सुप्रीम कोर्ट में नया दौर: सीजेआई गवई ने जस्टिस सूर्यकांत को सिफारिश की, CJI बीआर गवई 23 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं। 

भारत का सर्वोच्च न्यायालय देश की न्याय व्यवस्था का सबसे ऊंचा शिखर है, जहां से कानून की व्याख्या होकर समाज तक पहुंचती है। सोमवार को एक महत्वपूर्ण खबर सामने

Oct 27, 2025 - 12:35
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सुप्रीम कोर्ट में नया दौर: सीजेआई गवई ने जस्टिस सूर्यकांत को सिफारिश की, CJI बीआर गवई 23 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं। 
सुप्रीम कोर्ट में नया दौर: सीजेआई गवई ने जस्टिस सूर्यकांत को सिफारिश की, CJI बीआर गवई 23 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं। 

भारत का सर्वोच्च न्यायालय देश की न्याय व्यवस्था का सबसे ऊंचा शिखर है, जहां से कानून की व्याख्या होकर समाज तक पहुंचती है। सोमवार को एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई कि मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) भालचंद्र रविंद्र गवई ने केंद्रीय विधि मंत्रालय को पत्र लिखकर जस्टिस सूर्यकांत को अपना उत्तराधिकारी बनाने की सिफारिश की है। यह सिफारिश रिटायरमेंट से ठीक एक महीने पहले की है, जो न्यायिक परंपरा के अनुसार की गई। सीजेआई गवई 23 नवंबर 2025 को सेवानिवृत्त हो रहे हैं, और जस्टिस सूर्यकांत 24 नवंबर से भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश का पद संभालेंगे। यह नियुक्ति वरिष्ठता के सिद्धांत पर आधारित है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के सबसे वरिष्ठ जज को प्राथमिकता दी जाती है। जस्टिस सूर्यकांत का कार्यकाल फरवरी 2027 तक चलेगा, जो लगभग 15 महीने का होगा। यह बदलाव सुप्रीम कोर्ट के लिए नई दिशा लाएगा, जहां कई महत्वपूर्ण मुकदमे लंबित हैं।

सीजेआई गवई ने अपनी सिफारिश में जस्टिस सूर्यकांत को हर तरह से योग्य और सक्षम बताया। उन्होंने कहा कि जस्टिस सूर्यकांत संघर्ष और दृढ़ता से भरे सामाजिक पृष्ठभूमि के धनी हैं, जो सीजेआई गवई की अपनी पृष्ठभूमि से मिलती-जुलती है। यह सिफारिश 27 अक्टूबर को की गई, जब सीजेआई गवई भूटान की चार दिवसीय यात्रा से लौटे थे। केंद्रीय सरकार ने 23 अक्टूबर को ही सीजेआई गवई को पत्र लिखकर उत्तराधिकारी की सिफारिश करने को कहा था। विधि मंत्रालय अब इस सिफारिश को प्रधानमंत्री के पास भेजेगा, जो राष्ट्रपति को सलाह देंगे। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद औपचारिक अधिसूचना जारी होगी। यह प्रक्रिया मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर (एमओपी) के तहत होती है, जो न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थानांतरण के नियम निर्धारित करती है। सुप्रीम कोर्ट के सूत्रों के अनुसार, सीजेआई गवई ने सिफारिश की प्रति जस्टिस सूर्यकांत को भी सौंप दी है।

सीजेआई गवई का कार्यकाल 14 मई 2025 से चल रहा है। वे सुप्रीम कोर्ट के 51वें मुख्य न्यायाधीश हैं। महाराष्ट्र के नागपुर में जन्मे गवई दलित समुदाय से आते हैं और उनके पिता रविंद्र रघुनाथ गवई एक प्रसिद्ध वकील थे। उन्होंने नागपुर विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री ली। 1985 में वकालत शुरू की और 1990 में नागपुर हाईकोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता बने। 2003 में बंबई हाईकोर्ट के जज बने। 2019 में सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। उनका कार्यकाल छोटा रहा, लेकिन उन्होंने कई महत्वपूर्ण फैसले दिए। जैसे, आरक्षण और सामाजिक न्याय पर जोर दिया। पर्यावरण और महिला अधिकारों के मामलों में सक्रिय रहे। रिटायरमेंट के बाद वे संविधान बेंच के चेयरमैन रहेंगे। गवई ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को मजबूत करने का प्रयास किया।

