नोएडा में घर का सपना हुआ और महंगा, प्राधिकरण ने आवंटन दरों में की 11 प्रतिशत की रिकॉर्ड बढ़ोतरी

औद्योगिक क्षेत्र, जो नोएडा की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं, वहां भी निवेश अब महंगा हो गया है। प्राधिकरण ने औद्योगिक भूखंडों के लिए दो अलग-अलग फेजों में नई दरें निर्धारित की हैं। फेज-1 में 4,000 वर्ग मीटर तक के औद्योगिक भूखंडों का नया आवंटन रेट

May 9, 2026 - 09:42
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नोएडा में घर का सपना हुआ और महंगा, प्राधिकरण ने आवंटन दरों में की 11 प्रतिशत की रिकॉर्ड बढ़ोतरी
नोएडा में घर का सपना हुआ और महंगा, प्राधिकरण ने आवंटन दरों में की 11 प्रतिशत की रिकॉर्ड बढ़ोतरी

  • मध्यम वर्ग पर महंगाई की दोहरी मार, गुरुवार से लागू हुईं आवासीय और औद्योगिक भूखंडों की नई दरें
  • प्रॉपर्टी बाजार में मचेगी हलचल, नोएडा अथॉरिटी के फैसले से अब प्लॉट और फ्लैट की कीमतों में आएगा बड़ा उछाल

देश की सबसे व्यवस्थित औद्योगिक राजधानियों में शुमार उत्तर प्रदेश के नोएडा में अब खुद का आशियाना बनाना या कारोबार शुरू करना पहले से कहीं ज्यादा खर्चीला साबित होगा। नोएडा प्राधिकरण ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अपनी संपत्तियों की आवंटन दरों में भारी वृद्धि करने का निर्णय लिया है। बोर्ड बैठक के बाद हुए आधिकारिक अनुमोदन के आधार पर आवासीय, औद्योगिक, संस्थागत और ग्रुप हाउसिंग श्रेणियों की आवंटन दरों में 11 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर दी गई है। यह फैसला गुरुवार से ही प्रभावी हो गया है, जिसका सीधा मतलब है कि अब प्राधिकरण द्वारा निकाली जाने वाली किसी भी नई स्कीम या आवंटन में खरीदारों को ये नई और बढ़ी हुई कीमतें चुकानी होंगी। पिछले कई सालों के रिकॉर्ड पर नजर डालें तो प्राधिकरण आमतौर पर वार्षिक रूप से केवल 5 प्रतिशत तक की वृद्धि ही करता था, लेकिन इस बार की 11 प्रतिशत की उछाल ने सबको चौंका दिया है।

नोएडा प्राधिकरण द्वारा दरों में की गई इस वृद्धि के पीछे बाजार की मांग और वास्तविकता के बीच के अंतर को कम करने का तर्क दिया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, नोएडा में बुनियादी ढांचे का जिस गति से विकास हुआ है और बाजार में जमीन की जो वास्तविक कीमतें हैं, आवंटन दरें उनसे काफी पीछे थीं। आवासीय संपत्तियों की बात करें तो प्राधिकरण ने शहर को अलग-अलग श्रेणियों (ए प्लस से लेकर ई श्रेणी तक) में विभाजित किया है। इस नई बढ़ोतरी के बाद 'ए' श्रेणी के सेक्टरों में दरें 1,32,860 रुपये प्रति वर्ग मीटर से बढ़कर 1,47,480 रुपये प्रति वर्ग मीटर तक पहुँच गई हैं। वहीं, 'ई' श्रेणी जैसे अपेक्षाकृत सस्ते क्षेत्रों में भी अब प्रति वर्ग मीटर की कीमत 51,000 रुपये से बढ़कर 56,610 रुपये हो गई है।

