प्राइवेसी का संकट- सरकार ने दिया स्मार्टफोन लोकेशन ट्रैकिंग प्रस्ताव, सैमसंग-ऐप्पल का कड़ा विरोध, सांचर साथी पोर्टल से जुड़ी रिपोर्ट ने मचाई खलबली।
भारतीय सरकार स्मार्टफोन्स में हमेशा सक्रिय सैटेलाइट आधारित लोकेशन ट्रैकिंग को अनिवार्य करने पर विचार कर रही है, जिससे उपयोगकर्ताओं
भारतीय सरकार स्मार्टफोन्स में हमेशा सक्रिय सैटेलाइट आधारित लोकेशन ट्रैकिंग को अनिवार्य करने पर विचार कर रही है, जिससे उपयोगकर्ताओं की गोपनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यह प्रस्ताव टेलीकॉम इंडस्ट्री की सिफारिश पर आधारित है, जो सांचर साथी पोर्टल को मजबूत करने के उद्देश्य से लाया गया। सांचर साथी एक सरकारी प्लेटफॉर्म है, जो संदिग्ध धोखाधड़ी वाले संचार को रिपोर्ट करने और उपयोगकर्ताओं को सतर्क करने के लिए डिजाइन किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, सरकार इस सुविधा को सभी स्मार्टफोन्स में डिफॉल्ट रूप से चालू रखने की योजना बना रही है, ताकि उपयोगकर्ता अपने नाम से पंजीकृत अतिरिक्त मोबाइल कनेक्शनों की जांच कर सकें। लेकिन इस कदम का विरोध प्रमुख टेक कंपनियों ने किया है, जिनमें सैमसंग, ऐप्पल और गूगल शामिल हैं। इन कंपनियों का कहना है कि यह फोन को स्थायी निगरानी उपकरण में बदल देगा, जो उपयोगकर्ताओं की प्राइवेसी का उल्लंघन करेगा। प्रस्ताव की समीक्षा चल रही है, लेकिन कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि वे इस पर अमल नहीं करेंगी।
सांचर साथी पोर्टल की शुरुआत 2023 में हुई थी, जो उपयोगकर्ताओं को फिशिंग, स्मिशिंग और अन्य साइबर धोखाधड़ी से बचाने के लिए बनाया गया। यह प्लेटफॉर्म उपयोगकर्ताओं को अनुमति देता है कि वे संदिग्ध कॉल या मैसेज को रिपोर्ट करें, और यह जांचता है कि उनके नाम से कितने मोबाइल नंबर पंजीकृत हैं। अब सरकार इस पोर्टल को और मजबूत करने के लिए स्मार्टफोन्स में एडवांस्ड जीपीएस ट्रैकिंग को अनिवार्य करना चाहती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह सुविधा सैटेलाइट कनेक्टिविटी पर आधारित होगी, जो हमेशा चालू रहेगी। इसका मतलब है कि फोन की लोकेशन बिना उपयोगकर्ता की स्पष्ट सहमति के ट्रैक की जा सकेगी। टेलीकॉम सेक्टर के विशेषज्ञों ने इस प्रस्ताव को सुझाया है, ताकि धोखाधड़ी रोकने में आसानी हो। लेकिन प्राइवेसी एडवोकेट्स ने चेतावनी दी है कि यह डेटा संग्रहण का दुरुपयोग हो सकता है। सरकार ने कहा है कि यह केवल सुरक्षा उद्देश्यों के लिए है, लेकिन विवरण अभी स्पष्ट नहीं हैं।
सैमसंग ने इस प्रस्ताव का सबसे कड़ा विरोध दर्ज किया है। कंपनी के अधिकारियों ने कहा है कि स्मार्टफोन्स में हमेशा ऑन लोकेशन ट्रैकिंग बैटरी ड्रेन और डेटा प्राइवेसी का खतरा पैदा करेगी। सैमसंग के भारत प्रमुख ने रिपोर्ट में उल्लेख किया कि वे सरकार से इस पर पुनर्विचार करने की अपील करेंगे। इसी तरह, ऐप्पल ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस तरह के किसी भी मंडेट का पालन नहीं करेंगी। ऐप्पल के प्रवक्ता ने कहा कि उपयोगकर्ता की गोपनीयता कंपनी की प्राथमिकता है, और कोई भी फीचर जो बिना सहमति के डेटा एकत्र करे, वह उनके सिद्धांतों के विरुद्ध है। गूगल ने भी चिंता जताई है कि एंड्रॉयड डिवाइसेस पर इस तरह की मजबूरी उपयोगकर्ता अनुभव को प्रभावित करेगी। इन कंपनियों ने संयुक्त रूप से टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया को पत्र लिखा है, जिसमें प्रस्ताव को वापस लेने की मांग की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, यह विरोध नवंबर 2025 में शुरू हुआ, जब प्रस्ताव की ड्राफ्ट कॉपी लीक हुई।
