प्याज भंडारण की अनूठी तकनीक: किसानों ने खोजे प्याज को सड़ने से बचाने के बेहतरीन देसी नुस्खे।

भारत में प्याज एक ऐसी फसल है जिसके दाम और उपलब्धता सीधे तौर पर आम आदमी की रसोई और देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित

Apr 24, 2026 - 11:14
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प्याज भंडारण की अनूठी तकनीक: किसानों ने खोजे प्याज को सड़ने से बचाने के बेहतरीन देसी नुस्खे।
प्याज भंडारण की अनूठी तकनीक: किसानों ने खोजे प्याज को सड़ने से बचाने के बेहतरीन देसी नुस्खे।
  • बिना कोल्ड स्टोरेज के महीनों सुरक्षित रहेगा प्याज, लागत घटाने और मुनाफा बढ़ाने के लिए अपनाएं ये पारंपरिक तरीके
  • प्याज की बर्बादी पर लगेगा अंकुश: नमी और गर्मी से बचाने के वैज्ञानिक और देसी जुगाड़, अब नहीं होगी फसल खराब

भारत में प्याज एक ऐसी फसल है जिसके दाम और उपलब्धता सीधे तौर पर आम आदमी की रसोई और देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करते हैं। प्याज की खेती में जितनी मेहनत फसल उगाने में लगती है, उससे कहीं अधिक चुनौती उसे लंबे समय तक सुरक्षित रखने में आती है। अक्सर देखा जाता है कि नमी या उचित वेंटिलेशन न मिलने के कारण प्याज कुछ ही हफ्तों में सड़ने लगता है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इस समस्या से निपटने के लिए ग्रामीण भारत के प्रगतिशील किसानों ने कुछ ऐसे देसी जुगाड़ और पारंपरिक तरीके अपनाए हैं, जो बिना किसी महंगे कोल्ड स्टोरेज के प्याज को 6 से 8 महीने तक तरोताजा रख सकते हैं। इन विधियों का मुख्य उद्देश्य प्याज को नमी से बचाना और निरंतर हवा के प्रवाह को सुनिश्चित करना है, जिससे फसल की गुणवत्ता बनी रहती है। प्याज के सफल भंडारण की पहली कड़ी उसकी कटाई और सुखाने की प्रक्रिया से जुड़ी है। किसान बताते हैं कि प्याज को खेत से निकालने के बाद तुरंत बंद कमरों में नहीं रखना चाहिए। सबसे पहले प्याज को खेत में ही उसकी पत्तियों के साथ छोटी-छोटी ढेरी बनाकर 3 से 4 दिनों तक छोड़ देना चाहिए ताकि सूर्य की कोमल धूप से उसकी बाहरी परत सख्त हो जाए। इसके बाद, प्याज की गर्दन (पत्तियों का ऊपरी हिस्सा) को लगभग एक से दो इंच छोड़कर काटना चाहिए। यदि गर्दन को बिल्कुल जड़ से काट दिया जाए, तो संक्रमण सीधे प्याज के भीतर प्रवेश कर जाता है, जिससे उसके सड़ने की प्रक्रिया तेज हो जाती है। इसे 'क्युरिंग' प्रक्रिया कहा जाता है, जो प्याज के ऊपर एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच (सूखा छिलका) बनाने में मदद करती है।

भंडारण के लिए सबसे प्रभावी देसी जुगाड़ 'बांस के ऊंचे मचान' तैयार करना है। इसमें किसान जमीन से लगभग 2 से 3 फीट की ऊंचाई पर बांस की फट्टियों और जाली का उपयोग करके एक पारदर्शी प्लेटफार्म बनाते हैं। इस प्लेटफार्म के नीचे से हवा का प्रवाह बना रहता है, जो प्याज के बीच पैदा होने वाली गर्मी और नमी को बाहर निकाल देता है। जमीन से ऊंचाई रखने का एक लाभ यह भी है कि फर्श की नमी प्याज तक नहीं पहुंच पाती। इस मचान के ऊपर प्याज की परत 4 से 5 फीट से अधिक ऊंची नहीं होनी चाहिए, क्योंकि अधिक दबाव से नीचे की परत वाला प्याज दबकर खराब होने लगता है। हवा का यह निरंतर संचार प्याज को अंकुरित होने से भी रोकता है।

प्याज भंडारण के लिए आदर्श परिस्थितियां

तापमान: 25 से 30 डिग्री सेल्सियस के बीच।

नमी (Humidity): 65% से 70% के बीच होनी चाहिए।

छायादार स्थान: प्याज को कभी भी सीधे धूप में स्टोर न करें, इसे हमेशा हवादार और छायादार शेड में रखें।

छंटाई: भंडारण के दौरान हर 15-20 दिन में खराब हो रहे प्याज को अलग करते रहें ताकि संक्रमण न फैले।

एक अन्य महत्वपूर्ण तकनीक 'मधुमक्खी के छत्ते' जैसी संरचना वाली झोपड़ियां तैयार करना है, जिसे कई क्षेत्रों में 'कांदा चाळ' भी कहा जाता है। इसमें सीमेंट के कंक्रीट स्ट्रक्चर के बजाय प्राकृतिक सामग्री जैसे घास-फूस, खपरैल और जालीदार दीवारों का उपयोग किया जाता है। इन संरचनाओं की छत को ऊंचा रखा जाता है ताकि ऊपरी गर्मी प्याज को प्रभावित न करे। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी यह प्रमाणित है कि प्याज को अंधेरे और बहुत ठंडे स्थान के बजाय ऐसे स्थान पर रखना चाहिए जहां प्राकृतिक रोशनी कम हो लेकिन हवा का दबाव बना रहे। किसान इस बात पर जोर देते हैं कि भंडारण गृह की दिशा ऐसी होनी चाहिए कि सीधी हवा प्याज के ढेर के आर-पार जा सके।

प्याज को सड़ने से बचाने के लिए 'चूने और सूखी रेत' का उपयोग भी एक पुराना और कारगर नुस्खा है। कुछ अनुभवी किसान भंडारण गृह के फर्श पर सूखी रेत की एक पतली परत बिछाते हैं और उस पर थोड़ा चूना छिड़क देते हैं। चूना नमी को सोखने का काम करता है और फंगल इन्फेक्शन को रोकता है। इसके ऊपर लकड़ी के तख्तों या बांस की चटाई बिछाकर प्याज रखा जाता है। यह विधि विशेष रूप से उन क्षेत्रों में बहुत उपयोगी है जहां बारिश के मौसम में हवा में आर्द्रता बहुत बढ़ जाती है। रेत और चूने का यह मेल प्याज के निचले हिस्से को सूखा रखता है, जिससे 'रॉटिंग' की समस्या काफी कम हो जाती है। भंडारण के दौरान प्याज की नियमित निगरानी करना भी उतना ही आवश्यक है जितना कि उसे स्टोर करना। किसान हर दो सप्ताह में प्याज के ढेर को हल्का उलटते-पलटते रहते हैं। इस प्रक्रिया के दौरान यदि कोई प्याज नरम या काला पड़ता दिखाई दे, तो उसे तुरंत हटा दिया जाता है। एक भी सड़ा हुआ प्याज पूरे लॉट में संक्रमण फैला सकता है। इसके अलावा, प्याज को कभी भी प्लास्टिक की बोरियों में बंद करके नहीं रखना चाहिए। यदि बोरियों का उपयोग करना अनिवार्य हो, तो जूट की बोरियों या नायलॉन की जालीदार थैलियों का इस्तेमाल करना चाहिए, जो हवा को अंदर-बाहर आने-जाने की अनुमति देती हैं।

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