स्वीडन के गोटेबर्ग पहुंचे भारतीय प्रधानमंत्री का प्रवासी समुदाय ने किया अभूतपूर्व स्वागत, भारत माता के जयकारों और पारंपरिक गीतों से गूंजा पूरा परिसर।

यूरोप के पांच देशों के आधिकारिक दौरे के हिस्से के रूप में भारतीय प्रधानमंत्री जब स्वीडन के प्रमुख औद्योगिक और तकनीकी

May 18, 2026 - 13:38
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स्वीडन के गोटेबर्ग पहुंचे भारतीय प्रधानमंत्री का प्रवासी समुदाय ने किया अभूतपूर्व स्वागत, भारत माता के जयकारों और पारंपरिक गीतों से गूंजा पूरा परिसर।
स्वीडन के गोटेबर्ग पहुंचे भारतीय प्रधानमंत्री का प्रवासी समुदाय ने किया अभूतपूर्व स्वागत, भारत माता के जयकारों और पारंपरिक गीतों से गूंजा पूरा परिसर।
  • यूरोपीय दौरे के तीसरे पड़ाव पर पहुंचे भारतीय राजनेता के दीदार के लिए उमड़ी प्रवासी भारतीयों की भारी भीड़, वैश्विक मंच पर भारत के बढ़ते गौरव को सराहा
  • स्वीडिश धरती पर तिरंगे के साथ जुटे भारतीय प्रवासियों में दिखा गजब का उत्साह, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और 'वैष्णव जन तो' के सुरीले भजनों से हुआ स्वागत

यूरोप के पांच देशों के आधिकारिक दौरे के हिस्से के रूप में भारतीय प्रधानमंत्री जब स्वीडन के प्रमुख औद्योगिक और तकनीकी केंद्र गोटेबर्ग पहुंचे, तो वहां का माहौल पूरी तरह से भारतीय रंग में रंगा नजर आया। हवाई अड्डे से लेकर प्रवासी समुदाय के कार्यक्रम स्थल तक हजारों की संख्या में भारतीय मूल के लोग अपने देश के शीर्ष नेता की एक झलक पाने के लिए घंटों पहले से कतारों में खड़े थे। जैसे ही प्रधानमंत्री का काफिला वहां पहुंचा, पूरा क्षेत्र ढोल-नगाड़ों की थाप, शंखध्वनि और पारंपरिक नारों से गूंज उठा। प्रवासी समुदाय की इस उत्सुकता और आत्मीयता ने यह साफ कर दिया कि सात समंदर पार रहने के बावजूद भारतीय नागरिकों का अपने देश और उसके नेतृत्व के प्रति जुड़ाव कितना गहरा और अटूट है। इस ऐतिहासिक आगमन ने दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को एक नया आयाम दिया है।

प्रवासी भारतीयों के इस भव्य समागम में शामिल लोगों की भावनाएं बेहद भावुक और श्रद्धा से भरी हुई थीं। कार्यक्रम में मौजूद अनेक लोगों ने प्रधानमंत्री को राष्ट्र के विकास का एक ऐसा संवाहक माना जो उनके लिए किसी सर्वोच्च मार्गदर्शक या पूजनीय व्यक्तित्व से कम नहीं है। दूर-दराज के स्वीडिश शहरों से यात्रा करके गोटेबर्ग पहुंचे परिवारों का कहना था कि देश के वर्तमान नेतृत्व ने वैश्विक मंच पर भारत की छवि को जिस तरह से बदला है, उससे विदेशों में रहने वाले हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा हो गया है। इस प्रकार की आत्मीयता और सम्मान की भावना यह दर्शाती है कि भारत के आंतरिक विकास, डिजिटल क्रांति और आर्थिक सुधारों का प्रभाव केवल देश की सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेशों में बसा कामकाजी और छात्र वर्ग भी इससे खुद को गहराई से जुड़ा हुआ महसूस करता है।

