रक्षा मंत्रालय इस हफ्ते 3.25 लाख करोड़ की 114 राफेल लड़ाकू विमानों की मेगा डील पर करेगा उच्च स्तरीय बैठक।

रक्षा मंत्रालय इस हफ्ते एक उच्च स्तरीय बैठक में फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के प्रस्ताव पर चर्चा करने जा रहा है। यह प्रस्ताव भारतीय

Jan 14, 2026 - 12:50
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रक्षा मंत्रालय इस हफ्ते 3.25 लाख करोड़ की 114 राफेल लड़ाकू विमानों की मेगा डील पर करेगा उच्च स्तरीय बैठक।
रक्षा मंत्रालय इस हफ्ते 3.25 लाख करोड़ की 114 राफेल लड़ाकू विमानों की मेगा डील पर करेगा उच्च स्तरीय बैठक।
  • फ्रांस से 114 राफेल विमानों की खरीद प्रस्ताव पर चर्चा, अधिकांश भारत में बनेगे 30 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री के साथ
  • भारतीय वायुसेना को मिलेंगे 114 नए राफेल, 12-18 फ्लाई-वे कंडीशन में आएंगे, कुल फ्लीट 176 तक पहुंचेगी

रक्षा मंत्रालय इस हफ्ते एक उच्च स्तरीय बैठक में फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के प्रस्ताव पर चर्चा करने जा रहा है। यह प्रस्ताव भारतीय वायुसेना द्वारा तैयार किया गया स्टेटमेंट ऑफ केस पर आधारित है, जो कुछ महीने पहले रक्षा मंत्रालय को प्राप्त हुआ था। इस डील की अनुमानित लागत लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये है, जो इसे भारत का अब तक का सबसे बड़ा रक्षा सौदा बना सकता है। प्रस्ताव के अनुसार, अधिकांश विमानों का निर्माण भारत में होगा, जिसमें लगभग 30 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया जाएगा। शुरुआती 12 से 18 राफेल विमान फ्लाई-वे कंडीशन में फ्रांस से सीधे प्राप्त किए जाएंगे, ताकि भारतीय वायुसेना को तुरंत इंडक्शन का लाभ मिल सके। यह सौदा सरकार-से-सरकार आधार पर होगा, जिसमें भारतीय हथियारों और स्वदेशी सिस्टम्स को राफेल विमानों में एकीकृत करने की अनुमति फ्रांस से मांगी जा रही है। स्रोत कोड फ्रांस के पास ही रहेंगे। यह प्रस्ताव क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए तैयार किया गया है, जहां भारतीय वायुसेना को लड़ाकू विमानों की तत्काल आवश्यकता है।

इस डील के मंजूर होने पर भारतीय सैन्य बलों में राफेल विमानों की कुल संख्या 176 तक पहुंच जाएगी। वर्तमान में भारतीय वायुसेना के पास 36 राफेल विमान पहले से संचालित हैं। इसके अलावा, भारतीय नौसेना ने पिछले साल 26 राफेल-एम (मरीन) विमानों का आदेश दिया है। यह विस्तार भारतीय वायुसेना की लड़ाकू क्षमता को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाएगा। प्रस्ताव में भारत में मैन्युफैक्चरिंग पर जोर दिया गया है, जो मेक इन इंडिया पहल को मजबूती देगा। फ्रांस की कंपनी दसॉल्ट एविएशन ने पहले से ही भारत में फ्रेंच-ओरिजिन लड़ाकू विमानों के रखरखाव के लिए एक इकाई स्थापित की है। भारतीय एयरोस्पेस कंपनियां जैसे टाटा मैन्युफैक्चरिंग और सपोर्ट में भूमिका निभाएंगी। फ्रांस राफेल के एम-88 इंजनों के लिए हैदराबाद में मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल सुविधा स्थापित करने की योजना बना रहा है।

प्रस्ताव की चर्चा अगले दो-तीन दिनों में होने वाली उच्च स्तरीय बैठक में होगी। यदि यह मंजूर हो जाता है, तो आगे कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी से अंतिम मंजूरी ली जाएगी। यह डील मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट कार्यक्रम से जुड़ी है, जहां 114 आधुनिक लड़ाकू विमानों की आवश्यकता है। अमेरिका और रूस ने अपनी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान एफ-35 और एसयू-57 की पेशकश की है, लेकिन भारत राफेल प्रस्ताव पर आगे बढ़ रहा है। राफेल विमानों का प्रदर्शन ऑपरेशन सिंदूर में उल्लेखनीय रहा, जहां इसने स्पेक्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट का उपयोग कर चीनी पीएल-15 एयर-टू-एयर मिसाइलों को हराया।

भारतीय वायुसेना की फाइटर जेट संरचना मुख्य रूप से एसयू-30 एमकेआई, राफेल और स्वदेशी परियोजनाओं पर आधारित होगी। भारत ने पहले से 180 एलसीए तेजस एमके-1ए विमानों का आदेश दिया है और 2035 के बाद स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान को बड़ी संख्या में शामिल करने की योजना है। क्षेत्रीय खतरे की धारणा को देखते हुए लड़ाकू विमानों की तत्काल इंडक्शन जरूरी है। प्रस्ताव में स्वदेशी सामग्री को बढ़ाने पर फोकस है, हालांकि यह मेक इन इंडिया के सामान्य 50-60 प्रतिशत से कम है।

फ्रांस के साथ यह सौदा रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करेगा। दसॉल्ट एविएशन भारत में फ्रेंच-ओरिजिन विमानों के रखरखाव के लिए पहले से सक्रिय है। भारतीय कंपनियां मैन्युफैक्चरिंग में भागीदारी करेंगी। हैदराबाद में एम-88 इंजन सुविधा से फ्रेंच-ओरिजिन विमानों की तैयारियों में सुधार होगा। यह प्रस्ताव भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाने के साथ-साथ घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देगा। बैठक के बाद आगे की प्रक्रिया तेज होगी। डील मंजूर होने पर यह भारत-फ्रांस रक्षा सहयोग का एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

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