सफलता की असल कहानी- रात में सिर्फ 3.5 घंटे काम करके 2.69 करोड़ कमाए इस भारतीय मूल के उद्यमी ने, AI ट्रेनिंग से मिली बड़ी सफलता। 

यूके में रहने वाले भारतीय मूल के उद्यमी उत्कर्ष अमिताभ ने AI मॉडल्स को ट्रेन करने का साइड हसल शुरू किया है। वे माइक्रो1 नाम की डेटा लेबलिंग

Dec 27, 2025 - 12:40
Dec 27, 2025 - 13:04
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सफलता की असल कहानी- रात में सिर्फ 3.5 घंटे काम करके 2.69 करोड़ कमाए इस भारतीय मूल के उद्यमी ने, AI ट्रेनिंग से मिली बड़ी सफलता। 
सफलता की असल कहानी- रात में सिर्फ 3.5 घंटे काम करके 2.69 करोड़ कमाए इस भारतीय मूल के उद्यमी ने, AI ट्रेनिंग से मिली बड़ी सफलता। 

यूके में रहने वाले भारतीय मूल के उद्यमी उत्कर्ष अमिताभ ने AI मॉडल्स को ट्रेन करने का साइड हसल शुरू किया है। वे माइक्रो1 नाम की डेटा लेबलिंग और AI ट्रेनिंग स्टार्टअप के साथ फ्रीलांस भूमिका में काम करते हैं। इस काम के लिए उन्हें प्रति घंटे 200 डॉलर यानी करीब 18,000 रुपये मिलते हैं। उत्कर्ष रोजाना रात में औसतन 3.5 घंटे इस काम में लगाते हैं, जो आमतौर पर उनकी एक साल की बेटी के सो जाने के बाद शुरू होता है। यह असाइनमेंट जनवरी 2025 में शुरू हुआ था। उत्कर्ष ने इस भूमिका में अब तक करीब 300,000 डॉलर कमाए हैं, जो भारतीय रुपये में लगभग 2.69 करोड़ बैठते हैं। यह राशि प्रोजेक्ट कम्पलीशन बोनस को छोड़कर है। उत्कर्ष की इस कमाई ने दिखाया कि सही विशेषज्ञता के साथ पार्ट-टाइम काम भी बड़ी आय का स्रोत बन सकता है। 34 वर्षीय उत्कर्ष अमिताभ दिल्ली से हैं। उन्होंने दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री ली और फिर ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से मोरल फिलॉसफी में मास्टर्स किया। वर्तमान में वे ऑक्सफोर्ड सैड बिजनेस स्कूल में पीएचडी छात्र हैं, यूनिवर्सिटी में लेक्चरर हैं, लेखक हैं और नेटवर्क कैपिटल नाम की ग्लोबल मेंटरशिप प्लेटफॉर्म के सीईओ हैं। इतनी व्यस्तता के बावजूद उन्होंने यह साइड हसल शुरू किया।

माइक्रो1 कंपनी ने उत्कर्ष से जनवरी में संपर्क किया। कंपनी को उनकी बिजनेस स्ट्रेटजी, फाइनेंशियल मॉडलिंग और टेक में विशेषज्ञता की जरूरत थी। उत्कर्ष ने इसे अपनी रुचियों का विस्तार मानकर स्वीकार किया। वे इसे अतिरिक्त काम से ज्यादा अपनी दिलचस्पी का हिस्सा बताते हैं। यह काम लचीला है और सीमित घंटों में किया जा सकता है। उत्कर्ष का यह काम AI मॉडल्स को बेहतर बनाने से जुड़ा है। वे डेटा लेबलिंग और ट्रेनिंग में योगदान देते हैं। कंपनी के प्रवक्ता ने पुष्टि की कि उत्कर्ष ने जनवरी से अब तक करीब 300,000 डॉलर कमाए हैं। यह राशि उनके मुख्य कामों के अलावा है। उत्कर्ष ने कहा कि पैसा प्राथमिक प्रेरणा नहीं थी, बल्कि बौद्धिक जिज्ञासा थी। यह साइड हसल उत्कर्ष के लिए उनकी मौजूदा विशेषज्ञता का उपयोग करने का तरीका है। वे रात में बेटी के सोने के बाद काम करते हैं, जिससे दिन के अन्य काम प्रभावित नहीं होते। यह काम घर से ही किया जाता है और इसमें फ्लेक्सिबिलिटी है। उत्कर्ष की यह सफलता दिखाती है कि AI क्षेत्र में विशेषज्ञता कितनी मूल्यवान हो सकती है।

