सैकड़ों नीले ड्रमों वाली नकली दवाओं की फैक्ट्री पकड़ी: गाजियाबाद के बाद समालखा में दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की बड़ी छापेमारी, स्किन क्रीम बनाने का अवैध कारोबार उजागर। 

दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने नकली दवाओं के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में एक और बड़ी सफलता हासिल की है। गुप्त सूचना के आधार पर टीम ने

Dec 18, 2025 - 12:17
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सैकड़ों नीले ड्रमों वाली नकली दवाओं की फैक्ट्री पकड़ी: गाजियाबाद के बाद समालखा में दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की बड़ी छापेमारी, स्किन क्रीम बनाने का अवैध कारोबार उजागर। 
प्रतीकात्मक फोटो

दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने नकली दवाओं के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में एक और बड़ी सफलता हासिल की है। गुप्त सूचना के आधार पर टीम ने दिल्ली से लगभग 100 किलोमीटर दूर हरियाणा के समालखा क्षेत्र में एक अवैध फैक्ट्री पर छापा मारा और बड़े पैमाने पर नकली दवाओं के निर्माण का पर्दाफाश किया। फैक्ट्री में सैकड़ों नीले ड्रम, घुला हुआ पेस्ट, पैकिंग मटेरियल और दवाएं बनाने की मशीनें बरामद हुईं। यह कार्रवाई गाजियाबाद में कुछ दिनों पहले पकड़ी गई नकली दवा फैक्ट्री के बाद की गई है, जहां स्किन से जुड़ी नकली क्रीमों का उत्पादन हो रहा था। समालखा में पकड़ी गई फैक्ट्री में मुख्य रूप से स्किन इंफेक्शन और एलर्जी की治療 के लिए इस्तेमाल होने वाली नकली क्रीम तैयार की जा रही थीं। फैक्ट्री पूरी तरह संगठित तरीके से चल रही थी, जहां कच्चा माल मंगवाकर पेस्ट तैयार किया जाता था, फिर उसे ट्यूबों में भरकर नामी ब्रांड्स के लेबल लगाए जाते थे। बरामद सामान में नीले ड्रमों में भरा हुआ रसायनिक पेस्ट, तैयार क्रीम की बड़ी मात्रा, खाली ट्यूबें और पैकिंग मशीनें शामिल हैं। यह फैक्ट्री अवैध रूप से संचालित हो रही थी और यहां से नकली दवाएं विभिन्न क्षेत्रों में सप्लाई की जा रही थीं।

यह कार्रवाई दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की उस मुहिम का हिस्सा है जिसमें नकली दवाओं के नेटवर्क को तोड़ने पर फोकस किया जा रहा है। इससे पहले गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र में एक फैक्ट्री पकड़ी गई थी, जहां बेटनोवेट-सी, क्लोप-जी और स्किन-शाइन जैसी लोकप्रिय क्रीमों की नकली ट्यूबें बनाई जा रही थीं। वहां से हजारों तैयार ट्यूबें, सैकड़ों किलोग्राम तैयार पेस्ट, खाली ट्यूबें और मशीनरी बरामद हुई थी। दोनों मामलों में नकली दवाएं नामी कंपनियों के ब्रांड नाम से बनाकर बाजार में सप्लाई की जा रही थीं, जो जन स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही थीं। समालखा वाली फैक्ट्री में पाए गए नीले ड्रमों में रसायनिक मिश्रण भरा हुआ था, जो क्रीम बनाने के लिए इस्तेमाल होता था। फैक्ट्री के अंदर घुला हुआ पेस्ट बड़ी मात्रा में तैयार हालत में मिला, जो ट्यूबों में भरने के लिए रखा गया था। मशीनें मिक्सिंग, फिलिंग और सीलिंग के लिए लगी हुई थीं। फैक्ट्री में कोई वैध लाइसेंस नहीं था और यह पूरी तरह अवैध तरीके से चल रही थी। यहां से नकली दवाएं दिल्ली-एनसीआर सहित अन्य क्षेत्रों में भेजी जा रही थीं।

दिल्ली पुलिस की टीम ने गुप्त सूचना मिलने पर तुरंत कार्रवाई की और फैक्ट्री पर छापा मारकर पूरे ऑपरेशन को रोक दिया। बरामद सामान की कीमत करोड़ों रुपये बताई जा रही है। यह फैक्ट्री बड़े पैमाने पर उत्पादन कर रही थी और इसका नेटवर्क काफी विस्तृत था। नकली दवाएं बनाने में इस्तेमाल होने वाले रसायन अलग-अलग जगहों से मंगवाए जाते थे। तैयार उत्पाद को असली ब्रांड्स की तरह पैक करके बाजार में उतारा जाता था। यह मामला स्किन से जुड़ी दवाओं की नकल पर केंद्रित है, जहां लोकप्रिय क्रीमों की डुप्लीकेट ट्यूबें बनाई जा रही थीं। इन नकली दवाओं का इस्तेमाल करने से मरीजों को गंभीर नुकसान हो सकता था, क्योंकि इनमें जरूरी सक्रिय तत्व नहीं होते या हानिकारक रसायन मिले होते हैं। पुलिस ने फैक्ट्री से सभी मशीनें और सामग्री जब्त कर ली है और आगे की जांच जारी है। गाजियाबाद और समालखा दोनों जगहों पर पकड़ी गई फैक्टरियों से पता चलता है कि नकली दवाओं का कारोबार दिल्ली-एनसीआर में फैला हुआ है। ये फैक्टरियां किराए के परिसरों या छिपी हुई जगहों पर चलाई जा रही थीं। पुलिस की लगातार कार्रवाइयों से ऐसे रैकेट्स पर लगाम लग रही है। समालखा में छापेमारी के दौरान फैक्ट्री का पूरा सेटअप उजागर हुआ, जहां उत्पादन से पैकिंग तक की पूरी चेन मौजूद थी।

नकली दवाओं का यह कारोबार जनता की सेहत से खिलवाड़ कर रहा था। फैक्ट्री में पाए गए नीले ड्रम और पेस्ट से साफ पता चलता है कि बड़े स्तर पर उत्पादन हो रहा था। पुलिस ने सभी बरामद सामान को सील कर दिया है और संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। जांच में सप्लाई चेन और अन्य संलिप्त लोगों का पता लगाया जा रहा है। यह कार्रवाई नकली दवाओं के खिलाफ चल रही मुहिम को मजबूती देती है। समालखा और गाजियाबाद दोनों मामलों में स्किन ट्रीटमेंट वाली क्रीमों पर फोकस था। फैक्टरियों में कोई गुणवत्ता नियंत्रण नहीं था और उत्पाद असुरक्षित थे। पुलिस की टीम ने दोनों जगहों पर सफलतापूर्वक छापेमारी की और अवैध उत्पादन को रोका। आगे की जांच में नकली दवाओं की सप्लाई कहां-कहां हो रही थी, इसका पता लगाया जा रहा है। ये फैक्टरियां बिना लाइसेंस के चल रही थीं और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट का उल्लंघन कर रही थीं। बरामद सामान से अनुमान लगाया जा रहा है कि करोड़ों का कारोबार हो रहा था। पुलिस ने फैक्टरियों को सील कर दिया है और मामले की गहराई तक जांच जारी है।

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