SC ने दिल्ली-एनसीआर में पुरानी गाड़ियों पर सख्ती बढ़ाई: BS-IV से नीचे के 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों पर अब कार्रवाई संभव। 

दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए SC ने पुरानी गाड़ियों पर लगे अंतरिम संरक्षण को आंशिक रूप से हटा लिया है। कोर्ट

Dec 18, 2025 - 12:29
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SC ने दिल्ली-एनसीआर में पुरानी गाड़ियों पर सख्ती बढ़ाई: BS-IV से नीचे के 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों पर अब कार्रवाई संभव। 
SC ने दिल्ली-एनसीआर में पुरानी गाड़ियों पर सख्ती बढ़ाई: BS-IV से नीचे के 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों पर अब कार्रवाई संभव। 

दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए SC ने पुरानी गाड़ियों पर लगे अंतरिम संरक्षण को आंशिक रूप से हटा लिया है। कोर्ट ने 17 दिसंबर 2025 को अपने 12 अगस्त 2025 के आदेश में संशोधन किया, जिसमें पहले 10 साल से पुरानी डीजल गाड़ियों और 15 साल से पुरानी पेट्रोल गाड़ियों के मालिकों के खिलाफ कोई जबरदस्ती कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया गया था। अब यह संरक्षण केवल BS-IV और उससे ऊपर के उत्सर्जन मानक वाली गाड़ियों तक सीमित रहेगा, भले ही वे आयु सीमा से अधिक पुरानी क्यों न हों। इसका मतलब है कि BS-III या उससे नीचे के उत्सर्जन मानक वाली पुरानी गाड़ियां अब कार्रवाई के दायरे में आ गई हैं, जिसमें जब्ती, जुर्माना और डीरजिस्ट्रेशन जैसी कार्रवाई शामिल हो सकती हैं।

यह फैसला कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट की सिफारिश पर लिया गया, जिसने कोर्ट को बताया कि दिल्ली-एनसीआर में कुल 2.88 करोड़ वाहनों में से 93 प्रतिशत हल्के मोटर वाहन जैसे कार और दोपहिया हैं, और इनमें से लगभग 37 प्रतिशत BS-III या उससे पुराने मानकों वाले हैं। इन पुरानी गाड़ियों का उत्सर्जन स्तर आधुनिक BS-VI वाहनों की तुलना में काफी अधिक होता है, जो क्षेत्र की वायु गुणवत्ता पर भारी बोझ डालता है। कमीशन ने कहा कि अगस्त के अंतरिम आदेश के बाद पुरानी गाड़ियों की संख्या में वृद्धि हुई, जिससे प्रदूषण नियंत्रण में बाधा आई। मामले की जड़ें 2015 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के उस आदेश में हैं, जिसमें दिल्ली-एनसीआर में 10 साल से पुरानी डीजल और 15 साल से पुरानी पेट्रोल गाड़ियों पर प्रतिबंध लगाया गया था। इस आदेश को SC ने 2018 में बरकरार रखा। बाद में जुलाई 2025 में पुरानी गाड़ियों को ईंधन न देने का निर्देश जारी हुआ, लेकिन इससे उत्पन्न चुनौतियों और स्क्रैपिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में देरी के कारण दिल्ली सरकार ने कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की। अगस्त 2025 में कोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए सभी पुरानी गाड़ियों पर कार्रवाई रोक दी थी। अब प्रदूषण के बढ़ते स्तर और ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान के तहत सख्ती के बीच कोर्ट ने संशोधन किया।

संशोधित आदेश के अनुसार, केवल BS-IV या उससे नए मानक वाली गाड़ियां ही आयु सीमा पार करने के बावजूद संरक्षित रहेंगी। BS-III और नीचे की गाड़ियां, जो ज्यादातर 2010 से पहले रजिस्टर्ड हैं, अब प्रतिबंध के दायरे में हैं। इन पर जुर्माना 20 हजार रुपये तक पहली बार और दोहराने पर 50 हजार रुपये तक, ईंधन न देना, ऑटोमेटेड नंबर प्लेट रिकग्निशन कैमरों से निगरानी और जब्ती जैसी कार्रवाई हो सकती है। कमीशन का अनुमान है कि दिल्ली-एनसीआर में 50 लाख से अधिक एंड-ऑफ-लाइफ वाहन हैं, जो परिवहन से जुड़े उत्सर्जन का 40 प्रतिशत तक योगदान देते हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि वाहन प्रदूषण दिल्ली-एनसीआर की हवा में 41 प्रतिशत योगदान देता है, इसके बाद धूल और निर्माण कार्य 21 प्रतिशत, उद्योग 19 प्रतिशत हैं। पुरानी गाड़ियां मोबाइल प्रदूषण स्रोत के रूप में पहचानी जाती हैं। इस संशोधन से अधिक प्रदूषण करने वाली गाड़ियों को सड़क से हटाने में मदद मिलेगी, जबकि अपेक्षाकृत कम प्रदूषण वाली BS-IV गाड़ियां चलती रहेंगी। कोर्ट ने कमीशन को लंबी अवधि की योजना बनाने और शहरी गतिशीलता, किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए प्रोत्साहन, हरा आवरण बढ़ाने जैसे मुद्दों पर विचार करने को कहा।

यह आदेश दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों में बढ़ते स्मॉग के बीच आया है, जहां एयर क्वालिटी इंडेक्स अक्सर 400 से ऊपर पहुंच जाता है। पुरानी गाड़ियों की वापसी से उत्पन्न चुनौतियों को देखते हुए कमीशन ने कोर्ट से संशोधन की मांग की थी। अब राज्य परिवहन विभागों को पुरानी और अधिक प्रदूषण वाली गाड़ियों पर कार्रवाई करने की छूट मिल गई है। BS-IV मानक 2010 में लागू हुए थे, इसलिए उससे पहले की अधिकांश गाड़ियां अब प्रभावित होंगी। कोर्ट की पीठ ने स्पष्ट किया कि अगस्त आदेश का पैरा 2 अब संशोधित है, जिसमें केवल BS-IV और ऊपर की गाड़ियों पर आयु आधारित कार्रवाई नहीं होगी। इससे प्रदूषण नियंत्रण में संतुलन बनाए रखते हुए व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाया गया है। क्षेत्र में वाहनों की बड़ी संख्या को देखते हुए यह कदम वायु गुणवत्ता सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कार्रवाई की निगरानी मोबाइल चेकपॉइंट्स और कैमरों से होगी। यह फैसला 2018 के मूल प्रतिबंध को मजबूत करता है, लेकिन BS-IV गाड़ियों को राहत देकर मालिकों पर अत्यधिक बोझ नहीं डालता। कमीशन ने बताया कि BS-III गाड़ियां 15 साल से अधिक पुरानी हैं, जबकि BS-II 20 साल से अधिक। इनका उत्सर्जन BS-VI की तुलना में कई गुना अधिक है। कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों से समन्वय बनाए रखने को कहा है। आने वाले दिनों में विशेष अभियान चलाए जा सकते हैं।

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