कान्स फिल्म फेस्टिवल में भारतीय अभिनेत्रियों के खिलाफ बढ़ती ऑनलाइन ट्रोलिंग पर भड़का अमीषा पटेल का गुस्सा, सोशल मीडिया पर बिना नाम लिए आलोचकों को सिखाया कड़ा सबक
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित कान्स फिल्म फेस्टिवल के चमचमाते रेड कार्पेट से लेकर सोशल मीडिया के
- वैश्विक मंचों पर देश का नाम रोशन करने वाले कलाकारों को नीचा दिखाने की मानसिकता पर उठे गंभीर सवाल, इंटरनेट के नकारात्मक दौर को बताया बेहद दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण
- भारतीय समुदाय के भीतर आपसी एकजुटता और समर्थन की कमी पर जताया गहरा क्षोभ, नकारात्मक संस्कृति को खत्म कर रचनात्मकता को बढ़ावा देने की पुरजोर वकालत
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित कान्स फिल्म फेस्टिवल के चमचमाते रेड कार्पेट से लेकर सोशल मीडिया के डिजिटल प्लेटफॉर्म्स तक इन दिनों केवल भारतीय कलाकारों की उपस्थिति और उनके पहनावे को लेकर चर्चाएं गर्म हैं। हालांकि, इस वैश्विक उत्सव के बीच एक बेहद ही चिंताजनक और कड़वा पहलू भी सामने आया है, जो सीधे तौर पर हमारे आधुनिक समाज की मानसिक संकीर्णता की ओर इशारा करता है। हाल ही में हिंदी सिनेमा की एक बेहद लोकप्रिय और शीर्ष पायदान पर काबिज अभिनेत्री को इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर शिरकत करने के बाद इंटरनेट पर बड़े पैमाने पर अवांछित आलोचना और ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा है। कुछ नकारात्मक तत्वों द्वारा यह भ्रामक दावा किया गया कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया और पैपराज़ी ने रेड कार्पेट पर चलते समय भारतीय अभिनेत्री को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया। इस बेबुनियाद बात को लेकर शुरू हुए डिजिटल विवाद ने फिल्म जगत के भीतर एक नई बहस को जन्म दे दिया है।
इस अनावश्यक और अपमानजनक ट्रोलिंग के खिलाफ अब फिल्म उद्योग के कई बड़े और सम्मानित नाम खुलकर सामने आने लगे हैं, जिन्होंने न केवल पीड़ित अभिनेत्री का समर्थन किया है बल्कि इंटरनेट पर जहर घोलने वाले इस पूरे तंत्र की कड़े शब्दों में निंदा की है। इसी कड़ी में बॉलीवुड की एक और अत्यंत प्रसिद्ध और वरिष्ठ अभिनेत्री, जो अपनी बेबाकी के लिए जानी जाती हैं, उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए ट्रोलर्स की जमकर क्लास लगाई है। उन्होंने बिना किसी का व्यक्तिगत नाम लिए इस बात पर गहरी चिंता जताई कि कैसे आजकल सोशल मीडिया का इस्तेमाल किसी की मेहनत और सफलता को सराहने के बजाय उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और नीचे गिराने के लिए किया जा रहा है। इस वरिष्ठ अभिनेत्री का यह तीखा रुख यह साफ करता है कि फिल्म उद्योग के भीतर अब इस मानसिक प्रताड़ना के खिलाफ एकजुटता की एक नई लहर पैदा हो रही है।