इस विशेष स्वागत समारोह को और अधिक यादगार बनाने के लिए प्रवासी समुदाय ने बेहतरीन सांस्कृतिक प्रस्तुतियां तैयार की थीं। आयोजन के दौरान स्वीडन की एक प्रसिद्ध ओपेरा गायिका ने जब पूरी शुद्धता के साथ महात्मा गांधी का प्रिय भजन 'वैष्णव जन तो' गाना शुरू किया, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति मंत्रमुग्ध हो गया। इसके साथ ही, पारंपरिक बंगाली लोक नृत्य और आरती की अनूठी प्रस्तुति ने स्वीडन के इस आधुनिक शहर में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर दिया। इस अद्भुत स्वागत से अभिभूत होकर भारतीय प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रवासी समुदाय की इस आत्मीयता की सराहना की और कहा कि गोटेबर्ग में मिला यह स्नेह वास्तव में हृदय को छू लेने वाला है। उन्होंने इस बात पर भी संतोष जताया कि राष्ट्रपिता के कालजयी विचार आज भी स्वीडन जैसी दूरस्थ धरती पर गूंज रहे हैं।

राजनीतिक और कूटनीतिक दृष्टिकोण से भी इस यात्रा को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि करीब आठ वर्षों के लंबे अंतराल के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह स्वीडन यात्रा हो रही है। हवाई अड्डे पर प्रोटोकॉल से परे जाकर स्वीडन के प्रधानमंत्री ने खुद भारतीय नेता की अगवानी की, जो इस द्विपक्षीय दौरे की गंभीरता और दोनों देशों के बीच बढ़ते आपसी विश्वास को प्रदर्शित करता है। इससे पहले जब भारतीय प्रधानमंत्री का विमान स्वीडिश हवाई क्षेत्र में दाखिल हुआ, तो स्वीडन के ग्रिपेन लड़ाकू विमानों ने उन्हें सुरक्षा घेरा प्रदान करते हुए एस्कॉर्ट किया। यह राजकीय सम्मान इस बात का गवाह है कि उत्तरी यूरोप के देश भारत को एशिया में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार के रूप में देखते हैं।

गोटेबर्ग शहर को इस ऐतिहासिक यात्रा के मुख्य केंद्र के रूप में चुने जाने के पीछे ठोस रणनीतिक और आर्थिक कारण मौजूद हैं। यह शहर स्वीडन के उद्योग, नवाचार और उच्च तकनीक अनुसंधान का धड़कता हुआ दिल माना जाता है, जहां बड़ी संख्या में भारतीय इंजीनियर, वैज्ञानिक और छात्र अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के बीच होने वाली उच्च स्तरीय द्विपक्षीय वार्ताओं में व्यापार, रक्षा सहयोग, हरित ऊर्जा परिवर्तन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सुरक्षित वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला जैसे संवेदनशील विषयों पर व्यापक चर्चा का रोडमैप तैयार किया गया है। इसके अलावा, भारत और यूरोपीय संघ के बीच क्रियान्वित मुक्त व्यापार समझौते के बाद दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने की तैयारी चल रही है, जिसके तहत दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार कई अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। इस महत्वपूर्ण यात्रा के दौरान आर्थिक मंचों पर भारत की उपस्थिति को और मजबूत करने के लिए एक विशेष व्यावसायिक सम्मेलन का भी आयोजन किया गया है। दोनों देशों के राष्ट्रप्रमुख यूरोपीय बिजनेस राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री की बैठक को संबोधित करने वाले हैं, जिसमें यूरोपीय आयोग के शीर्ष अधिकारी भी शिरकत करेंगे। इस मंच पर यूरोप की सबसे बड़ी कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ भारतीय प्रधानमंत्री की सीधी बातचीत होगी, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत में मेक इन इंडिया अभियान के तहत विदेशी निवेश को आकर्षित करना है। स्वीडन की बड़ी औद्योगिक इकाइयां पहले से ही भारत के बड़े बाजार और वहां के कुशल तकनीकी कार्यबल का लोहा मानती हैं, और इस दौरे से अंतरिक्ष अनुसंधान, विशेषकर भारत के आगामी शुक्र मिशन में स्वीडिश वैज्ञानिक उपकरणों के समावेशन जैसी उच्च-तकनीकी साझेदारियों को बल मिलने की उम्मीद है।

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