देश के दूसरे और दिल्ली-एनसीआर के पहले मल्टी-लेन फ्री फ्लो टोल प्लाजा का उद्घाटन, बिना रुके कटेगा टैक्स
पर्यावरणीय और आर्थिक दृष्टिकोण से भी यह कदम अत्यंत लाभकारी सिद्ध होने वाला है। एक अनुमान के मुताबिक, देशभर के टोल प्लाजा पर गाड़ियों के रुकने और दोबारा शुरू होने के कारण होने वाले ईंधन की खपत में कमी आएगी, जिससे सालाना करीब 285 करोड़ रुपये
- दिल्ली में सड़कों का सफर हुआ और भी रफ्तार भरा, मुंडका-बक्करवाला टोल अब पूरी तरह 'बैरियर-फ्री'
- नितिन गडकरी ने की 'स्टॉप-फ्री' यात्रा की शुरुआत, एआई और आधुनिक कैमरों से लैस सिस्टम बचाएगा समय और ईंधन
दिल्ली और आसपास के इलाकों में सड़क यात्रा को अधिक सुगम और निर्बाध बनाने की दिशा में भारत सरकार ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सोमवार, 11 मई 2026 को दिल्ली के अर्बन एक्सटेंशन रोड-II (UER-II) पर स्थित 'मुंडका-बक्करवाला' टोल प्लाजा पर देश के दूसरे और दिल्ली-एनसीआर के पहले मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) टोलिंग सिस्टम का उद्घाटन किया। इस नई तकनीक के लागू होने के साथ ही अब वाहन चालकों को टोल टैक्स का भुगतान करने के लिए अपनी गाड़ियों को रोकने या धीमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। यह कदम न केवल दिल्ली के ट्रैफिक को रफ्तार देगा, बल्कि आधुनिक राजमार्गों के निर्माण की दिशा में एक बड़ी कूटनीतिक जीत के रूप में भी देखा जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, यह नई तकनीक पूरी तरह से 'बैरियर-लेस' है, जिसका अर्थ है कि टोल प्लाजा पर कोई शारीरिक अवरोधक या बूम बैरियर नहीं लगा होगा। मुंडका-बक्करवाला टोल प्लाजा अब अत्याधुनिक 'ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन' (ANPR) कैमरों और फास्टैग (FASTag) आधारित इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह प्रणाली के संयोजन से संचालित होगा। यह तकनीक इतनी उन्नत है कि 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गुजरने वाले वाहनों की नंबर प्लेट को भी सटीकता से पढ़ सकती है और तुरंत फास्टैग अकाउंट से शुल्क काट लिया जाता है। इससे टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारों से मुक्ति मिलेगी और यात्रियों का कीमती समय बचेगा।
इस परियोजना के महत्व को समझाते हुए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि यह प्रणाली 'ईज ऑफ लिविंग' और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा देने वाली है। उन्होंने जानकारी दी कि इस तकनीक के माध्यम से सरकार को टोल संचालन लागत में सालाना लगभग 6,000 करोड़ रुपये की बचत होने की उम्मीद है। वर्तमान में टोल संग्रह की लागत कुल राजस्व का लगभग 15 प्रतिशत होती है, जिसे इस नई तकनीक के जरिए घटाकर केवल 3-4 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य रखा गया है। यह बचा हुआ धन भविष्य की अन्य महत्वपूर्ण राजमार्ग परियोजनाओं में उपयोग किया जा सकेगा, जिससे देश का बुनियादी ढांचा और अधिक सुदृढ़ होगा। पर्यावरणीय और आर्थिक दृष्टिकोण से भी यह कदम अत्यंत लाभकारी सिद्ध होने वाला है। एक अनुमान के मुताबिक, देशभर के टोल प्लाजा पर गाड़ियों के रुकने और दोबारा शुरू होने के कारण होने वाले ईंधन की खपत में कमी आएगी, जिससे सालाना करीब 285 करोड़ रुपये के ईंधन की बचत होगी। इसके अलावा, ट्रैफिक जाम के कम होने से कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) उत्सर्जन में भी लगभग 81,000 टन की कमी आने की संभावना है। दिल्ली जैसे प्रदूषित शहर के लिए यह तकनीक एक वरदान की तरह है, क्योंकि यह न केवल समय बचाती है बल्कि हवा की गुणवत्ता सुधारने में भी परोक्ष रूप से योगदान देती है।
नई भुगतान प्रणाली और नियम
यदि किसी वाहन के फास्टैग में पर्याप्त बैलेंस नहीं है या टैग निष्क्रिय है, तो भी वह बिना रुके इस टोल से गुजर सकेगा। ऐसी स्थिति में, वाहन मालिक के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर तुरंत एक 'इलेक्ट्रॉनिक नोटिस' (E-Notice) भेजा जाएगा। वाहन मालिक को इस बकाया शुल्क का भुगतान 72 घंटों के भीतर ऑनलाइन माध्यम से करना होगा। यदि इस समय सीमा के भीतर भुगतान नहीं किया जाता है, तो कानूनन दोगुना शुल्क वसूला जाएगा और वाहन का विवरण 'वाहन' (VAHAN) पोर्टल पर ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की योजना के अनुसार, इस साल सितंबर 2026 तक देश के 9 राज्यों में कुल 17 ऐसे 'बैरियर-फ्री' टोल प्लाजा चालू कर दिए जाएंगे। गुजरात के चोर्यासी टोल प्लाजा के बाद दिल्ली का यह दूसरा ऐसा केंद्र है। दूसरे चरण में मार्च 2027 तक 108 और टोल प्लाजा को इस तकनीक से लैस करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ये कैमरे न केवल टोल काटेंगे, बल्कि ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन जैसे सीट बेल्ट न लगाना या गाड़ी चलाते समय फोन का उपयोग करना भी रिकॉर्ड कर सकेंगे, जिससे सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी होगी।
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