वाई-फाई हैकर्स से बचाने का सबसे जरूरी कदम- इस फीचर को तुरंत बंद करें, सिर्फ पासवर्ड बदलना काफी नहीं

WPS दो मुख्य तरीकों से काम करता है। पहला तरीका है PIN एंट्री जिसमें यूजर 8 अंकों का कोड डालता है और दूसरा तरीका है पुश बटन कनेक्शन जिसमें राउटर पर बटन दबाक

Jan 4, 2026 - 13:07
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वाई-फाई हैकर्स से बचाने का सबसे जरूरी कदम- इस फीचर को तुरंत बंद करें, सिर्फ पासवर्ड बदलना काफी नहीं
वाई-फाई हैकर्स से बचाने का सबसे जरूरी कदम- इस फीचर को तुरंत बंद करें, सिर्फ पासवर्ड बदलना काफी नहीं

वाई-फाई नेटवर्क की सुरक्षा के लिए पासवर्ड बदलना आम सलाह है लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह अकेला पर्याप्त नहीं होता। एक महत्वपूर्ण सेटिंग जिसे अक्सर नजरअंदाज किया जाता है वह है WPS यानी वाई-फाई प्रोटेक्टेड सेटअप। WPS फीचर डिवाइस को बिना पासवर्ड डाले आसानी से कनेक्ट करने की सुविधा देता है लेकिन यही फीचर हैकर्स के लिए सबसे बड़ा दरवाजा बन जाता है। WPS को PIN आधारित तरीके से चालू रखने पर केवल 8 अंकों का कोड होता है जिसकी कुल संभावनाएं 100 मिलियन होती हैं। आधुनिक टूल्स से यह PIN कुछ घंटों या दिनों में क्रैक किया जा सकता है। एक बार PIN क्रैक होने के बाद हैकर को राउटर का पूरा पासवर्ड मिल जाता है और वह नेटवर्क पर कंट्रोल हासिल कर लेता है। WPA2 और WPA3 जैसे मजबूत एन्क्रिप्शन होने के बावजूद WPS चालू रहने से पूरी सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है।

WPS दो मुख्य तरीकों से काम करता है। पहला तरीका है PIN एंट्री जिसमें यूजर 8 अंकों का कोड डालता है और दूसरा तरीका है पुश बटन कनेक्शन जिसमें राउटर पर बटन दबाकर डिवाइस को जोड़ा जाता है। PIN तरीका सबसे कमजोर होता है क्योंकि पहले चार अंक और बाद के चार अंकों में चेकसम होता है जिससे कुल ट्रायल्स घटकर 11,000 रह जाते हैं। हैकर्स Reaver, Pixie Dust और अन्य टूल्स का इस्तेमाल करके कुछ ही मिनटों में PIN क्रैक कर लेते हैं। पुश बटन तरीका थोड़ा सुरक्षित है लेकिन अगर कोई व्यक्ति राउटर के पास पहुंच जाए तो वह भी बटन दबाकर कनेक्ट हो सकता है। कई पुराने राउटर में WPS डिफॉल्ट रूप से चालू रहता है और यूजर्स इसे कभी बंद नहीं करते। इस वजह से लाखों घरेलू और छोटे ऑफिस नेटवर्क जोखिम में रहते हैं।

WPS को बंद करने की प्रक्रिया हर राउटर में अलग-अलग होती है लेकिन ज्यादातर मामलों में इसे वेब इंटरफेस से आसानी से डिसेबल किया जा सकता है। यूजर को राउटर का आईपी एड्रेस जैसे 192.168.1.1 या 192.168.0.1 ब्राउजर में डालना होता है। फिर एडमिन यूजरनेम और पासवर्ड से लॉगिन करके वायरलेस सेटिंग्स या एडवांस्ड सेटिंग्स में जाना होता है। वहां WPS या Wi-Fi Protected Setup का ऑप्शन मिलता है जिसे Disable या Off करना होता है। कुछ राउटर में अलग से WPS PIN और WPS Push Button को अलग-अलग बंद करने का विकल्प होता है। बंद करने के बाद कोई भी नया डिवाइस जोड़ने के लिए पासवर्ड ही इस्तेमाल करना पड़ता है। यह कदम लेने से नेटवर्क पर अनऑथराइज्ड एक्सेस की संभावना लगभग खत्म हो जाती है।

WPS के खतरे को लेकर सुरक्षा विशेषज्ञों ने कई बार चेतावनी दी है। 2011 में ही WPS PIN क्रैकिंग का पहला पब्लिक टूल सामने आया था जिसके बाद WPA2 के साथ भी सुरक्षा कमजोर हो गई। आज के समय में WPA3 सबसे मजबूत एन्क्रिप्शन है लेकिन अगर WPS चालू है तो WPA3 का फायदा भी नहीं मिलता। कई मैन्युफैक्चरर अब नए राउटर में WPS को डिफॉल्ट रूप से बंद रखते हैं लेकिन पुराने मॉडल में यह समस्या बनी हुई है। यूजर्स को नियमित रूप से राउटर फर्मवेयर अपडेट करना चाहिए क्योंकि अपडेट में WPS से जुड़ी कमजोरियां ठीक की जाती हैं। साथ ही मजबूत और यूनिक पासवर्ड का इस्तेमाल करना चाहिए जिसमें अक्षर, नंबर और स्पेशल कैरेक्टर शामिल हों।

WPS बंद करने के अलावा अन्य सुरक्षा उपाय भी जरूरी हैं। गेस्ट नेटवर्क का इस्तेमाल करना, SSID को छिपाना, MAC एड्रेस फिल्टरिंग चालू करना और अनावश्यक पोर्ट्स को बंद करना नेटवर्क को और सुरक्षित बनाता है। WPS को बंद करने से हैकर्स के लिए सबसे आसान एंट्री पॉइंट ब्लॉक हो जाता है। अगर कोई व्यक्ति PIN क्रैक नहीं कर पाता तो वह WPA2 या WPA3 को ब्रूट फोर्स करने की कोशिश करता है जो बहुत मुश्किल और समय लेने वाला काम है। इसलिए WPS डिसेबल करना सबसे पहले और सबसे प्रभावी कदम माना जाता है।

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