रविवार को सोशल मीडिया के एक प्रमुख मंच पर साझा किए गए अपने एक बेहद ही भावुक और विचारोत्तेजक संदेश में इस वरिष्ठ कलाकार ने भारतीय समाज की वर्तमान मानसिकता पर कई गंभीर और बुनियादी सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने लिखा कि हाल के दिनों में घटी कुछ अप्रिय घटनाओं से यह पूरी तरह साफ हो गया है कि हमारे अपने ही लोगों की सोच अब दूसरों की खुशियों में खुश होने के बजाय उन्हें जबरन खींचकर नीचे लाने की हो गई है। हम अक्सर बड़े-बड़े मंचों से खुद को एक अखंड राष्ट्र, एक परिवार और एकजुट समाज के रूप में परिभाषित करते हैं, लेकिन जब धरातल पर किसी एक नागरिक को वैश्विक स्तर पर समर्थन देने की बात आती है, तो हमारी यह तथाकथित एकजुटता पूरी तरह से गायब हो जाती है। इस प्रकार की आत्मघाती सोच अंततः देश की वैश्विक छवि और हमारे कलाकारों के मनोबल को बुरी तरह प्रभावित करती है।
सिनेमा जगत के आंतरिक घटनाक्रमों को यदि थोड़ा करीब से देखा जाए, तो यह बात पूरी तरह साफ हो जाती है कि कान्स जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहुंचना किसी भी कलाकार के लिए वर्षों की कड़ी मेहनत, लगन और एक बड़े दर्शक वर्ग के प्यार का नतीजा होता है। जब कोई भारतीय कलाकार ऐसे मंचों पर कदम रखता है, तो वह केवल अपनी व्यक्तिगत पहचान का प्रतिनिधित्व नहीं कर रहा होता, बल्कि वह पूरे देश की कला, संस्कृति और सिनेमा के गौरव को दुनिया के सामने प्रदर्शित कर रहा होता है। ऐसे गौरवशाली क्षणों में देश के भीतर से ही कुछ लोगों द्वारा केवल एक छोटी सी तस्वीर या वीडियो क्लिप के आधार पर भ्रामक धारणाएं बनाना और उनका उपहास उड़ाना बेहद शर्मनाक है। यह कृत्य उन सभी कलाकारों के संघर्ष का अपमान है जो दिन-रात एक करके वैश्विक पटल पर भारत की धाक जमाने का प्रयास कर रहे हैं। आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया पर किसी भी मशहूर हस्ती को ट्रोल करना बेहद आसान और आम बात बन चुकी है। बिना किसी प्रामाणिकता के किसी के भी चरित्र, पहनावे या उसकी वैश्विक उपस्थिति पर उंगलियां उठाना एक फैशन बन गया है। इस तरह के लगातार होने वाले साइबर हमलों का कलाकारों के मानसिक स्वास्थ्य और उनकी व्यक्तिगत जिंदगी पर कितना गहरा और विनाशकारी प्रभाव पड़ता है, इसका अंदाजा स्क्रीन के पीछे बैठे लोग कभी नहीं लगा सकते। यह बेहद जरूरी हो गया है कि इंटरनेट का उपयोग करने वाली आम जनता अपनी इस जिम्मेदारी को समझे कि रचनात्मक आलोचना और मानसिक प्रताड़ना के बीच एक बहुत पतली लकीर होती है, जिसे कभी नहीं लांघा जाना चाहिए।
इस पूरे विवाद के बीच फिल्म समीक्षकों और सांस्कृतिक विचारकों का भी मानना है कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया द्वारा किसी कलाकार को 'नजरअंदाज' करने का दावा पूरी तरह से मनगढ़ंत और सतही होता है। कान्स जैसे विशाल आयोजनों में दुनिया भर से सैकड़ों प्रतिष्ठित हस्तियां एक साथ शिरकत करती हैं, और वहां मौजूद हजारों फोटोग्राफरों का अपना एक अलग काम करने का तरीका और प्राथमिकताएं होती हैं। किसी एक कोण से खींची गई तस्वीर या कुछ सेकंड के वीडियो के आधार पर यह निष्कर्ष निकाल लेना कि किसी भारतीय कलाकार का वहां सम्मान नहीं हुआ, केवल और केवल नकारात्मकता फैलाने की एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है। भारतीय सिनेमा आज पूरी दुनिया में अपनी एक विशिष्ट पहचान बना चुका है, और हमारे कलाकारों की उपस्थिति को हर अंतरराष्ट्रीय मंच पर बेहद गंभीरता और सम्मान के साथ देखा जाता है।
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