माइक्रो1 एक डेटा लेबलिंग स्टार्टअप है जो AI कंपनियों के लिए काम करती है। उत्कर्ष की भूमिका में वे AI को ट्रेन करने में मदद करते हैं। यह काम उच्च भुगतान वाला है क्योंकि इसमें विशेष ज्ञान की जरूरत पड़ती है। उत्कर्ष ने इसे अपनी रुचियों से जोड़कर अपनाया। उत्कर्ष की कमाई जनवरी 2025 से शुरू हुई और कुछ महीनों में ही 2.69 करोड़ तक पहुंच गई। यह राशि बोनस को अलग रखकर है। प्रति घंटे 200 डॉलर की दर से 3.5 घंटे रोजाना काम करने पर यह संभव हुआ। उत्कर्ष ने इसे अपनी दिनचर्या में फिट किया। यह कहानी AI स्किल्स की बढ़ती मांग को दर्शाती है। उत्कर्ष जैसे विशेषज्ञ पार्ट-टाइम काम से भी बड़ी कमाई कर रहे हैं। उनका यह हसल मुख्य करियर के साथ चल रहा है। उत्कर्ष ने कहा कि यह काम उनकी रुचियों को आगे बढ़ाने का माध्यम है। उत्कर्ष अमिताभ की यह उपलब्धि भारतीय मूल के लोगों के लिए प्रेरणा है। वे कई भूमिकाएं निभाते हुए भी यह साइड काम कर रहे हैं। कंपनी ने उनकी कमाई की पुष्टि की है। यह काम जनवरी से चल रहा है और तेजी से बढ़ा।

उत्कर्ष का बैकग्राउंड इंजीनियरिंग और फिलॉसफी का है। वे लेखक भी हैं और मेंटरशिप प्लेटफॉर्म चलाते हैं। AI ट्रेनिंग में उनका योगदान विशेषज्ञता पर आधारित है। यह साइड हसल उनकी व्यस्त जिंदगी में फिट बैठता है। यह मामला दिखाता है कि पार्ट-टाइम काम से भी करोड़ों की कमाई संभव है। उत्कर्ष ने रात के समय का उपयोग किया। उनकी कमाई 300,000 डॉलर तक पहुंची। यह राशि भारतीय मुद्रा में 2.69 करोड़ है। माइक्रो1 ने उत्कर्ष को उनकी स्किल्स के लिए चुना। वे बिजनेस और टेक में विशेषज्ञ हैं। यह काम AI विकास में मदद करता है। उत्कर्ष ने इसे बौद्धिक जिज्ञासा से जोड़ा। उत्कर्ष की दिनचर्या में पीएचडी, लेक्चरिंग, सीईओ भूमिका और पिता होने के बाद भी यह काम शामिल है। वे रात में 3.5 घंटे देते हैं। यह लचीलापन उन्हें सूट करता है। कमाई प्रति घंटे 18,000 रुपये है। यह सफलता कुछ महीनों में हासिल हुई। जनवरी से शुरू होकर दिसंबर तक यह राशि पहुंची। उत्कर्ष ने पैसा मुख्य मोटिव नहीं बताया। वे इसे रुचि का विस्तार मानते हैं। उत्कर्ष अमिताभ की यह कहानी AI क्षेत्र की संभावनाओं को उजागर करती है। पार्ट-टाइम विशेषज्ञता से बड़ी कमाई हो रही है। वे भारतीय मूल के हैं और यूके में रहते हैं। यह काम घर से होता है।

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