राजधानी लखनऊ में रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात, गोमतीनगर एक्सप्रेस ट्रेन के भीतर मिली महिला की सिर कटी लाश।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक बेहद ही सनसनीखेज और रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने कानून व्य
- क्रूरता की सारी हदें पार कर कई टुकड़ों में काटी गई अज्ञात महिला की लाश, सिर गायब होने से शिनाख्त करने में जुटी पुलिस की कई टीमें
- ऐशबाग रेलवे स्टेशन पर ट्रेन की सफाई के दौरान सनसनीखेज हत्याकांड का हुआ खुलासा, राजकीय रेलवे पुलिस और फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने शुरू की गहन तफ्तीश
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक बेहद ही सनसनीखेज और रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने कानून व्यवस्था और रेल यात्रा की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पूर्वोत्तर रेलवे के ऐशबाग रेलवे स्टेशन पर खड़ी गोमतीनगर एक्सप्रेस ट्रेन के एक डिब्बे के भीतर से एक अज्ञात महिला का क्षत-विक्षत शव बरामद किया गया है। क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए हत्यारों ने महिला की हत्या करने के बाद उसके शरीर को कई हिस्सों में काट दिया था और उसे बेहद चालाकी से छुपाने के इरादे से ट्रेन के भीतर ही छोड़ दिया था। इस खौफनाक हत्याकांड की जानकारी मिलते ही पूरे रेल महकमे और उत्तर प्रदेश पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया है। राजधानी के मुख्य रेलवे स्टेशनों में गिने जाने वाले इस परिसर में हुई इस वारदात के बाद से यात्रियों और स्थानीय निवासियों के बीच गहरी दहशत और असुरक्षा का माहौल व्याप्त हो गया है।
इस रूह कंपा देने वाली घटना का खुलासा तब हुआ जब गोमतीनगर एक्सप्रेस अपनी निर्धारित यात्रा पूरी करने के बाद ऐशबाग रेलवे स्टेशन के यार्ड में वाशिंग और नियमित साफ-सफाई के लिए खड़ी की गई थी। सफार्ई कर्मचारी जब ट्रेन के सामान्य डिब्बों की सफाई करते हुए आगे बढ़ रहे थे, तभी उनकी नजर एक सीट के नीचे लावारिस हालत में रखे एक बड़े लोहे के बॉक्स और एक लावारिस बैग पर पड़ी। आम तौर पर यात्री अपना सामान भूल जाते हैं, इसी अंदेशे के साथ जब कर्मचारियों ने उस लावारिस सामान को बाहर निकाला और उसे खोलने का प्रयास किया, तो उसमें से तेज दुर्गंध आ रही थी। जैसे ही बक्से और बैग की चेन को खोला गया, वहां मौजूद कर्मचारियों के होश उड़ गए और वे डर के मारे चिल्लाते हुए डिब्बे से बाहर भागे। बक्से के भीतर प्लास्टिक की पन्नियों और कपड़ों में लपेटकर मानव शरीर के कटे हुए हिस्से रखे गए थे।
घटना की भयावहता को देखते हुए सफाई सुपरवाइजर ने तुरंत इसकी सूचना ऐशबाग के स्टेशन मास्टर और राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) को दी। सूचना मिलते ही जीआरपी और रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के आला अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गए और पूरे डिब्बे को सील कर दिया गया। शुरुआती जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद विचलित करने वाले हैं। हत्यारों ने साक्ष्य मिटाने और मृतका की पहचान छुपाने के उद्देश्य से उसके सिर को धड़ से पूरी तरह अलग कर दिया था, जो कि बरामद हुए सामानों के भीतर कहीं भी नहीं मिला। महिला के हाथ, पैर और धड़ के हिस्सों को अलग-अलग काटकर बक्से और बैग में बेहद शातिराना तरीके से ठूंसा गया था। पुलिस ने तुरंत फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) और डॉग स्क्वायड की टीमों को मौके पर बुलाया ताकि घटना स्थल से जैविक और वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्रित किए जा सकें।
