राकेश टिकैत की हिरासत पर उत्तर प्रदेश में भारी बवाल: भाकियू कार्यकर्ताओं ने घेरे पुलिस थाने, पश्चिमी यूपी में चक्का जाम की चेतावनी।
भारतीय किसान यूनियन के कद्दावर नेता राकेश टिकैत 30 मार्च 2026 को ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में किसानों के एक पैदल मार्च में शामिल होने
- ओडिशा से लखनऊ तक गरमाई राजनीति: किसान नेता की गिरफ्तारी की खबर से विपक्ष लामबंद, प्रशासन हाई अलर्ट पर
- लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन या सुरक्षा उपाय? भुवनेश्वर में टिकैत को रोके जाने पर मुजफ्फरनगर से लेकर नोएडा तक जबरदस्त विरोध प्रदर्शन
भारतीय किसान यूनियन के कद्दावर नेता राकेश टिकैत 30 मार्च 2026 को ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में किसानों के एक पैदल मार्च में शामिल होने पहुंचे थे। इस दौरान स्थानीय पुलिस ने सुरक्षा और कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए उन्हें बीच रास्ते में ही रोक दिया और हिरासत में लेकर पास के एक गेस्ट हाउस में भेज दिया। जैसे ही यह खबर सोशल मीडिया के माध्यम से उत्तर प्रदेश पहुंची, भाकियू के कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। मुजफ्फरनगर, मेरठ, बागपत, बिजनौर और हापुड़ जैसे जिलों में देर रात ही किसानों ने पुलिस थानों का घेराव शुरू कर दिया। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि किसान नेताओं की आवाज को दबाने के लिए दमनकारी नीतियों का सहारा लिया जा रहा है, जो लोकतंत्र के लिए एक खतरनाक संकेत है।
राजधानी लखनऊ में भी इस घटना का व्यापक असर देखने को मिल रहा है। विपक्षी दलों ने एकजुट होकर इस कार्रवाई की निंदा की है और इसे किसानों के संवैधानिक अधिकारों पर हमला करार दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों और स्थानीय समीकरणों को देखते हुए किसान आंदोलन का यह नया मोड़ सत्ताधारी दल के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। विपक्षी नेताओं ने ट्वीट और आधिकारिक बयानों के जरिए मांग की है कि किसान नेता को तुरंत और ससम्मान रिहा किया जाए। इस बीच, प्रदेश सरकार ने सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं ताकि विरोध प्रदर्शनों के दौरान कोई अप्रिय घटना न घटे और आम जनता को यातायात संबंधी समस्याओं का सामना न करना पड़े।
मुजफ्फरनगर में भाकियू के गढ़ सिसौली और अन्य कस्बों में किसानों ने थानों के बाहर चारपाइयां डाल दीं और अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए। भाकियू के युवा विंग के नेताओं ने घोषणा की है कि यदि उनके नेता को बिना शर्त नहीं छोड़ा गया, तो वे प्रदेश के सभी राष्ट्रीय राजमार्गों को जाम कर देंगे। किसानों का कहना है कि वे केवल अपनी जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण मार्च करना चाहते थे, लेकिन सरकार उन्हें अपराधी की तरह देख रही है। पुलिस स्टेशनों के बाहर भारी नारेबाजी और मशाल जुलूस निकाले जाने की खबरें भी प्राप्त हुई हैं। प्रशासन की ओर से किसानों को समझाने-बुझाने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन प्रदर्शनकारी टिकैत की रिहाई की आधिकारिक पुष्टि के बिना हटने को तैयार नहीं हैं।
नोएडा और गाजियाबाद के सीमावर्ती इलाकों में भी पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी है। जेवर और ग्रेटर नोएडा के पास किसानों ने सड़क पर बैठकर प्रदर्शन किया, जिससे शाम के समय यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ। पुलिस आयुक्त कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया गया है और किसी भी सूरत में हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हालांकि, किसान संगठनों ने स्पष्ट कर दिया है कि उनका आंदोलन अहिंसक होगा, लेकिन वे अपने नेता के अपमान को बर्दाश्त नहीं करेंगे। मथुरा और बुलंदशहर में भी भाकियू कार्यकर्ताओं ने देर रात तक थानों के बाहर डेरा जमाए रखा, जिससे प्रशासन पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
कटक और भुवनेश्वर के पुलिस आयुक्त ने मंगलवार दोपहर को एक आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि राकेश टिकैत को गिरफ्तार नहीं किया गया है। उन्हें केवल सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत एक रैली में जाने से रोका गया था और वे वर्तमान में सरकारी गेस्ट हाउस में पूरी सुरक्षा के साथ ठहरे हुए हैं। पुलिस के अनुसार, टिकैत शाम की फ्लाइट से वापस लौटने के लिए स्वतंत्र हैं और उनके साथ कोई दुर्व्यवहार नहीं किया गया है।
उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में इस घटनाक्रम के बाद एक बार फिर 'किसान एकता' के नारे गूंजने लगे हैं। ग्रामीण अंचलों में पंचायतों का दौर शुरू हो गया है, जहाँ आगे की रणनीति पर चर्चा की जा रही है। किसान नेताओं का तर्क है कि जब भी किसान अपने हक की बात करते हैं, उन्हें रोकने के लिए पुलिसिया कार्रवाई का सहारा लिया जाता है। इस घटना ने एक बार फिर से उन मुद्दों को हवा दे दी है जो पिछले किसान आंदोलन के दौरान केंद्र बिंदु रहे थे। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को इस संवेदनशील मामले को बातचीत के जरिए सुलझाना चाहिए, क्योंकि किसान नेता की एक छोटी सी हिरासत भी बड़े जन-आंदोलन का रूप ले सकती है। हापुड़ जिले के विभिन्न थानों में भाकियू जिलाध्यक्षों के नेतृत्व में सैकड़ों समर्थक जुटे हुए हैं। वहां से मिली जानकारी के अनुसार, किसानों ने स्थानीय प्रशासन को अल्टीमेटम दिया है कि यदि उनके नेता को ओडिशा से वापस आने में कोई बाधा पहुंचाई गई, तो वे कड़ा रुख अख्तियार करेंगे। मुरादाबाद और रामपुर में भी विरोध की लहर देखी गई है, जहां किसानों ने तहसील मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया। पुलिस विभाग ने साइबर सेल को भी सक्रिय कर दिया है ताकि भ्रामक जानकारियों और अफवाहों को फैलने से रोका जा सके। अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर कुछ लोग पुरानी तस्वीरों को नई बताकर माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं, जिन पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
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