Special: IPS नीरज कुमार जादौन ने बदल दी बागपत के 37 युवाओं की जिंदगी, IPS की प्रेरणा ने रोशन कर दिया उनका जहां। 

संघर्षों से लड़कर, परिस्थितियों के विषम चक्र को सफलता की ओर मोड देने की कला लाखों में से किसी एक विरले शख्स में ही होती है। बागपत जिले के ....

Apr 22, 2025 - 11:33
Apr 22, 2025 - 12:50
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Special: IPS नीरज कुमार जादौन ने बदल दी बागपत के 37 युवाओं की जिंदगी, IPS की प्रेरणा ने रोशन कर दिया उनका जहां। 
नीरज कुमार जादौन , एसपी हरदोई

Special: संघर्षों से लड़कर, परिस्थितियों के विषम चक्र को सफलता की ओर मोड देने की कला लाखों में से किसी एक विरले शख्स में ही होती है। बागपत जिले के कुछ युवाओं ने एक ऐसे ही शख्स की प्रेरणा को अपने जीवन में उतारकर दिन रात मेहनत की और सफलता की एक नई कहानी लिख डाली।

यह कहानी है यूपी के बागपत जिले के गांव सरूरपुर कलां की, जहां 37 युवाओं ने यूपी पुलिस भर्ती परीक्षा में सफलता हासिल कर एक नई इबारत लिख डाली।बागपत जिले के पूर्व SP और वर्तमान में हरदोई में तैनात IPS नीरज कुमार जादौन (Neeraj Kumar Jadaun) ने 2022 में सरूरपुर गांव के युवाओं को शिक्षा के प्रति प्रेरित किया।

बता दें कि उस समय IPS नीरज कुमार जादौन (Neeraj Kumar Jadaun) बागपत जिले के SP थे। उन्होंने न केवल उन्हें कड़ी मेहनत करने की सलाह दी, बल्कि गांव में एक लाइब्रेरी स्थापित करने की भी पहल की। गांव के ही एक युवक ने उनकी प्रेरणा से लाइब्रेरी बनाई, जहां किताबों की व्यवस्था खुद नीरज कुमार जादौन (Neeraj Kumar Jadaun) ने की। इस लाइब्रेरी का उद्घाटन करते समय उन्होंने युवाओं को बताया कि कैसे वह खुद मेहनत और लगन से IPS बने। उनकी इसी प्रेरणा से गांव के युवा जागरूक हुए और लाइब्रेरी में पढ़ाई शुरू की, जिसका परिणाम आज सबके सामने है।

बागपत जिले के सरूरपुर कलां गांव ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। इस छोटे से गांव से 37 युवाओं ने यूपी पुलिस भर्ती परीक्षा में सफलता प्राप्त की है। इस सफलता के पीछे IPS नीरज कुमार जादौन (Neeraj Kumar Jadaun) की प्रेरणा और उनकी बनाई हुई लाइब्रेरी की अहम भूमिका रही है। गांव की लाइब्रेरी संचालित करने वाले युवक ने बताया कि इस लाइब्रेरी से पढ़कर 37 युवाओं ने यूपी पुलिस में सफलता हासिल की है। यहां पढ़ने वाले अधिकतर युवा गरीब परिवारों से हैं—किसी के पिता ऑटो ड्राइवर हैं, कोई ट्रक ड्राइवर है, तो किसी के पिता मजदूर। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगे भी इस लाइब्रेरी से पढ़ने वाले कई युवा सरकारी सेवाओं में अपना नाम रोशन करेंगे।इसी गांव के शुभम का भी यूपी पुलिस में चयन हुआ है।

शुभम ने निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जताया। शुभम के पिता अजयवीर गांव में मजदूरी करते हैं। शुभम की मां ने भावुक होकर कहा, “हमने कभी नहीं सोचा था कि हमारा बेटा पुलिस में जाएगा। वह चार-पांच मंजिला इमारतों पर तसला उठाकर मजदूरी करने वाले पिता का बेटा है, लेकिन उसकी मेहनत रंग लाई।” गांव के किसान विक्रम शर्मा की बेटी कोमल का भी यूपी पुलिस में चयन हुआ है। कोमल का सपना ASI या PCS बनने का था। उन्होंने कोविड के दौरान ऑनलाइन पढ़ाई की और बिना किसी कोचिंग के परीक्षा पास की। कोमल कहती हैं, “अब मुझे अपने सपनों को और ऊंचा उड़ान देना है। मैं ASI और PCS की तैयारी करूंगी। सरूरपुर गांव के ऑटो ड्राइवर वेदपाल की बेटी दीपा ने यूपी पुलिस में सफलता हासिल की है। दीपा ने बताया कि उसके पिता ने दिन-रात मेहनत करके उसकी पढ़ाई करवाई।

दीपा ने कहा, “हमारा परिवार बहुत गरीब है, लेकिन अब मैं अपने पिता को दोबारा ऑटो चलाने नहीं दूंगी। यह मेरी जिम्मेदारी होगी कि मैं अपने परिवार को हर वह खुशी दूं जिसकी उन्हें जरूरत है।” गांव के रहने वाले ग्रामीणों और चयनित हुए अभ्यर्थियों का कहना है कि उनके गांव में पहले लाइब्रेरी नहीं थी तथा अगर तैयारी के लिए जाना हो तो गांव से करीब 20 किलोमीटर दूर जाना होता था।SP नीरज कुमार जादौन (Neeraj Kumar Jadaun) के प्रयासों से गांव में लाइब्रेरी खुली तो उन्होंने हमें तैयारी करने के लिए जागरूक किया। यूपी पुलिस भर्ती के लिए हमने कड़ी मेहनत की है। हम सफल हो गए और अब यूपी पुलिस में सेवा देंगे।

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ज्ञात हो कि नीरज कुमार जादौन (Neeraj Kumar Jadaun) 2015 बेच के युवा IPS अधिकारी है। वह अपनी तेज तर्रार कार्यशैली के साथ ही व्यवहार कुशलता और ईमानदारी के लिए जाने जाते है। अपराधियों पर लगाम लगाने में सक्षम अधिकारी है। बेहतर कानून व्यवस्था और फरियादियों की समस्याओं का तत्काल निस्तारण उनके व्यवहार में शुमार है। मूल रूप से जनपद जालौन के गांव नोरेजपुर निवासी IPS नीरज कुमार जादौन (Neeraj Kumar Jadaun) ने वर्ष 2008 में नीरज ब्रिटिश टेलीकॉम कंपनी की बेंगलुरु ब्रांच में 22 लाख रुपए के पैकेज पर नौकरी शुरू की थी।

2008 में उनके पिता की हत्या कर दी गई। केस की पैरवी में नीरज को पुलिस से मदद नहीं मिली। पिता को इंसाफ दिलाने के लिए उन्होंने IPS बनने की ठान ली। कभी निराशा मिली तो कभी हताशा हुई, लेकिन इरादे के पक्के नीरज ने हार नहीं मानी और IPS बन गए। बस फिर क्या था, आरोपितों की हेकड़ी ढीली हो गई और स्थानीय पुलिस ने भी नियमानुसार कार्रवाई की। जालौन के नौरेजपुर गांव के मूलनिवासी नीरज कुमार जादौन (Neeraj Kumar Jadaun) का जन्म कानपुर में हुआ।

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