औद्योगिक क्षेत्र, जो नोएडा की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं, वहां भी निवेश अब महंगा हो गया है। प्राधिकरण ने औद्योगिक भूखंडों के लिए दो अलग-अलग फेजों में नई दरें निर्धारित की हैं। फेज-1 में 4,000 वर्ग मीटर तक के औद्योगिक भूखंडों का नया आवंटन रेट 55,880 रुपये प्रति वर्ग मीटर तय किया गया है, जो पहले लगभग 50,340 रुपये था। इसी प्रकार फेज-2 में 60,000 वर्ग मीटर से बड़े भूखंडों का शुल्क 20,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर रखा गया है। डेटा सेंटर, आईटी और आईटीईएस जैसी संस्थागत संपत्तियों की दरों में भी इसी अनुपात में बढ़ोतरी की गई है। हालांकि, राहत की बात यह है कि व्यवसायिक संपत्तियों और श्रमिक कुंज (EWS) जैसी श्रेणियों की दरों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे कमजोर आय वर्ग के लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है। नोएडा में पिछले कुछ वर्षों का औसत वृद्धि दर केवल 5 प्रतिशत रहता था, लेकिन मई 2026 में की गई 11 प्रतिशत की वृद्धि पिछले एक दशक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी में से एक है। सेक्टर 'ए प्लस' जैसी अति-प्रीमियम श्रेणियों की कीमतें पहले से ही उच्च स्तर पर (1.75 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर) होने के कारण उनमें कोई बदलाव नहीं किया गया है।

इस बढ़ोतरी का सीधा असर आने वाले समय में रियल एस्टेट मार्केट पर पड़ना तय है। जब प्राधिकरण भूमि की आवंटन दरें बढ़ाता है, तो बिल्डरों और डेवलपर्स के लिए अधिग्रहण की लागत बढ़ जाती है। इसका परिणाम यह होता है कि वे इस अतिरिक्त बोझ को फ्लैटों और विला की अंतिम कीमतों में जोड़कर उपभोक्ताओं पर डाल देते हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि इस फैसले के बाद नोएडा में निर्माणाधीन और नई परियोजनाओं में फ्लैटों की कीमतों में 8 से 12 प्रतिशत तक की वृद्धि देखी जा सकती है। मध्यम वर्ग के लिए, जो पहले से ही बैंक लोन की बढ़ती ब्याज दरों और महंगाई से जूझ रहा है, नोएडा में घर खरीदना अब एक बड़ी वित्तीय चुनौती बन जाएगा।

ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे प्राधिकरणों (YEIDA) की तुलना में नोएडा की दरें हमेशा से अधिक रही हैं, लेकिन इस ताज़ा बढ़ोतरी ने अंतर को और भी अधिक स्पष्ट कर दिया है। नोएडा में जमीन की कमी और बढ़ती मांग को देखते हुए प्राधिकरण राजस्व बढ़ाने और शहर के रखरखाव के लिए इन दरों को अनिवार्य मान रहा है। आईटी और आईटीईएस हब के रूप में नोएडा की पहचान और जेवर एयरपोर्ट की निकटता ने यहां की प्रॉपर्टी को निवेश का सबसे हॉट डेस्टिनेशन बना दिया है। यही कारण है कि बढ़ती कीमतों के बावजूद यहां निवेश का आकर्षण कम नहीं हो रहा है, लेकिन मध्यम आय वर्ग के लिए विकल्पों की कमी होती जा रही है।

प्राधिकरण के इस कदम से उन लोगों को सबसे ज्यादा नुकसान होगा जो आगामी आवासीय योजनाओं का इंतजार कर रहे थे। अब उन्हें उन्हीं प्लॉट्स के लिए लाखों रुपये अतिरिक्त देने होंगे। इसके अलावा, औद्योगिक दरों में वृद्धि का असर उन स्टार्टअप्स और मध्यम उद्योगों (MSME) पर भी पड़ सकता है जो नोएडा में अपना प्लांट लगाने की योजना बना रहे थे। महंगी जमीन का मतलब है उच्च उत्पादन लागत, जो अंततः उत्पादों की कीमतों को भी प्रभावित कर सकती है। संस्थागत विभाग में आईटी संपत्तियों की बढ़ी हुई दरें नोएडा के तकनीकी क्षेत्र के विकास की गति को भी थोड़ा प्रभावित कर सकती हैं, हालांकि शहर की कनेक्टिविटी इसे अभी भी पसंदीदा बनाए रखेगी।

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