तीन वरिष्ठ अधिकारियों के...
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस नीति को और मजबूत करते हुए राज्य कर विभाग के तीन वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कड़ा कदम उठाया है। रायबरेली में तैनात सहायक आयुक्त रितेश कुमार बरनवाल और उपायुक्त मनीष कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, जबकि लखनऊ में कार्यरत संयुक्त आयुक्त देवेंद्र सिंह के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश जारी किए गए हैं। इन अधिकारियों पर बोगस फर्म 'राजधानी इंटरप्राइजेज' के जरिए व्यापार कर 10 करोड़ 76 लाख रुपये के राजस्व को नुकसान पहुंचाने का गंभीर आरोप है।
यह पूरा मामला तब सामने आया जब राज्य कर विभाग के एक आंतरिक ऑडिट में 'राजधानी इंटरप्राइजेज' नामक एक फर्जी फर्म की गतिविधियां पकड़ में आईं। इस फर्म के जरिए कर चोरी और अवैध व्यापारिक गतिविधियों के माध्यम से राज्य के राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया गया। जांच में पता चला कि रायबरेली में तैनात सहायक आयुक्त रितेश कुमार बरनवाल और उपायुक्त मनीष कुमार ने इस फर्जी फर्म को संरक्षण दिया और इसके संचालन में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सहायता की। इन अधिकारियों ने कथित तौर पर फर्म के मालिकों के साथ मिलीभगत कर फर्जी बिलिंग और कर रियायतों के जरिए 10 करोड़ 76 लाख रुपये की हानि पहुंचाई।
वहीं, लखनऊ में तैनात संयुक्त आयुक्त देवेंद्र सिंह पर आरोप है कि उन्हें इस गड़बड़ी की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने इसे उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने में लापरवाही बरती। उनकी इस चूक को गंभीर माना गया, जिसके चलते उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई है। योगी सरकार ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए जांच के लिए एक विशेष समिति गठित की है, जिसे एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।
- योगी सरकार की भ्रष्टाचार विरोधी नीति
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए बार-बार स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार में अनैतिक गतिविधियों के लिए कोई जगह नहीं है। इस मामले में भी, उन्होंने अधिकारियों को पारदर्शिता, तकनीकी दक्षता और सख्त प्रवर्तन नीति अपनाने के निर्देश दिए हैं। 8 जून 2025 को लखनऊ में राज्य कर विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में, योगी ने अधिकारियों को फर्जी कंपनियों और शेल फर्मों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने का आदेश दिया था। इस बैठक में उन्होंने कर संग्रह में तकनीकी दक्षता और पारदर्शिता को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
इस घटना से पहले भी, योगी सरकार ने भ्रष्टाचार के आरोपों में कई अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की है। मई 2025 में, मथुरा में तैनात संयुक्त आयुक्त राजवर्धन सिंह और नोएडा की डॉ. रमा मिश्रा को भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित किया गया था। राजवर्धन सिंह पर बिना अनुमति कर्मचारी संबद्ध करने और डॉ. रमा मिश्रा के अधीन काम करने वाले कर्मचारी पर रिश्वत लेने का आरोप था। इन कार्रवाइयों से यह स्पष्ट है कि योगी सरकार भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर ढील नहीं बरत रही है।
रितेश कुमार बरनवाल और मनीष कुमार के निलंबन के बाद, दोनों अधिकारियों को अपने कार्यालयों से तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। निलंबन अवधि के दौरान, उन्हें किसी भी सरकारी कार्य में शामिल होने की अनुमति नहीं होगी, और उनकी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जाएगी। जांच समिति को यह पता लगाने का निर्देश दिया गया है कि क्या इस फर्जी फर्म के जरिए अन्य अधिकारियों या बाहरी व्यक्तियों की भी संलिप्तता थी। इसके अलावा, समिति यह भी जांच करेगी कि क्या इस तरह की गतिविधियां अन्य क्षेत्रों में भी चल रही हैं।
देवेंद्र सिंह के खिलाफ विभागीय जांच एक स्वतंत्र जांच अधिकारी की देखरेख में होगी। उन पर यह आरोप है कि उन्होंने अपने कर्तव्यों का पालन नहीं किया और गड़बड़ी की जानकारी को दबाने की कोशिश की। जांच में यदि उनकी संलिप्तता सिद्ध होती है, तो उनके खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें निलंबन या बर्खास्तगी शामिल हो सकती है।
इस कार्रवाई को लेकर सोशल मीडिया, विशेष रूप से X पर, व्यापक प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। कई यूजर्स ने योगी सरकार की इस त्वरित कार्रवाई की सराहना की है, इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत कदम बताया है। एक यूजर ने X पर लिखा, "योगी जी का यह कदम दिखाता है कि उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।" वहीं, कुछ लोगों ने इस कार्रवाई को सतही बताते हुए मांग की कि ऐसी गड़बड़ियों की जड़ तक पहुंचा जाए और सभी दोषियों को सजा दी जाए।
विपक्षी दलों, जैसे समाजवादी पार्टी और कांग्रेस, ने इस मामले को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। समाजवादी पार्टी के एक नेता ने कहा कि यह केवल दिखावटी कार्रवाई है और सरकार को पूरे कर विभाग की कार्यप्रणाली की जांच करनी चाहिए। हालांकि, सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी प्राथमिकता राज्य के राजस्व की रक्षा और जनता के हितों की सुरक्षा है।
योगी सरकार की भ्रष्टाचार विरोधी नीति का यह मामला केवल एक उदाहरण है। सरकार ने हाल के वर्षों में कई अन्य कदम उठाए हैं, जैसे 'ऑपरेशन कनविक्शन' के तहत अपराधियों को तेजी से सजा दिलाना और साइबर अपराधों पर नकेल कसना। इसके अलावा, सरकार ने कर चोरी और फर्जी कंपनियों पर नजर रखने के लिए तकनीकी उपायों को बढ़ावा दिया है, जिसमें डिजिटल ऑडिट और डेटा एनालिटिक्स का उपयोग शामिल है।
यह मामला उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक सुधारों और भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही लड़ाई का हिस्सा है। योगी सरकार ने बार-बार जोर दिया है कि वह ऐसी नीतियों को लागू करेगी जो जनता के लिए पारदर्शी और जवाबदेह हों। इस मामले में भी, सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भ्रष्टाचार में लिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो। रितेश कुमार बरनवाल, मनीष कुमार और देवेंद्र सिंह के खिलाफ की गई कार्रवाई योगी सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति का एक और उदाहरण है।
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