Viral News: डोनाल्ड ट्रम्प फिर बोले- मेरी वजह से रुका भारत- पाक का परमाणु युद्ध, लोग बोले- ज्यादा मत फैला कर। 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में दावा किया कि उनके प्रशासन ने भारत और पाकिस्तान के बीच एक संभावित परमाणु युद्ध को रोकने में महत्वपूर्ण...

May 31, 2025 - 11:35
Jun 5, 2025 - 10:48
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Viral News: डोनाल्ड ट्रम्प फिर बोले- मेरी वजह से रुका भारत- पाक का परमाणु युद्ध, लोग बोले- ज्यादा मत फैला कर। 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में दावा किया कि उनके प्रशासन ने भारत और पाकिस्तान के बीच एक संभावित परमाणु युद्ध को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह बयान 10 मई 2025 को उनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट के बाद आया, जिसमें उन्होंने कहा कि अमेरिका की मध्यस्थता में रात भर चली बातचीत के बाद दोनों देश तत्काल युद्धविराम के लिए सहमत हुए। इस दावे ने न केवल भारत और पाकिस्तान में, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी हलचल मचा दी।

सोशल मीडिया पर इस बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं, जहां कुछ लोगों ने ट्रम्प की कूटनीतिक सफलता की सराहना की, तो कई ने इसे उनकी "बड़बोली शैली" और "अतिशयोक्ति" करार दिया। भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव मई 2025 की शुरुआत में तब चरम पर पहुंच गया, जब 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई। भारत ने इस हमले के लिए पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी संगठनों को जिम्मेदार ठहराया और इसके जवाब में 6-7 मई को "ऑपरेशन सिंदूर" के तहत पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर हवाई हमले किए। इन हमलों में अल-कायदा से जुड़े आतंकी अब्दुल रऊफ अजहर की मौत की खबर आई, जो 2002 में इजराइली पत्रकार डेनियल पर्ल की हत्या में शामिल था। 

इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता गया, जिसमें ड्रोन हमले और सीमा पर गोलीबारी की घटनाएं शामिल थीं। पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने चेतावनी दी कि यदि भारत ने युद्ध को और बढ़ाया, तो परमाणु युद्ध की स्थिति बन सकती है, जिसकी जिम्मेदारी भारत पर होगी। इस बीच, 10 मई 2025 को दोनों देशों के बीच युद्धविराम की घोषणा हुई, जिसे ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में अमेरिकी मध्यस्थता का परिणाम बताया। ट्रम्प ने अपने ट्रुथ सोशल पोस्ट में दावा किया, "मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि संयुक्त राज्य अमेरिका की मध्यस्थता में लंबी बातचीत के बाद भारत और पाकिस्तान ने पूरी तरह से और तत्काल युद्धविराम पर सहमति जताई है।" उन्होंने आगे कहा कि दोनों देश परमाणु हथियारों से लैस हैं और उनकी मध्यस्थता ने एक "खतरनाक परमाणु युद्ध" को रोका। 18 मई को फॉक्स न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में ट्रम्प ने दोहराया कि उनकी कूटनीति ने "दसियों लाख लोगों की जान बचाई," लेकिन उन्हें इसका उचित श्रेय नहीं मिला।

हालांकि, भारत ने ट्रम्प के दावों को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि युद्धविराम दोनों देशों के बीच सीधी बातचीत का परिणाम था, जिसमें किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता शामिल नहीं थी। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने 10 मई को प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुष्टि की कि पाकिस्तानी डीजीएमओ ने भारतीय डीजीएमओ से दोपहर 3:35 बजे फोन पर बात की, जिसके बाद युद्धविराम पर सहमति बनी। भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया में व्यापार या अन्य किसी मुद्दे पर कोई बातचीत नहीं हुई, जैसा कि ट्रम्प ने दावा किया था।

