Trending News: बलूच लड़ाकों ने पाकिस्तानिन शहर सुराब पर किया कब्ज़ा, पाकिस्तान में बढ़ता बलूच विद्रोह।
बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के सुराब शहर पर कब्जे का दावा किया, जिसने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय....
Trending News: बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के सुराब शहर पर कब्जे का दावा किया, जिसने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है। बीएलए के प्रवक्ता जीयंद बलूच ने एक बयान में कहा कि उनके स्वतंत्रता सेनानियों ने शहर के प्रमुख सरकारी प्रतिष्ठानों, जैसे पुलिस स्टेशन, लेवी स्टेशन, और बैंकों पर नियंत्रण स्थापित कर लिया है। इसके साथ ही, क्वेटा-कराची और सुराब-गिदर राजमार्गों पर नाकाबंदी और गश्त शुरू की गई है। यह घटना बलूचिस्तान में दशकों से चल रहे अलगाववादी आंदोलन की तीव्रता को दर्शाती है और पाकिस्तानी सरकार के लिए एक गंभीर चुनौती बनकर उभरी है। बलूच लिबरेशन आर्मी ने 30 मई 2025 को दावा किया कि उनके सैकड़ों हथियारबंद लड़ाकों ने सुराब शहर पर धावा बोलकर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को पीछे धकेल दिया। बीएलए के बयान के अनुसार, उन्होंने स्थानीय पुलिस स्टेशन, लेवी स्टेशन, और एक बैंक पर कब्जा कर लिया, साथ ही कई सरकारी वाहनों में आग लगा दी।
शहर में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है, और क्वेटा-कराची जैसे प्रमुख राजमार्गों पर नाकाबंदी के कारण क्षेत्र से संपर्क लगभग टूट गया है। खबरों के अनुसार, इस हमले में एक जिला अधिकारी, एडिशनल डिप्टी कमिश्नर हिदायत उल्लाह की दम घुटने से मौत हो गई, जिन्हें हथियारबंद हमलावरों ने एक कमरे में बंद कर दिया था। हालांकि, पाकिस्तानी सरकार और सेना ने अभी तक इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। कुछ सूत्रों ने बताया कि हथियारबंद लोग शहर में घुस आए, सरकारी अधिकारियों के घरों पर गोलीबारी की, और कुछ दुकानों में आग लगाई, लेकिन पूरे शहर पर बीएलए का नियंत्रण होने का दावा विवादास्पद है। पाकिस्तानी सेना ने जवाबी कार्रवाई शुरू करने की बात कही है, लेकिन स्थिति अभी भी अस्पष्ट और अस्थिर बनी हुई है।
- बलूच लिबरेशन आर्मी: पृष्ठभूमि और उद्देश्य
बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) एक सशस्त्र अलगाववादी संगठन है, जो बलूचिस्तान की आजादी की मांग करता है। यह संगठन 2000 के दशक से सक्रिय है और इसका मानना है कि पाकिस्तानी सरकार बलूच लोगों के साथ भेदभाव करती है, उनके प्राकृतिक संसाधनों (जैसे गैस और खनिज) का शोषण करती है, और उन्हें राजनीतिक व आर्थिक अधिकारों से वंचित रखती है। बीएलए ने समय-समय पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों, सरकारी प्रतिष्ठानों, और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) से जुड़ी परियोजनाओं पर हमले किए हैं।
बीएलए का दावा है कि बलूचिस्तान को 1948 में पाकिस्तान ने जबरन अपने कब्जे में लिया, जिसके बाद से बलूच लोग अपनी सांस्कृतिक, भाषाई, और क्षेत्रीय पहचान के लिए संघर्ष कर रहे हैं। संगठन ने हाल के वर्षों में अपनी गतिविधियां तेज की हैं, जिसमें जाफर एक्सप्रेस ट्रेन हाईजैक (मार्च 2025) और मंगोचर शहर पर कब्जे (मई 2025) जैसे बड़े हमले शामिल हैं। सुराब शहर, बलूचिस्तान के कलात डिवीजन में स्थित है और क्वेटा से लगभग 150 किलोमीटर दूर है। इसकी आबादी 35,000 से 45,000 के बीच है, और यह शहर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह प्रमुख राजमार्गों से जुड़ा है, जो क्वेटा और कराची जैसे शहरों को जोड़ते हैं। बीएलए का इस शहर पर कब्जे का दावा पाकिस्तानी सरकार के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि यह क्षेत्रीय स्थिरता और CPEC परियोजनाओं के लिए महत्वपूर्ण है।
पाकिस्तानी सेना और सरकार के लिए बलूच विद्रोह एक दीर्घकालिक चुनौती रहा है। बीएलए के हालिया हमलों, जैसे 6 मई 2025 को 12 सैनिकों की हत्या और 51 से अधिक सैन्य ठिकानों पर हमले, ने सेना की स्थिति को कमजोर किया है। पाकिस्तानी सेना ने दावा किया है कि उसने बीएलए के कई हमलों का जवाब दिया है, जैसे जाफर एक्सप्रेस हाईजैक में 104 यात्रियों को छुड़ाना, लेकिन बीएलए ने इन दावों को खारिज करते हुए अपनी ताकत का प्रदर्शन किया है। पाकिस्तानी सेना पर बलूच नागरिकों के जबरन गायब होने और हत्याओं का भी आरोप है। बलूचिस्तान मानवाधिकार परिषद के अनुसार, 2016 से अब तक 6,224 लोग लापता हुए हैं, और 2,766 लोगों की हत्या की गई है। इन आरोपों ने बीएलए जैसे संगठनों को और अधिक समर्थन दिलाया है।
बीएलए ने हाल ही में भारत और संयुक्त राष्ट्र से बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता देने की अपील की है। बलूच नेता मीर यार बलोच ने नई दिल्ली में दूतावास खोलने की अनुमति मांगी है, जिससे भारत और बलूच आंदोलन के बीच संबंधों की अटकलें तेज हो गई हैं। हालांकि, भारत ने इस मुद्दे पर सावधानी बरती है, क्योंकि बलूचिस्तान को समर्थन देने से कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान को भारत पर आरोप लगाने का मौका मिल सकता है।
पाकिस्तान ने भारत पर बीएलए को समर्थन देने का आरोप लगाया है, लेकिन इसके कोई ठोस सबूत नहीं दिए हैं। इसके विपरीत, बीएलए ने स्पष्ट किया है कि वह किसी विदेशी प्रॉक्सी का हिस्सा नहीं है और उसका संघर्ष स्वतंत्रता के लिए है। हाल के भारत-पाकिस्तान तनाव, विशेष रूप से ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत की एयरस्ट्राइक के बाद, बीएलए ने पाकिस्तानी सेना पर हमले तेज कर दिए हैं। सुराब शहर पर बीएलए के कब्जे का दावा, यदि सत्य है, तो यह बलूचिस्तान में पाकिस्तानी नियंत्रण के लिए एक गंभीर संकट का संकेत देता है।
यह घटना 1971 के बांग्लादेश अलगाव की याद दिलाती है, जब पाकिस्तान का एक हिस्सा टूटकर एक नया देश बना था। विश्लेषकों का मानना है कि यदि बलूच विद्रोह और तेज होता है, तो पाकिस्तान को क्षेत्रीय अखंडता के लिए खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा, बीएलए की गतिविधियां CPEC परियोजनाओं के लिए खतरा बन रही हैं, जो चीन के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं। इससे पाकिस्तान-चीन संबंधों पर भी असर पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र, इस स्थिति पर नजर रख रहा है, लेकिन अभी तक कोई ठोस हस्तक्षेप नहीं हुआ है।
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