साइकिल चलाकर दफ्तर पहुंचने वाले IRS अधिकारी नरेंद्र कुमार यादव, फिट इंडिया मूवमेंट के असली ब्रांड एंबेसडर।
भारत सरकार के 'फिट इंडिया मूवमेंट' को केवल सरकारी फाइलों तक सीमित न रखकर उसे अपने निजी जीवन में पूरी निष्ठा के साथ
- प्रेरणा की नई मिसाल, लग्जरी गाड़ियों को छोड़ साइकिल से कार्यालय पहुंचकर पर्यावरण और सेहत का संदेश दे रहे IRS नरेंद्र यादव
- फिटनेस और सादगी का अनूठा संगम, सरकारी कर्मचारियों के लिए रोल मॉडल बने नरेंद्र कुमार यादव, युवाओं को दे रहे फिट रहने का मंत्र
भारत सरकार के 'फिट इंडिया मूवमेंट' को केवल सरकारी फाइलों तक सीमित न रखकर उसे अपने निजी जीवन में पूरी निष्ठा के साथ उतारने वाले भारतीय राजस्व सेवा (IRS) के अधिकारी नरेंद्र कुमार यादव आज देश भर के युवाओं और सरकारी अमले के लिए एक जीवंत उदाहरण बन चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए इस अभियान का उद्देश्य भारतीयों को सक्रिय जीवनशैली के प्रति जागरूक करना था, लेकिन नरेंद्र यादव ने इसे एक कदम आगे बढ़ाते हुए अपनी दिनचर्या का अनिवार्य हिस्सा बना लिया है। एक वरिष्ठ पद पर आसीन होने के बावजूद, जहां लोग वीआईपी सुविधाओं और महंगी गाड़ियों को प्राथमिकता देते हैं, वहां नरेंद्र यादव का रोजाना साइकिल से दफ्तर जाना उनकी सादगी और फिटनेस के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। वे न केवल खुद को फिट रख रहे हैं, बल्कि व्यवस्था के भीतर रहकर यह संदेश भी दे रहे हैं कि परिवर्तन की शुरुआत हमेशा स्वयं से होती है। नरेंद्र कुमार यादव की फिटनेस यात्रा किसी एक दिन का निर्णय नहीं, बल्कि वर्षों के अनुशासन का परिणाम है। फिट इंडिया मूवमेंट के आधिकारिक ब्रांड एंबेसडर के रूप में उनकी भूमिका महज कागजी नहीं है, बल्कि वे इसे धरातल पर क्रियान्वित कर रहे हैं। दिल्ली जैसे महानगर की भागदौड़ भरी जिंदगी और भारी ट्रैफिक के बीच, वे प्रतिदिन लगभग 8 किलोमीटर की दूरी साइकिल से तय करके अपने कार्यालय पहुंचते हैं। उनके इस कदम ने प्रशासनिक गलियारों में एक नई चर्चा छेड़ दी है। अक्सर देखा जाता है कि उच्च पदों पर बैठे अधिकारी अपनी सुरक्षा और आराम को लेकर काफी सचेत रहते हैं, लेकिन नरेंद्र यादव ने इन तमाम धारणाओं को तोड़ते हुए साइकिल को अपना साथी बनाया है, जो उनकी मानसिक और शारीरिक सुदृढ़ता का राज भी है।
साइकिल चलाने का उनका यह निर्णय केवल व्यक्तिगत लाभ तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके व्यापक सामाजिक और पर्यावरणीय निहितार्थ भी हैं। आज के समय में जब प्रदूषण एक गंभीर समस्या बन चुका है और महानगरों की हवा लगातार जहरीली होती जा रही है, तब एक वरिष्ठ अधिकारी का साइकिल का उपयोग करना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा योगदान है। उनके इस कदम से ईंधन की बचत तो होती ही है, साथ ही सड़क पर वाहनों का दबाव भी कम होता है। सरकारी कर्मचारियों के बीच उनकी यह छवि एक ऐसे लीडर की बन गई है, जो शब्दों से ज्यादा अपने कार्यों से लोगों को प्रभावित करने में विश्वास रखता है। उनके सहकर्मी और अधीनस्थ कर्मचारी भी अब स्वास्थ्य के प्रति अधिक सचेत दिखने लगे हैं, जो एक स्वस्थ कार्य संस्कृति की नींव रख रहा है। फिट इंडिया मूवमेंट की शुरुआत साल 2019 में की गई थी, जिसका लक्ष्य लोगों के व्यवहार में बदलाव लाना और शारीरिक रूप से सक्रिय जीवनशैली को बढ़ावा देना है। नरेंद्र कुमार यादव जैसे अधिकारी इस विजन को साकार करने में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो रहे हैं, क्योंकि वे युवाओं के लिए एक ऐसा चेहरा बनकर उभरे हैं जो सफलता और स्वास्थ्य के बीच संतुलन बनाना बखूबी जानता है।
युवा पीढ़ी के लिए नरेंद्र यादव एक पथप्रदर्शक के रूप में सामने आए हैं। वर्तमान समय में जहां युवा घंटों जिम में बिताते हैं या फिर पूरी तरह से सुस्त जीवनशैली का शिकार हो जाते हैं, वहां वे सिखाते हैं कि फिटनेस को अलग से समय देने के बजाय उसे अपनी रोजमर्रा की आदतों में शामिल किया जा सकता है। नरेंद्र यादव का मानना है कि यदि हम अपनी यात्रा के छोटे-छोटे हिस्सों को शारीरिक गतिविधियों में बदल दें, तो हम कई बीमारियों से बच सकते हैं। उनके सोशल मीडिया और सार्वजनिक जीवन के माध्यम से प्रसारित होने वाले संदेश युवाओं को प्रेरित करते हैं कि वे अपनी जड़ों से जुड़ें और प्राकृतिक तरीकों से खुद को ऊर्जावान रखें। वे अक्सर इस बात पर जोर देते हैं कि एक स्वस्थ मस्तिष्क ही देश के विकास में प्रभावी योगदान दे सकता है। नरेंद्र कुमार यादव की कहानी उन लोगों के लिए एक करारा जवाब है जो यह मानते हैं कि सरकारी नौकरी मिलने के बाद जीवन में केवल सुख-सुविधाओं का ही स्थान होता है। उन्होंने अपनी पहचान एक ऐसे 'फिटनेस आइकन' के रूप में बनाई है जो बाधाओं को अवसरों में बदलना जानता है। देश के विभिन्न हिस्सों में होने वाले फिटनेस कार्यक्रमों और मैराथन में भी उनकी सक्रिय भागीदारी रहती है, जहां वे लोगों को स्वस्थ भारत के निर्माण का संकल्प दिलाते हैं। उनकी सादगी का आलम यह है कि वे रास्ते में मिलने वाले आम लोगों से भी उसी सहजता से मिलते हैं और उन्हें सक्रिय रहने की सलाह देते हैं। इस प्रकार, वे सही अर्थों में फिट इंडिया अभियान के ध्वजवाहक बनकर उभरे हैं, जो देश के हर नागरिक को चलने और दौड़ने के लिए प्रेरित कर रहा है।
सरकारी सेवा में रहते हुए समय का प्रबंधन करना सबसे बड़ी चुनौती होती है। फाइलों के अंबार और बैठकों के लंबे दौर के बीच खुद के लिए समय निकालना मुश्किल होता है, लेकिन नरेंद्र यादव ने दिखाया है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो तो समय की कमी कभी बाधा नहीं बन सकती। साइकिल चलाना उनके लिए केवल व्यायाम नहीं है, बल्कि यह उन्हें तनाव मुक्त रखने और कार्यस्थल पर अधिक एकाग्र रहने में मदद करता है। वे कार्यालय पहुंचकर उतनी ही ताजगी और ऊर्जा के साथ काम करते हैं, जितनी ऊर्जा एक एथलीट में होती है। उनके इस अनुशासन ने यह साबित कर दिया है कि एक प्रशासनिक अधिकारी भी अपनी फिटनेस को शीर्ष प्राथमिकता दे सकता है, बशर्ते वह अपनी प्राथमिकताओं को सही ढंग से निर्धारित करे।
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