NEET पेपर लीक कांड में सीबीआई का बड़ा प्रहार, नासिक से गिरफ्तार शुभम खैरनार की दिल्ली कोर्ट में पेशी आज।

मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक मामले की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अपनी कार्रवाई

May 14, 2026 - 12:17
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NEET पेपर लीक कांड में सीबीआई का बड़ा प्रहार, नासिक से गिरफ्तार शुभम खैरनार की दिल्ली कोर्ट में पेशी आज।
NEET पेपर लीक कांड में सीबीआई का बड़ा प्रहार, नासिक से गिरफ्तार शुभम खैरनार की दिल्ली कोर्ट में पेशी आज।
  • पेपर लीक सिंडिकेट के नेटवर्क पर शिकंजा, सात गिरफ्तारियों के बाद अब मास्टरमाइंड और मददगारों की तलाश तेज
  • छापेमारी में मिले इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य खोलेंगे राज, मोबाइल और डिवाइस से मिले डेटा ने बढ़ाई आरोपियों की मुश्किलें

मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक मामले की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अपनी कार्रवाई को व्यापक बनाते हुए इस पूरे नेटवर्क की कमर तोड़ने की दिशा में बड़े कदम उठाए हैं। जांच एजेंसी ने अब तक इस मामले में कुल सात आरोपियों को हिरासत में लिया है, जिनसे पूछताछ के आधार पर इस सिंडिकेट के संचालन के तरीकों का पता लगाया जा रहा है। इसी क्रम में नासिक से पकड़े गए आरोपी शुभम खैरनार को आज दिल्ली की एक विशेष अदालत में पेश किया जाएगा। शुभम खैरनार की गिरफ्तारी को इस मामले में एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है क्योंकि उसके तार इस धांधली के तकनीकी और वितरण नेटवर्क से जुड़े होने के प्रमाण मिले हैं। सीबीआई की टीमें देश के अलग-अलग राज्यों में लगातार छापेमारी कर रही हैं ताकि इस घोटाले की गहराई तक पहुंचा जा सके और उन सभी दोषियों को पकड़ा जा सके जिन्होंने देश के लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है। जांच एजेंसी द्वारा की गई अब तक की छापेमारी में भारी मात्रा में डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए हैं। छापेमारी के दौरान कई मोबाइल फोन, लैपटॉप, हार्ड डिस्क और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त किए गए हैं। इन उपकरणों के प्रारंभिक विश्लेषण से कई संदिग्ध नंबरों और मैसेजिंग एप्स पर हुए संवाद का पता चला है। इन साक्ष्यों के माध्यम से सीबीआई को इस सिंडिकेट से जुड़े कई बड़े नामों के बारे में महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। डिजिटल डेटा से यह भी पता चला है कि पेपर को लीक करने के बाद किस तरह से अलग-अलग माध्यमों से अभ्यर्थियों तक पहुंचाया गया और इसके बदले में मोटी रकम का लेनदेन कैसे हुआ। इन डिवाइसों से मिले डेटा ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है, जिससे आने वाले दिनों में कुछ और प्रभावशाली व्यक्तियों की गिरफ्तारी की संभावना बढ़ गई है।

शुभम खैरनार की भूमिका को लेकर यह जानकारी सामने आ रही है कि वह परीक्षा पत्रों के अवैध वितरण और अभ्यर्थियों के बीच समन्वय स्थापित करने का काम कर रहा था। नासिक में उसकी गतिविधियों और संपर्कों की गहनता से जांच की गई है, जिसके बाद ही उसे दिल्ली लाया गया। अदालत में पेशी के दौरान सीबीआई उसकी रिमांड की मांग करेगी ताकि उसे अन्य आरोपियों के साथ बैठाकर आमना-सामना कराया जा सके। जांच का एक मुख्य पहलू यह भी है कि पेपर लीक का स्रोत क्या था और क्या इसमें किसी परीक्षा केंद्र या प्रिंटिंग प्रेस के कर्मचारियों की मिलीभगत थी। शुभम से पूछताछ में इस बात की पुष्टि होने की उम्मीद है कि इस सिंडिकेट ने तकनीकी खामियों का फायदा उठाया या फिर व्यवस्था में मौजूद सुराखों का उपयोग किया। नीट परीक्षा में धांधली की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने इसकी जांच सीबीआई को सौंपी है। पेपर लीक के मामले अब केवल एक राज्य तक सीमित नहीं रहे हैं, बल्कि इनका जाल अंतरराष्ट्रीय सीमाओं और अंतरराज्यीय गिरोहों तक फैला हुआ है। जांच एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती इन गिरोहों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले एन्क्रिप्टेड संचार माध्यमों को डिकोड करना है, ताकि मुख्य साजिशकर्ताओं तक सीधे पहुंचा जा सके।

सीबीआई की इस कार्रवाई के बीच अब तक गिरफ्तार किए गए सात आरोपियों से अलग-अलग स्थानों पर पूछताछ जारी है। इन आरोपियों में सॉल्वर गैंग के सदस्य, बिचौलिए और वे लोग शामिल हैं जो पेपर को डिजिटल स्वरूप में प्रसारित करने के लिए जिम्मेदार थे। जांच में यह भी पाया गया है कि इस घोटाले के पीछे एक सुव्यवस्थित ढांचा काम कर रहा था, जिसमें हर व्यक्ति की भूमिका पहले से तय थी। कुछ लोग केवल छात्रों को फंसाने का काम करते थे, जबकि कुछ का काम केवल वित्तीय लेनदेन को संभालना था। सीबीआई अब उन बैंक खातों और डिजिटल वॉलेट की जांच कर रही है जिनका उपयोग पैसे के हस्तांतरण के लिए किया गया था। इस वित्तीय ट्रेल के माध्यम से उन सफेदपोश चेहरों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है जो पर्दे के पीछे से इस पूरे खेल को नियंत्रित कर रहे थे।

परीक्षा की सुचिता बनाए रखने के लिए यह जांच बहुत ही महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गई है। सीबीआई उन सभी केंद्रों की भी जांच कर रही है जहां से संदिग्ध गतिविधियां रिपोर्ट की गई थीं। जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया है कि कुछ स्थानों पर परीक्षा शुरू होने से कुछ घंटे पहले ही प्रश्न पत्र लीक हो गए थे। यह समय का अंतर ही इस घोटाले की गंभीरता को दर्शाता है क्योंकि इतने कम समय में पेपर का समाधान तैयार करना और उसे फैलाना बिना किसी तकनीकी विशेषज्ञता के संभव नहीं है। एजेंसी अब उन कोचिंग संस्थानों और ट्यूशन सेंटरों की भूमिका की भी जांच कर रही है जो अक्सर इस तरह की गतिविधियों के केंद्र बन जाते हैं। संदेह के घेरे में आए कई व्यक्तियों को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया गया है। गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर सीबीआई की कई टीमें बिहार, झारखंड, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में सक्रिय हैं। इन राज्यों में छापेमारी के दौरान कई संदिग्धों को हिरासत में लेकर प्रारंभिक पूछताछ की गई है। जांच एजेंसी का मानना है कि सात गिरफ्तारियां तो केवल शुरुआत हैं और यह पूरा स्कैम कई परतों में फैला हुआ है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, इस सिंडिकेट के उन संपर्कों का पता चल रहा है जो सरकारी तंत्र के भीतर बैठकर उन्हें गोपनीय जानकारी उपलब्ध करा रहे थे। सीबीआई का प्रयास है कि इस मामले में एक ऐसी मजबूत चार्जशीट दाखिल की जाए जिससे आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा मिल सके और भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर पूर्ण विराम लग सके।

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