पाकिस्तान की प्रतिक्रिया अधिक सकारात्मक रही। विदेश मंत्री इसहाक डार ने सोशल मीडिया पर युद्धविराम की पुष्टि करते हुए कहा, "पाकिस्तान ने हमेशा अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से समझौता किए बिना शांति और सुरक्षा के लिए प्रयास किया है।" पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी ट्रम्प की तारीफ की, जिससे यह संकेत मिला कि पाकिस्तान अमेरिका की भूमिका को स्वीकार करने के लिए अधिक इच्छुक था। ट्रम्प के दावों ने सोशल मीडिया, विशेष रूप से एक्स पर, तीखी बहस छेड़ दी। कुछ भारतीय यूजर्स ने ट्रम्प की मध्यस्थता की बात को "बड़बोलापन" करार दिया।

उदाहरण के लिए, @GaganPratapMath ने लिखा, "ये ट्रम्प चचा बीच में इतने क्यूँ उछल रहे है ???? सारा credits ले रहे है ????," यह दर्शाते हुए कि कई लोग ट्रम्प के दावों को अतिशयोक्ति मानते हैं। @anupamnawada ने लिखा, "डोनाल्ड ट्रम्प के इस बयान से स्पष्ट है कि भारत ने कहाँ वार किया था," यह सुझाव देते हुए कि भारत ने पाकिस्तान के परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया हो सकता है, जिससे अमेरिका को हस्तक्षेप करना पड़ा। दूसरी ओर, कुछ यूजर्स ने ट्रम्प की कूटनीति की सराहना की। @ocjain4 ने लिखा कि भारत के विदेश मंत्री जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डोभाल ने अमेरिका को पाकिस्तान के परमाणु कदमों की जानकारी दी, जिसके बाद ट्रम्प ने हस्तक्षेप किया। हालांकि, ये दावे सत्यापित नहीं हैं और इन्हें सोशल मीडिया की अटकलों के रूप में देखा जाना चाहिए। 

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने एक्स पर सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रम्प के बार-बार के दावों का खंडन क्यों नहीं किया, इसे भारत की "चुप्पी" के रूप में देखा। यह दर्शाता है कि भारत में ट्रम्प के बयानों को लेकर राजनीतिक बहस भी शुरू हो गई है। विश्लेषकों का मानना है कि ट्रम्प का यह दावा उनकी विशिष्ट कूटनीतिक शैली का हिस्सा है, जिसमें वह हर उपलब्धि का श्रेय लेने की कोशिश करते हैं। अंतरराष्ट्रीय संबंधों की विशेषज्ञ स्वस्ति राव ने बीबीसी को बताया, "ट्रम्प को इतिहास की कम समझ है। वे रूस-यूक्रेन युद्ध, ईरान समझौते, और भारत-पाकिस्तान संघर्ष जैसे मुद्दों पर डील करवाकर श्रेय लेने की होड़ में रहते हैं।" 

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ट्रम्प की नीतियों ने भारत और पाकिस्तान के साथ अमेरिका के संबंधों को भी प्रभावित किया है। एक ओर, उन्होंने भारत को "टैरिफ किंग" कहकर आलोचना की और 26% रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने की घोषणा की। दूसरी ओर, उन्होंने पाकिस्तान को 40 करोड़ डॉलर की सैन्य सहायता और एफ-16 के रखरखाव के लिए मंजूरी दी, जिससे भारत में नाराजगी देखी गई। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के अजय श्रीवास्तव ने कहा कि ट्रम्प का बयान भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की ओर इशारा करता है, साथ ही यह भी दर्शाता है कि अमेरिका पाकिस्तान को रणनीतिक साझेदार मानता है।

ट्रम्प का परमाणु युद्ध का दावा विवादास्पद है। भारत और पाकिस्तान दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देश हैं, जिनके पास क्रमशः 160 और 170 परमाणु हथियार होने का अनुमान है। हालांकि, दोनों देशों ने ऐतिहासिक रूप से परमाणु हथियारों को निवारक (deterrent) के रूप में इस्तेमाल किया है, न कि युद्ध के हथियार के रूप में। विशेषज्ञों का मानना है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की कार्रवाइयां पारंपरिक हथियारों तक सीमित थीं, और परमाणु हथियारों के उपयोग का कोई ठोस सबूत नहीं है। भारत ने भी "न्यूक्लियर लीकेज" की अफवाहों का खंडन किया है। डोनाल्ड ट्रम्प का भारत-पाकिस्तान युद्धविराम में मध्यस्थता का दावा उनकी कूटनीतिक शैली का हिस्सा हो सकता है, लेकिन भारत ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है।

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