इस ब्लाइंड मर्डर मिस्ट्री को सुलझाने के लिए लखनऊ के पुलिस कमिश्नरेट और जीआरपी मुख्यालय ने संयुक्त रूप से कई विशेष जांच टीमों का गठन किया है। पुलिस के सामने सबसे बड़ी और प्राथमिक चुनौती मृतका की शिनाख्त करने की है, क्योंकि बिना सिर के शव की पहचान करना बेहद जटिल काम है। इसके लिए पुलिस ने पिछले कुछ दिनों के भीतर लखनऊ और आस-पास के जिलों के साथ-साथ उन तमाम रूटों के थानों से गुमशुदा महिलाओं का रिकॉर्ड मंगाना शुरू कर दिया है, जहां से यह ट्रेन होकर गुजरती है। इसके अतिरिक्त, मृतका के डीएनए प्रोफाइलिंग और उंगलियों के निशान (फिंगरप्रिंट्स) को भी सुरक्षित कर लिया गया है ताकि राष्ट्रीय डेटाबेस से उसका मिलान किया जा सके। कपड़ों और शरीर की बनावट के आधार पर मृतका की उम्र और पृष्ठभूमि का अंदाजा लगाने का प्रयास किया जा रहा है। इस खौफनाक वारदात ने रेलवे स्टेशनों की सुरक्षा व्यवस्था और यात्रियों के सामान की चेकिंग प्रणालियों की गंभीर कमियों को पूरी तरह सामने रख दिया है। इतने बड़े बक्से और बैग में शव के टुकड़ों को लेकर कोई भी व्यक्ति आसानी से स्टेशन परिसर के भीतर दाखिल हो गया और उसने चलती ट्रेन में उसे लावारिस छोड़ दिया, जिससे सुरक्षा घेरे पर गंभीर सवाल उठते हैं। इस चूक को देखते हुए लखनऊ, चारबाग, ऐशबाग और गोमतीनगर सहित सभी प्रमुख स्टेशनों पर सुरक्षा अलर्ट जारी कर दिया गया है और यात्रियों के सामान की थर्मल व एक्स-रे स्कैनिंग को अनिवार्य बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
जांच की कड़ियों को आगे बढ़ाते हुए पुलिस अब गोमतीनगर एक्सप्रेस के पूरे यात्रा मार्ग के सीसीटीवी फुटेज खंगालने में जुटी है। यह ट्रेन जिन-जिन स्टेशनों पर रुकी थी, वहां के प्लेटफॉर्मों पर लगे कैमरों की फुटेज को बारीकी से देखा जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि किस स्टेशन पर कोई संदिग्ध व्यक्ति इतना भारी बक्सा और बैग लेकर डिब्बे के भीतर दाखिल हुआ था। इसके साथ ही, ट्रेन के उस विशिष्ट डिब्बे में यात्रा करने वाले यात्रियों का विवरण चार्टिंग डेटाबेस से निकाला जा रहा है ताकि उनसे पूछताछ करके यह समझा जा सके कि रास्ते में किसी ने इस लावारिस सामान को रखने वाले व्यक्ति को देखा था या नहीं। शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, इस पूरी वारदात को किसी बेहद करीबी रंजिश या पारिवारिक विवाद के चलते अंजाम दिया गया हो सकता है, जहां पहचान छुपाने के लिए इस क्रूर तरीके को अपनाया गया।
इस खौफनाक कांड के बाद उत्तर प्रदेश के राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में भी कानून व्यवस्था को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने देश की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली परिवहन प्रणाली के भीतर इतनी बर्बर घटना होने पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका मानना है कि जब तक अपराधियों के भीतर कानून का खौफ पैदा नहीं होगा, तब तक महिलाओं के खिलाफ होने वाले ऐसे जघन्य अपराधों पर रोक लगाना नामुमकिन होगा। दूसरी ओर, गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने जांच टीमों को सख्त निर्देश दिए हैं कि इस मामले में चौबीसों घंटे काम करके अपराधियों को पाताल से भी ढूंढ निकाला जाए और फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से उन्हें फांसी के फंदे तक पहुंचाने के लिए पुख्ता पैरवी की जाए।
शव के अंगों को पोस्टमार्टम के लिए किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के मर्चरी हाउस भेज दिया गया है, जहां डॉक्टरों का एक विशेष पैनल वीडियोग्राफी के साथ शव का परीक्षण करेगा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि महिला की हत्या कब और किस तरह की गई थी, तथा क्या हत्या से पहले उसके साथ किसी भी तरह का शारीरिक उत्पीड़न या नृशंसता की गई थी। लखनऊ की यह दिल दहला देने वाली घटना इस बात का गवाह है कि अपराधियों की मानसिकता किस कदर अमानवीय होती जा रही है। अब पूरे प्रदेश की नजरें पुलिस की इस तफ्तीश पर टिकी हैं कि आखिर वह कब तक इस बेजुबान और बेनाम लाश को उसका नाम दिला पाती है और इस खूनी खेल के पीछे छिपे दरिंदों को सलाखों के पीछे भेजती है।
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