उत्तर प्रदेश में टोल दरों में 5 से 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी: आज रात 12 बजे से नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे पर सफर होगा महंगा।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के क्षेत्रीय कार्यालय ने उत्तर प्रदेश से गुजरने वाले तमाम राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे के लिए संशोधित
- एनएचएआई का वार्षिक संशोधन लागू: दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे समेत यूपी के 80 से अधिक टोल प्लाजा पर जेब ढीली करेंगे वाहन चालक
- माल ढुलाई और यात्रा लागत में इजाफे की आशंका: नई टोल दरों से आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर असर पड़ने की संभावना
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के क्षेत्रीय कार्यालय ने उत्तर प्रदेश से गुजरने वाले तमाम राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे के लिए संशोधित टोल दरों की अधिसूचना जारी कर दी है। विभाग के अनुसार, यह बढ़ोतरी थोक मूल्य सूचकांक (WPI) में हुए बदलावों के आधार पर की गई है, जो हर साल 1 अप्रैल से प्रभावी होती है। उत्तर प्रदेश में दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, नेशनल हाईवे-9, और लखनऊ-कानपुर जैसे व्यस्त मार्गों पर चलने वाले वाहनों को अब प्रति चक्कर 5 से 10 रुपये तक अतिरिक्त भुगतान करना होगा। अधिकारियों का कहना है कि यह संशोधन सड़क रखरखाव और परिचालन लागत को संतुलित करने के लिए आवश्यक है।
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे (DME) पर सफर करने वाले यात्रियों के लिए अब सराय काले खां से मेरठ तक की एक तरफ की यात्रा 170 रुपये के बजाय 175 रुपये की होगी। इसी तरह, वापसी यात्रा (रिटर्न जर्नी) के लिए अब 265 रुपये चुकाने होंगे, जिसमें 10 रुपये का इजाफा किया गया है। हल्के वाणिज्यिक वाहनों (LCVs) और मिनी बसों के लिए एक तरफ का किराया 275 रुपये से बढ़कर 285 रुपये हो गया है। इंदिरापुरम से मेरठ के बीच यात्रा करने वाली कारों के लिए भी अब 120 रुपये का भुगतान करना होगा। यह वृद्धि उन दैनिक यात्रियों के लिए एक बड़ा वित्तीय बोझ साबित होगी जो काम के सिलसिले में रोजाना इन मार्गों का उपयोग करते हैं। व्यावसायिक और भारी वाहनों के लिए यह झटका और भी अधिक है। बस और ट्रक जैसे दो-धुरी (Two-axle) वाहनों के लिए टोल दरों में 15 से 25 रुपये तक की वृद्धि की गई है। मल्टी-एक्सल वाहनों (MAVs) और सात या उससे अधिक धुरी वाले विशाल वाहनों के लिए यह बढ़ोतरी और भी अधिक है। परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि टोल दरों में इस वृद्धि के कारण ट्रक ऑपरेटर अपनी माल ढुलाई दरों में इजाफा कर सकते हैं, जिससे फल, सब्जियां और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी देखी जा सकती है। आगरा, कानपुर, वाराणसी और प्रयागराज जैसे प्रमुख व्यापारिक केंद्रों को जोड़ने वाले राजमार्गों पर इसका प्रभाव व्यापक रूप से महसूस किया जाएगा।
फास्टैग (FASTag) वार्षिक पास में भी बदलाव
एनएचएआई ने न केवल प्रति फेरा टोल दरों में बदलाव किया है, बल्कि डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के लिए जारी किए गए वार्षिक पास की कीमतों में भी वृद्धि की है। रिपोर्ट के अनुसार, फास्टैग वार्षिक पास की फीस में लगभग 75 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। अब 1 अप्रैल से यह पास 3,000 रुपये के बजाय 3,075 रुपये में उपलब्ध होगा। यह सुविधा उन निजी वाहन मालिकों के लिए है जो एक वर्ष में 200 बार तक टोल क्रॉसिंग का लाभ उठाना चाहते हैं।
उत्तर प्रदेश के अन्य महत्वपूर्ण मार्गों जैसे नेशनल हाईवे-24 (दिल्ली-लखनऊ), नेशनल हाईवे-2 (आगरा-वाराणसी) और बुंदेलखंड के कुछ हिस्सों में भी इसी तरह की बढ़ोतरी की गई है। स्थानीय टोल प्लाजा पर मासिक पास की दरों में भी 10 से 20 रुपये तक की वृद्धि की गई है, जिससे उन लोगों को राहत नहीं मिलेगी जो टोल प्लाजा के 20 किलोमीटर के दायरे में रहते हैं और रियायती पास का उपयोग करते हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन प्लाजा पर हाल ही में दरें संशोधित की गई थीं या जो नए शुरू हुए हैं, वहां शायद यह दरें लागू न हों, लेकिन प्रदेश के लगभग 85 प्रतिशत टोल बूथों पर नई दरें प्रभावी होंगी। परिवहन क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि टोल टैक्स में लगातार हो रही बढ़ोतरी से लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ती जा रही है। भारत में लॉजिस्टिक्स लागत पहले से ही वैश्विक औसत से अधिक है, और इस तरह के वार्षिक संशोधन इसे और चुनौतीपूर्ण बनाते हैं। हालांकि, सरकार का तर्क है कि टोल से प्राप्त होने वाले राजस्व का उपयोग सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने, एक्सप्रेसवे पर अत्याधुनिक सुविधाओं के विस्तार और नए राजमार्गों के निर्माण में किया जाता है। उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में सड़क नेटवर्क का जो विस्तार हुआ है, उसके रखरखाव के लिए यह राजस्व अनिवार्य बताया गया है।
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