बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने तोड़ी किसानों की कमर, पंजाब और राजस्थान में फसलों को भारी नुकसान।
उत्तर-पश्चिमी भारत के राज्यों में पिछले कुछ दिनों से जारी बेमौसम बारिश और भीषण ओलावृष्टि ने किसानों की साल भर की मेहनत पर पानी फेर
- 'धरतीपुत्रों' पर कुदरत की मार: गेहूं, जीरा और इसबगोल की तैयार फसलें खेतों में बिछीं, कटाई के समय बरपा मौसम का कहर
- रबी सीजन की मेहनत पर फिरा पानी: पंजाब के मालवा से लेकर राजस्थान के रेगिस्तान तक ओलावृष्टि ने मचाई तबाही, मुआवजे की उठी मांग
उत्तर-पश्चिमी भारत के राज्यों में पिछले कुछ दिनों से जारी बेमौसम बारिश और भीषण ओलावृष्टि ने किसानों की साल भर की मेहनत पर पानी फेर दिया है। विशेष रूप से पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में रबी की फसलें, जो कटाई के अंतिम चरण में थीं, इस प्राकृतिक आपदा की भेंट चढ़ गई हैं। पंजाब के मालवा क्षेत्र के जिलों जैसे मुक्तसर, फाजिल्का, मानसा और बठिंडा में बड़े आकार के ओलों ने खड़ी गेहूं की फसल को जमीन पर बिछा दिया है। इसी तरह राजस्थान के पश्चिमी हिस्सों में जीरा और इसबगोल जैसी नकदी फसलों को भारी क्षति पहुँची है। मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी दी है कि पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता के कारण आने वाले कुछ दिनों तक आंधी-तूफान और बारिश का यह दौर जारी रह सकता है, जिससे कृषि क्षेत्र में संकट और गहराने की आशंका है।
पंजाब में गेहूं की सरकारी खरीद 1 अप्रैल 2026 से आधिकारिक तौर पर शुरू हो चुकी थी, लेकिन कुदरत के बदले मिजाज ने पूरी प्रक्रिया को अधर में लटका दिया है। संगरूर और बरनाला जैसे प्रमुख कृषि प्रधान जिलों में तेज हवाओं के साथ हुई बारिश के कारण 'लॉजिंग' (फसलों का गिरना) की समस्या देखी जा रही है। गिरे हुए गेहूं के दाने मिट्टी के संपर्क में आने से काले पड़ सकते हैं, जिससे अनाज की गुणवत्ता और चमक प्रभावित होगी। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस नमी के कारण गेहूं की पैदावार में प्रति एकड़ 10 से 15 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है। किसान अब सरकार से विशेष गिरदावरी (फसल नुकसान का आकलन) करवाकर तुरंत मुआवजे की गुहार लगा रहे हैं ताकि वे अपनी आर्थिक स्थिति को संभाल सकें।
जीरा और इसबगोल पर दोहरी मार
राजस्थान के जोधपुर, बाड़मेर और जैसलमेर जिलों में इस साल जीरे और इसबगोल की बंपर पैदावार की उम्मीद थी, लेकिन मार्च के अंत और अप्रैल की शुरुआत में हुई ओलावृष्टि ने उम्मीदों को मिट्टी में मिला दिया है। जीरे की फसल बेहद संवेदनशील होती है और पकने के समय थोड़ी सी भी अधिक नमी दानों को खराब कर देती है। इसबगोल के मामले में ओले गिरने से दाने झड़ गए हैं, जिससे किसानों को भारी वित्तीय घाटा उठाना पड़ रहा है।
हरियाणा के दक्षिणी और पश्चिमी जिलों में भी स्थिति कमोबेश पंजाब जैसी ही बनी हुई है। रोहतक, रेवाड़ी, भिवानी और चरखी दादरी में ओलावृष्टि ने सरसों और गेहूं की परिपक्व फसल को बर्बाद कर दिया है। भिवानी के तोशाम और चरखी दादरी के बाढ़ड़ा क्षेत्र में तो स्थिति इतनी गंभीर है कि कई गांवों में शत-प्रतिशत फसल नुकसान की खबरें मिल रही हैं। जिला प्रशासन ने राजस्व अधिकारियों (पटवारियों) की टीमें गठित कर दी हैं ताकि खेतों में जाकर वास्तविक नुकसान का जायजा लिया जा सके। किसानों का कहना है कि उन्होंने कर्ज लेकर खाद और बीज की व्यवस्था की थी, लेकिन अब फसल के बर्बाद होने से वे बैंक की किश्तें चुकाने की स्थिति में भी नहीं रह गए हैं।
मौसम विभाग के अनुसार, अप्रैल के पहले सप्ताह में एक के बाद एक दो पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हुए हैं, जिनका केंद्र मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत बना हुआ है। शनिवार (4 अप्रैल) और आगामी मंगलवार (7 अप्रैल) को मौसम की तीव्रता सबसे अधिक रहने की संभावना जताई गई है। जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के ऊपरी इलाकों में हो रही बर्फबारी के कारण मैदानी इलाकों में ठंडी हवाएं चल रही हैं, जिससे कटी हुई फसल को सुखाने में भी दिक्कत आ रही है। नमी के कारण मंडियों में पहुँचने वाले अनाज में 'लस्टर लॉस' (चमक कम होना) की समस्या बढ़ सकती है, जिससे सरकारी खरीद में नमी के मानकों को लेकर विवाद होने की आशंका है।
उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्सों और बुंदेलखंड के ललितपुर जैसे जिलों में भी बेमौसम बारिश ने भारी तबाही मचाई है। ललितपुर में सामान्य से 291 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है, जिससे गेहूं, अरहर और मटर की फसलें प्रभावित हुई हैं। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जो फसलें कटकर खलिहानों में रखी थीं, वे भी भीगने के कारण खराब हो रही हैं। प्रशासन ने किसानों को सलाह दी है कि वे कटी हुई फसल को तिरपाल से ढंककर रखें और जल निकासी की समुचित व्यवस्था करें। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन किसानों की 33 प्रतिशत से अधिक फसल खराब हुई है, उन्हें आपदा राहत कोष से मुआवजा प्रदान किया जाएगा।
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