दिल्ली पुलिस ने चीन आधारित ऑपरेटरों द्वारा संचालित इंटरस्टेट साइबर क्राइम मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया, आठ आरोपियों को किया गिरफ्तार।

दिल्ली पुलिस ने एक संगठित अंतरराज्यीय साइबर क्राइम सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है, जो चीन स्थित ऑपरेटरों द्वारा रिमोटली कंट्रोल किया जा

Jan 14, 2026 - 12:45
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दिल्ली पुलिस ने चीन आधारित ऑपरेटरों द्वारा संचालित इंटरस्टेट साइबर क्राइम मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया, आठ आरोपियों को किया गिरफ्तार।
दिल्ली पुलिस ने चीन आधारित ऑपरेटरों द्वारा संचालित इंटरस्टेट साइबर क्राइम मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया, आठ आरोपियों को किया गिरफ्तार।

दिल्ली पुलिस ने एक संगठित अंतरराज्यीय साइबर क्राइम सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है, जो चीन स्थित ऑपरेटरों द्वारा रिमोटली कंट्रोल किया जा रहा था। यह सिंडिकेट दिल्ली-एनसीआर और देश के विभिन्न हिस्सों में सक्रिय था। पुलिस ने आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो विभिन्न स्थानों जैसे दिल्ली, गाजियाबाद, मुरादाबाद, बरेली, रामपुर और महाराष्ट्र से पकड़े गए। जांच में 15 करोड़ रुपये के संदिग्ध फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन का पता चला है। सिंडिकेट सोशल मीडिया चैनलों के जरिए बैंकिंग क्रेडेंशियल्स शेयर करता था और मैलिशियस APK फाइलों का उपयोग कर OTP बाईपास करता था। फ्रॉड की राशि को म्यूल बैंक अकाउंट्स के माध्यम से रूट किया जाता था, जिसे बाद में USDT क्रिप्टोकरेंसी में कन्वर्ट कर चीन आधारित ऑपरेटरों तक पहुंचाया जाता था। पुलिस ने आरोपियों के पास से 4.70 लाख रुपये नकद, 14 मोबाइल फोन, 20 सिम कार्ड और सात डेबिट कार्ड बरामद किए हैं।

मामला नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर तमिलनाडु की एक महिला सोर्ना सुंदरी की शिकायत से सामने आया, जिन्होंने सितंबर पिछले साल अपने बैंक अकाउंट से 6000 रुपये के फ्रॉड ट्रांसफर की रिपोर्ट की। इस शिकायत के बाद पुलिस ने बेनिफिशियरी अकाउंट की जांच की, जो ईस्ट दिल्ली के एक प्राइवेट बैंक ब्रांच में था और यह एक म्यूल अकाउंट निकला, जिसे गाजियाबाद निवासी द्वारा संचालित किया जा रहा था। बैंक स्टेटमेंट्स, इंटरनेट बैंकिंग लॉग्स और आईपी एड्रेस की गहन जांच से सिंडिकेट का खुलासा हुआ। पुलिस ने पाया कि मुख्य आरोपी और उसके साथी एक संगठित मॉड्यूल का हिस्सा थे, जिसमें कम से कम 85 म्यूल बैंक अकाउंट्स विभिन्न बैंकों में ट्रेस किए गए। इन अकाउंट्स से जुड़ी 600 से अधिक NCRP शिकायतें सामने आई हैं।

सिंडिकेट की कार्यप्रणाली में म्यूल अकाउंट्स उपलब्ध कराना प्रमुख भूमिका निभाता था। आरोपी म्यूल अकाउंट्स प्रदान करते थे और साइबर फ्रॉड से प्राप्त राशि को निकालने में सहायता करते थे। WhatsApp, Telegram और SMS फॉरवर्डर APK फाइलों का उपयोग कर म्यूल अकाउंट्स को कंट्रोल किया जाता था। फ्रॉड की राशि को चीन आधारित ऑपरेटरों तक पहुंचाने के बाद इसे KuCoin और Binance जैसे प्लेटफॉर्म्स पर USDT क्रिप्टोकरेंसी में बदल दिया जाता था। पुलिस ने विभिन्न आरोपियों की भूमिकाओं को स्पष्ट किया है, जिसमें मुख्य अकाउंट प्रोक्योरर्स, क्रिप्टो कन्वर्शन हैंडलर्स, कमीशन चैनलर्स और SMS फॉरवर्डर APK मैनेजर्स शामिल थे। एक आरोपी को 200 से अधिक NCRP अकाउंट्स से जुड़ा बताया गया है।

जांच टीम ने बैंक स्टेटमेंट्स और तकनीकी डेटा का विश्लेषण कर आरोपियों को विभिन्न राज्यों से गिरफ्तार किया। सिंडिकेट में मल्टी-लेयर्ड ऑपरेशन था, जिसमें फ्रॉड प्रोसीड्स को म्यूल अकाउंट्स के जरिए रूट किया जाता था। पुलिस ने पीड़ितों की पहचान करने, मनी ट्रेल ट्रैक करने और विदेशी हैंडलर्स को ट्रेस करने की प्रक्रिया जारी रखी है। गिरफ्तारी के बाद बरामद डिवाइसेज और दस्तावेजों की जांच से नेटवर्क की गहराई का पता चला।

यह कार्रवाई दिल्ली पुलिस की साइबर क्राइम के खिलाफ चल रही मुहिम का हिस्सा है, जिसमें विभिन्न टीमों ने समन्वय से काम किया। सिंडिकेट की गतिविधियां देशव्यापी थीं और इसमें सोशल मीडिया के माध्यम से रिमोट कंट्रोल प्रमुख था। पुलिस ने संदिग्ध ट्रांजैक्शन की सूची तैयार की है और पीड़ितों को सूचित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ऑपरेशन में तकनीकी जांच और फील्ड वर्क के आधार पर आरोपियों को पकड़ा गया। सिंडिकेट ने मैलिशियस APK फाइलों से बैंकिंग सिक्योरिटी को बाईपास किया और फंड्स को साइफन किया। पुलिस ने आगे की जांच में और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई है।

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