गुजरात की अमानवीय घटना- रेप प्रयास विफल होने पर 6 वर्षीय बच्ची के गुप्तांग में लोहे की रॉड डाली, आरोपी गिरफ्तार। 

गुजरात के राजकोट जिले के जसदान तहसील के आटकोट गांव में 4 दिसंबर 2025 को एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया

Dec 10, 2025 - 12:00
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गुजरात की अमानवीय घटना- रेप प्रयास विफल होने पर 6 वर्षीय बच्ची के गुप्तांग में लोहे की रॉड डाली, आरोपी गिरफ्तार। 
गुजरात की अमानवीय घटना- रेप प्रयास विफल होने पर 6 वर्षीय बच्ची के गुप्तांग में लोहे की रॉड डाली, आरोपी गिरफ्तार। 

गुजरात के राजकोट जिले के जसदान तहसील के आटकोट गांव में 4 दिसंबर 2025 को एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया, जब एक 35 वर्षीय मजदूर रामसिंह तेरसिंह ने 6 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म का प्रयास किया। प्रयास विफल होने पर आरोपी ने क्रोध में आकर बच्ची के गुप्तांग में लगभग एक फुट लंबी लोहे की रॉड डाल दी, जिससे बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई और खून से लथपथ होकर खेत में पड़ी रही। बच्ची के माता-पिता खेतों में काम कर रहे थे, जब आरोपी ने मौके का फायदा उठाकर बच्ची को अगवा किया और एक सुनसान जगह पर ले गया। घटना के बाद बच्ची को तत्काल जसदान के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से प्रारंभिक उपचार के बाद उसे राजकोट के जान्हा अस्पताल में रेफर कर दिया गया। अस्पताल में बच्ची की हालत स्थिर बताई जा रही है, लेकिन चिकित्सकों ने गंभीर आंतरिक चोटों का हवाला देते हुए लंबे इलाज की बात कही। पुलिस ने घटना की जानकारी मिलते ही त्वरित कार्रवाई शुरू की, जिसमें लगभग 100 संदिग्धों से पूछताछ की गई, और अंततः आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। घटना दोपहर करीब 11 बजे के आसपास हुई, जब बच्ची अपने घर के पास खेल रही थी। आरोपी रामसिंह, जो आटकोट गांव में पिछले दो वर्षों से खेतों में मजदूरी कर रहा था, बच्ची को लुभाकर एक पानी के टैंक के पास ले गया। वहां उसने दुष्कर्म का प्रयास किया, लेकिन बच्ची के विरोध और चीखने पर विफल रहा। क्रोधित होकर आरोपी ने पास पड़ी लोहे की रॉड उठाई और बच्ची के गुप्तांग में घुसेड़ दी, जिससे बच्ची बुरी तरह जख्मी हो गई। आरोपी ने बच्ची को उसी हाल में छोड़कर भाग गया, और बच्ची दर्द से कराहती रही। बच्ची के माता-पिता ने जब उसे खोजा तो खेत के किनारे खून से सनी हालत में पाया। उन्होंने तुरंत स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने प्रारंभिक जांच के बाद राजकोट रेफरल की सलाह दी। जान्हा अस्पताल में बच्ची को विशेषज्ञ चिकित्सकों के संरक्षण में रखा गया, और सर्जरी सहित कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ा। चिकित्सकों ने बताया कि बच्ची की आंतरिक चोटें गंभीर हैं, लेकिन उम्र के कारण रिकवरी की संभावना है।

पुलिस को सूचना मिलते ही आटकोट पुलिस स्टेशन ने केस दर्ज किया, और राजकोट ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक विजयसिंह गुर्जर के नेतृत्व में विशेष जांच टीम गठित की गई। बच्ची को होश आने पर उसने आरोपी की पहचान की, जो गांव में ही मजदूर था। पुलिस ने तुरंत आरोपी को संदिग्ध मानकर हिरासत में लिया, और कठोर पूछताछ में उसने अपना अपराध कबूल कर लिया। गुर्जर ने बताया कि आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने दुष्कर्म का प्रयास किया, लेकिन असफल होने पर गुस्से में रॉड से हमला किया। आरोपी मध्य प्रदेश के अलीराजपुर का निवासी है, और उसके तीन बच्चे हैं—दो बेटे और एक बेटी। वह अपनी पत्नी के साथ गांव में रहता था, और स्थानीय खेतों में काम करता था। पुलिस ने आरोपी के घर की तलाशी ली, जहां से अपराध से जुड़े कुछ सामान बरामद किए गए। आरोपी को भारतीय न्याय संहिता की धारा 65(2) के तहत तथा पॉस्को एक्ट की धारा 5(आई), 5(एम) तथा 6(1) के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया। जांच के दौरान पुलिस ने दस विशेष दलों का गठन किया, जो गांव के आसपास के क्षेत्रों में फैल गए। लगभग 100 व्यक्तियों से पूछताछ की गई, जिनमें गांव के अन्य मजदूर, पड़ोसी और संदिग्ध शामिल थे। बच्ची के परिवार ने भी सहयोग किया, और उन्होंने बताया कि आरोपी पहले से ही गांव में घूमता-फिरता था। पुलिस ने घटनास्थल पर फॉरेंसिक टीम भेजी, जहां से रक्त के नमूने और अन्य साक्ष्य एकत्र किए गए। आरोपी की गिरफ्तारी 9 दिसंबर को हुई, जब पूछताछ के दौरान उसके कबूलनामे पर आधारित बयान दर्ज किया गया। गुर्जर ने कहा कि आरोपी ने बच्ची को गला दबाकर चुप कराने की भी कोशिश की, लेकिन वह भागने में सफल नहीं हुआ। बच्ची के परिवार को सरकारी सहायता का आश्वासन दिया गया, और उन्हें चिकित्सा तथा कानूनी मदद प्रदान की जा रही है। आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया, और आगे की जांच जारी है।

बच्ची का परिवार दाहोड़ जिले से मजदूरी के लिए आटकोट गांव आया था, और वे खेतों में काम करके गुजारा करते हैं। घटना के बाद परिवार ने गांव छोड़ने का फैसला किया, लेकिन पुलिस ने सुरक्षा का वादा किया। बच्ची की मां ने बताया कि वे खेत में काम कर रहे थे, जब बच्ची गायब हो गई। खोजने पर उन्हें खून से सनी हालत मिली, और उन्होंने तुरंत सहायता मांगी। स्थानीय ग्रामीणों ने भी बच्ची को अस्पताल पहुंचाने में मदद की। जान्हा अस्पताल के चिकित्सकों ने बच्ची की स्थिति को स्थिर बताया, लेकिन मनोवैज्ञानिक सहायता की भी आवश्यकता जताई। बच्ची को विशेष कक्ष में रखा गया है, जहां 24 घंटे निगरानी हो रही है। पुलिस ने परिवार को गोपनीयता का आश्वासन दिया, ताकि बच्ची की पहचान सार्वजनिक न हो। यह घटना गुजरात में बच्चों के खिलाफ अपराधों की बढ़ती संख्या को उजागर करती है। राजकोट ग्रामीण क्षेत्र में पिछले कुछ महीनों में इसी तरह की कई घटनाएं दर्ज की गई हैं, जहां मजदूर वर्ग के बीच तनाव और गरीबी अपराधों का कारण बन रही है। पुलिस ने गांव में जागरूकता अभियान चलाने का फैसला लिया, जिसमें बच्चों की सुरक्षा पर जोर दिया जाएगा। आरोपी के परिवार ने भी घटना पर दुख व्यक्त किया, और कहा कि वे सहयोग करेंगे। जांच में यह सामने आया कि आरोपी का कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था, लेकिन उसकी मानसिक स्थिति पर सवाल उठे हैं। पुलिस ने मनोचिकित्सक से सलाह ली, और आरोपी की जांच जारी रखी। बच्ची के इलाज का खर्च सरकार वहन करेगी, और परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।

घटना के बाद आटकोट गांव में सन्नाटा छा गया, और ग्रामीणों ने बच्चों को घर से बाहर न खेलने की सलाह दी। पुलिस ने गांव के प्रवेश-निकास पर नाकाबंदी की, और संदिग्ध वाहनों की जांच शुरू की। आरोपी के सहकर्मियों से भी पूछताछ की गई, जो बताया कि वह सामान्य व्यवहार वाला व्यक्ति लगता था। बच्ची की हालत में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है, और चिकित्सकों ने कहा कि अगले कुछ दिनों में डिस्चार्ज संभव है। पुलिस ने केस को तेजी से कोर्ट में पेश करने का लक्ष्य रखा है, ताकि न्याय जल्द मिले। गुजरात सरकार ने इस तरह की घटनाओं पर सख्ती का निर्देश दिया, और पॉस्को एक्ट के तहत विशेष अदालतों में सुनवाई सुनिश्चित की।

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