खेती-किसानी की 10 बड़ी अपडेट्स: एमएसपी पर खरीद से लेकर नई तकनीक और मौसम के मिजाज तक, जानें हर जरूरी जानकारी
तीसरी महत्वपूर्ण खबर दलहन और तिलहन की फसलों को लेकर है। इस बार सरसों की बंपर पैदावार की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन हालिया ओलावृष्टि ने कुछ क्षेत्रों में सरसों की फलियों को नुकसान पहुँचाया है। सरकार ने तिलहन के मामले में आत्मनिर्भर बनने के लि
- फसलों पर पश्चिमी विक्षोभ का साया और मंडियों के उतार-चढ़ाव के बीच खेती-किसानी की बड़ी खबरें
- बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से किसानों की बढ़ी चिंता, मौसम विभाग ने उत्तर-पश्चिम भारत के लिए जारी किया अलर्ट
भारतीय कृषि परिदृश्य के लिए अप्रैल का यह सप्ताह काफी हलचल भरा साबित हो रहा है, जहाँ एक ओर रबी फसलों की कटाई और मड़ाई का काम जोरों पर है, वहीं दूसरी ओर मौसम के बदलते मिजाज ने अन्नदाताओं के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने ताज़ा पूर्वानुमान में जानकारी दी है कि उत्तर-पश्चिम भारत में एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ ने अपनी दस्तक दे दी है, जिसका सीधा असर आने वाले दिनों में देखने को मिलेगा। विभाग की चेतावनी के अनुसार, 6 अप्रैल 2026 तक देश के कई हिस्सों में दिन का तापमान सामान्य या उससे भी कम रहने की संभावना है। यह मौसमी बदलाव ऐसे समय में आया है जब गेहूं, सरसों और चने जैसी महत्वपूर्ण फसलें या तो खेतों में कटाई के लिए तैयार खड़ी हैं या खलिहानों में सुरक्षित होने का इंतजार कर रही हैं। ऐसे में किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे अपनी कटी हुई फसलों को भीगने से बचाने के लिए उचित प्रबंध करें।
मौसम विभाग के विस्तृत विश्लेषण के अनुसार, 5 अप्रैल तक उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के कई राज्यों में हल्की से मध्यम बारिश होने की प्रबल संभावना है। विशेष रूप से अगले 48 घंटों के दौरान इस विक्षोभ का असर सबसे ज्यादा दिखाई देगा। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में न केवल बारिश और बर्फबारी की चेतावनी दी गई है, बल्कि वहां 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और बिजली गिरने की आशंका भी जताई गई है। मैदानी इलाकों की बात करें तो पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी बादलों की आवाजाही के साथ छिटपुट बूंदाबांदी हो सकती है। जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों में आज भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है, जो पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और फसलों के नुकसान का कारण बन सकता है।
खेती-किसानी की दूसरी बड़ी खबर मंडियों में गेहूं की सरकारी खरीद को लेकर है। केंद्र सरकार ने इस वर्ष गेहूं की खरीद के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर किसानों से अनाज खरीदने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। हालांकि, बेमौसम बारिश के कारण कई मंडियों में खुले में रखा अनाज भीगने की खबरें भी आ रही हैं, जिससे अनाज की गुणवत्ता प्रभावित होने का डर है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि एफएक्यू (FAQ) मानकों के तहत ही गेहूं की खरीद की जाएगी, लेकिन मौसम की मार झेलने वाले किसानों के लिए कुछ विशेष रियायतों पर भी विचार किया जा सकता है। किसानों को डिजिटल माध्यमों से भुगतान सुनिश्चित करने के लिए 'ई-मंडी' पोर्टल को और अधिक सुदृढ़ किया गया है ताकि उन्हें अपनी उपज का पैसा सीधे बैंक खातों में मिल सके। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए विशेष परामर्श जारी किया है। जिन क्षेत्रों में बारिश की संभावना है, वहां किसान सिंचाई और कीटनाशकों का छिड़काव फिलहाल टाल दें। कटी हुई फसल के बंडलों को ऊंचे स्थानों पर रखें और तिरपाल या प्लास्टिक शीट से ढककर सुरक्षित करें। नमी के कारण अनाज में फफूंद लगने का खतरा रहता है, इसलिए भंडारण से पहले अनाज को अच्छी तरह सुखाना अनिवार्य है।
तीसरी महत्वपूर्ण खबर दलहन और तिलहन की फसलों को लेकर है। इस बार सरसों की बंपर पैदावार की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन हालिया ओलावृष्टि ने कुछ क्षेत्रों में सरसों की फलियों को नुकसान पहुँचाया है। सरकार ने तिलहन के मामले में आत्मनिर्भर बनने के लिए 'राष्ट्रीय तिलहन मिशन' के तहत किसानों को उन्नत बीज और तकनीक उपलब्ध कराने की योजना को विस्तार दिया है। वहीं, चने की फसल की आवक भी मंडियों में शुरू हो गई है। बाजार में चने के भाव एमएसपी के आसपास बने हुए हैं, जिससे किसानों को उचित लाभ मिलने की उम्मीद है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष दलहन का रकबा पिछले साल के मुकाबले बढ़ा है, जो देश की खाद्य सुरक्षा के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
तकनीकी मोर्चे पर, भारत में 'ड्रोन फार्मिंग' को लेकर बड़ा उत्साह देखा जा रहा है। सरकार अब छोटे और सीमांत किसानों को भी ड्रोन के इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित कर रही है। नई योजनाओं के तहत, सहकारी समितियों और किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को ड्रोन खरीदने पर भारी सब्सिडी दी जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य यूरिया और कीटनाशकों के छिड़काव में श्रम और समय की बचत करना है। साथ ही, नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के बढ़ते उपयोग ने मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखने में मदद की है। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में हर गांव तक इस आधुनिक तकनीक की पहुँच सुनिश्चित की जाए ताकि खेती को लाभकारी और कम लागत वाला व्यवसाय बनाया जा सके।
डेयरी और पशुपालन क्षेत्र से जुड़ी खबरों की बात करें तो, भीषण गर्मी की आहट से पहले पशुओं के टीकाकरण और स्वास्थ्य प्रबंधन पर जोर दिया जा रहा है। सरकार ने 'पशुधन बीमा योजना' के तहत अधिक से अधिक पशुपालकों को जोड़ने का लक्ष्य रखा है। दूध की बढ़ती मांग को देखते हुए दुधारू पशुओं के चारे और पोषण के लिए नई गाइडलाइन जारी की गई है। इसके अतिरिक्त, जैविक खेती (Organic Farming) को बढ़ावा देने के लिए प्रमाणीकरण की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। अब किसान अपनी जैविक उपज को सीधे बड़े शहरों के बाजारों में बेहतर दामों पर बेच पा रहे हैं। कई राज्यों ने जैविक खेती करने वाले किसानों के लिए विशेष सहायता राशि की भी घोषणा की है।
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