Lucknow: बीबीएयू लखनऊ में एआई पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी, देश-विदेश के 100 से अधिक शोधकर्ताओं ने रखा शोध।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उभरती तकनीकों पर हुआ मंथन, तकनीकी सत्रों के बाद कवि सम्मेलन व सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित

Mar 26, 2026 - 12:29
Mar 26, 2026 - 12:36
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Lucknow: बीबीएयू लखनऊ में एआई पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी, देश-विदेश के 100 से अधिक शोधकर्ताओं ने रखा शोध।
बीबीएयू लखनऊ में एआई पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी, देश-विदेश के 100 से अधिक शोधकर्ताओं ने रखा शोध।

लखनऊ। बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय (बीबीएयू) लखनऊ के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग और कंप्यूटर सोसाइटी ऑफ इंडिया, लखनऊ चैप्टर के संयुक्त तत्वावधान में “बुद्धिमान और सतत डिजिटल भविष्य के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं उभरती प्रौद्योगिकियाँ” विषय पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें भारत सहित कई देशों के विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं ने भाग लेकर एआई के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।


कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजकुमार मित्तल एवं अन्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। उद्घाटन सत्र में जेएनयू नई दिल्ली के प्रो. टी.वी. विजय कुमार और बीबीएयू के कंसल्टेंट प्रो. मनोज जोशी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

मुख्य वक्ताओं में जर्मनी से आए ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. वी. अनुराग तथा ऑस्ट्रेलिया से कुंदन मिश्रा (ऑनलाइन) शामिल रहे। उन्होंने क्रमशः चिकित्सा क्षेत्र में रोबोटिक्स की भूमिका और बैंकिंग क्षेत्र में एआई के उपयोग पर अपने विचार प्रस्तुत किए। इस सत्र में डीन प्रो. एम.पी. सिंह और प्रो. आर.ए. खान संरक्षक के रूप में मौजूद रहे। कार्यक्रम की संयोजिका एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. राजश्री पांडे ने धन्यवाद ज्ञापन किया, जबकि मंच संचालन आयोजन सचिव डॉ. अलका ने किया।

द्वितीय सत्र में सामाजिक परिवर्तन पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रभाव: मानव-एआई सहयोग विषय पर पैनल चर्चा हुई, जिसकी अध्यक्षता युगनार के सीईओ आदित्य शुक्ला ने की। इस चर्चा में जेएनयू के प्रो. टी.वी. विजय कुमार, यूआईडीएआई के निदेशक कर्नल प्रवीण कुमार सिंह, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज लखनऊ के अंबरीष कुमार श्रीवास्तव तथा राज्य ई-गवर्नेंस मिशन टीम के प्रमुख जितेंद्र कुमार सिंह ने एआई के समाज पर बढ़ते प्रभाव और इसके उपयोग को लेकर अपने विचार साझा किए।

अन्य तकनीकी सत्रों की अध्यक्षता डॉ. अंबेडकर संस्थान बेंगलुरु की प्रो. के.आर. शैलजा, महर्षि विश्वविद्यालय लखनऊ के डॉ. राकेश कुमार यादव, बीबीएयू की प्रो. दीपा राज और डीआईटी के डॉ. पवन कुमार चौरसिया ने की। इन सत्रों में ट्रिपल आईटी लखनऊ के डॉ. अभिनेष कौशिक, नेपाल के भरत राज भूसाल, जूरिस्ट एआई लैब के संस्थापक एवं सीईओ डॉ. दीपक कुमार सिंह, बीजीयू इजरायल के प्रो. ओफर हैदर (ऑनलाइन) और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के शशांक शेखर शुक्ला ने भी अपने विचार रखे।

समापन सत्र में आईआईएम लखनऊ के प्रो. अरुणाभ मुखोपाध्याय मुख्य अतिथि रहे, जबकि सत्र की अध्यक्षता बीबीएयू के प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा ने की। इस अवसर पर दक्षिण कोरिया के डॉ. आशीष कुमार सिंह (ऑनलाइन) ने एआई अनुसंधान के विभिन्न क्षेत्रों पर प्रकाश डाला। संगोष्ठी में भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया, कनाडा, इजरायल, नाइजीरिया और नेपाल के प्रतिभागियों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से अपने शोध प्रस्तुत किए। लगभग 100 शोधकर्ताओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विभिन्न अनुसंधान क्षेत्रों पर अपने अध्ययन साझा किए। उत्कृष्ट शोध पत्रों को बेस्ट पेपर अवॉर्ड और बेस्ट प्रेजेंटेशन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।

तकनीकी सत्रों के बाद कवि सम्मेलन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन हुआ। इस अवसर पर बरेली की सुप्रसिद्ध गायिका और अनुश्रुति महाविद्यालय की निदेशक डॉ. हितु मिश्रा मुख्य अतिथि रहीं। उनके साथ विजय लक्ष्मी सिंह (अध्यक्ष, कमलेश्वर फाउंडेशन) और अमिता मिश्रा ‘मीतू’ (अध्यक्ष, वितु क्लब) विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।

कवि सम्मेलन में मुकेश श्रीवास्तव (कानपुर), विपिन मलिहाबादी (लखनऊ), वंदना विशेष, हरि बहादुर हर्ष (प्रतापगढ़) और कस्टम विभाग के मनी यादव ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद डॉ. हितु मिश्रा ने कबीर वाणी, गजल, सूफी, भक्ति और लोक संगीत की प्रस्तुति देकर दर्शकों को भावविभोर कर दिया। सहगायिका अनुकृति ने भी अपनी सूफी प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को और यादगार बना दिया।

कार्यक्रम को सफल बनाने में कंप्यूटर सोसाइटी ऑफ इंडिया के डॉ. दीपक, आईसीआईसीआई के निशांत, एलआईसी के विनोद चौरसिया, सीबीन टेक सोल्यूशन के भरत राज, सेंचुरियन डिफेंस अकादमी के निदेशक शिशिर दीक्षित, आदित्य दुबे, बीबीएयू के डॉ. धीरेंद्र पांडेय, डॉ. अमित कुमार सिंह, डॉ. नीरज तिवारी सहित शोधार्थियों और विद्यार्थियों का विशेष योगदान रहा।

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