जस्टिस सूर्यकांत हरियाणा के हिसार के रहने वाले हैं। उनका जन्म 10 फरवरी 1962 को हुआ। उन्होंने हिसार के गवर्नमेंट पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज से स्नातक किया। 1984 में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से कानून की डिग्री ली। वकालत की शुरुआत 1984 में हिसार जिला कोर्ट से की। 1985 में चंडीगढ़ आकर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में प्रैक्टिस शुरू की। संवैधानिक, सेवा और सिविल मामलों में विशेषज्ञता हासिल की। मार्च 2001 में वरिष्ठ अधिवक्ता घोषित हुए। 7 जुलाई 2000 को हरियाणा के सबसे युवा एडवोकेट जनरल बने। 9 जनवरी 2004 को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के स्थायी जज बने। बाद में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहे। 24 मई 2019 को सुप्रीम कोर्ट के जज बने। वे सुप्रीम कोर्ट के दूसरे सबसे वरिष्ठ जज हैं।

जस्टिस सूर्यकांत का रिकॉर्ड प्रभावशाली है। वे आर्टिकल 370 के खात्मे के मामले में बेंच का हिस्सा रहे। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, लोकतंत्र, भ्रष्टाचार, पर्यावरण और लैंगिक समानता पर ऐतिहासिक फैसले दिए। 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पंजाब यात्रा के दौरान सुरक्षा चूक के मामले में पूर्व सीजेआई इंदिरा बनर्जी की अगुवाई में पांच सदस्यीय समिति गठित करने वाले बेंच में शामिल थे। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं की जांच के लिए न्यायिक दिमाग जरूरी है। वर्तमान में वे बिहार के विशेष गहन संशोधन (SIR) मतदाता सूची रद्द करने की याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे हैं। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि न्यायपालिका को समाज के कमजोर वर्गों की आवाज बनना चाहिए। उनका कार्यकाल सुप्रीम कोर्ट के लिए चुनौतीपूर्ण होगा, क्योंकि लंबित मुकदमों की संख्या 80 हजार से ज्यादा है।

न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया पारदर्शी है। कॉलेजियम सिस्टम के तहत सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जज मिलकर सिफारिश करते हैं। लेकिन सीजेआई की सिफारिश सबसे महत्वपूर्ण होती है। सरकार इसे स्वीकार करती है, जब तक कोई असाधारण कारण न हो। पिछले कुछ वर्षों में सरकार और न्यायपालिका के बीच एमओपी पर विवाद रहा। लेकिन इस बार प्रक्रिया सुगम रही। विधि मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि सिफारिश का स्वागत है। जल्द अधिसूचना जारी होगी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के बाद जस्टिस सूर्यकांत शपथ लेंगे। यह नियुक्ति भारत की न्यायिक परंपरा को मजबूत करेगी।

सीजेआई गवई के कार्यकाल में सुप्रीम कोर्ट ने कई बड़े फैसले लिए। जैसे, इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम को असंवैधानिक घोषित किया। आधार कार्ड और प्राइवेसी पर बहस हुई। पर्यावरण संरक्षण के मामलों में सक्रियता दिखाई। गवई ने वकीलों से कहा कि न्याय जल्द और सस्ता हो। उन्होंने डिजिटल कोर्ट को बढ़ावा दिया। रिटायरमेंट के बाद वे राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों से जुड़ेंगे। जस्टिस सूर्यकांत के आने से कोर्ट में नई ऊर्जा आएगी। वे युवा जजों को प्रोत्साहित करेंगे।

यह बदलाव राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय है। विपक्ष ने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता बनी रहे। सरकार ने आश्वासन दिया कि हस्तक्षेप नहीं होगा। विशेषज्ञ कहते हैं कि वरिष्ठता सिद्धांत मजबूत है। जस्टिस सूर्यकांत का कार्यकाल छोटा लेकिन प्रभावी होगा। वे संवैधानिक मामलों पर फोकस करेंगे। सुप्रीम कोर्ट के अन्य जजों ने सिफारिश का स्वागत किया। अटॉर्नी जनरल ने कहा कि यह परंपरा का सम्मान है।

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