सरकार का यह कदम साइबर सिक्योरिटी को मजबूत करने की दिशा में है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह मौजूदा कानूनों से परे चला जाता है। डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 के तहत उपयोगकर्ता की सहमति अनिवार्य है, लेकिन हमेशा ऑन ट्रैकिंग में यह सहमति कैसे ली जाएगी, यह अस्पष्ट है। सांचर साथी पोर्टल पर पहले से ही उपयोगकर्ता नाम से पंजीकृत नंबरों की जांच की सुविधा है, लेकिन लोकेशन ट्रैकिंग जोड़ने से यह और विस्तृत हो जाएगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार इस प्रस्ताव को टेलीकॉम एक्ट 2023 के तहत लागू करने की सोच रही है, जो डिजिटल संचार को रेगुलेट करता है। लेकिन टेक इंडस्ट्री ने चेतावनी दी है कि इससे फोन की कीमतें बढ़ेंगी, क्योंकि नई हार्डवेयर की जरूरत पड़ेगी। सैमसंग और ऐप्पल जैसे ब्रांड्स ने कहा है कि वे भारत में बिकने वाले फोन्स को अपडेट करने के लिए अतिरिक्त लागत वहन नहीं करेंगे।
हाल ही में एक समान विवाद हुआ, जब सरकार ने स्मार्टफोन्स में सांचर साथी ऐप को प्रीलोड करने का आदेश दिया था। यह ऐप उपयोगकर्ताओं को साइबर धोखाधड़ी से सतर्क करता है। लेकिन ऐप्पल, गूगल और सैमसंग ने विरोध किया, क्योंकि यह उपयोगकर्ता की गोपनीयता का उल्लंघन करता। रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने 2 दिसंबर 2025 को इस आदेश को वापस ले लिया। कंपनियों ने कहा था कि ऐप प्रीलोडिंग से डिवाइस स्पेस कम होगा और सिक्योरिटी रिस्क बढ़ेगा। ऐप्पल ने स्पष्ट किया कि वे किसी भी स्टेट-रन ऐप को फोर्सली इंस्टॉल नहीं करेंगे। गूगल ने कहा कि एंड्रॉयड पर ऐप स्टोर पॉलिसी के तहत यह संभव नहीं। सैमसंग ने भी समर्थन किया। इस बैकट्रैकिंग से साफ है कि टेक कंपनियां प्राइवेसी पर अडिग हैं। अब लोकेशन ट्रैकिंग प्रस्ताव पर भी यही प्रतिक्रिया मिल रही है।
प्रस्ताव की समीक्षा टेलीकॉम सेक्रेटरी के नेतृत्व में चल रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि दिसंबर 2025 के अंत तक फैसला लिया जा सकता है। यदि लागू हुआ, तो यह सभी स्मार्टफोन्स पर लागू होगा, जिसमें एंड्रॉयड और आईओएस दोनों शामिल हैं। उपयोगकर्ता को लोकेशन डेटा सांचर साथी पोर्टल पर शेयर करना पड़ेगा, जो सरकारी सर्वर पर स्टोर होगा। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इससे डेटा लीक का खतरा बढ़ेगा। सैमसंग ने कहा है कि सैटेलाइट ट्रैकिंग केवल इमरजेंसी मामलों में होनी चाहिए, न कि हमेशा। ऐप्पल ने यूरोपीय जीडीपीआर जैसे मानकों का हवाला दिया, जहां ऐसी ट्रैकिंग प्रतिबंधित है। गूगल ने कहा कि एंड्रॉयड पर लोकेशन सर्विसेस पहले से ही कंट्रोल्ड हैं। इन विरोधों से प्रस्ताव कमजोर पड़ रहा है।
सांचर साथी पोर्टल ने अब तक लाखों रिपोर्ट्स प्राप्त की हैं। यह उपयोगकर्ताओं को फर्जी लोन ऐप्स और स्पैम कॉल्स से बचाता है। लेकिन लोकेशन जोड़ने से यह और प्रभावी हो सकता है, क्योंकि धोखाधड़ी अक्सर लोकेशन पर आधारित होती है। फिर भी, प्राइवेसी ग्रुप्स ने कहा है कि यह संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। आर्टिकल 21 के तहत प्राइवेसी का अधिकार मौलिक है। रिपोर्ट में उल्लेख है कि सरकार ने कंपनियों से फीडबैक मांगा है। सैमसंग और ऐप्पल ने मीटिंग में हिस्सा लिया, जहां उन्होंने तकनीकी चुनौतियों का जिक्र किया। बैटरी लाइफ प्रभावित होगी, और हार्डवेयर अपग्रेड की जरूरत पड़ेगी।
भारत में स्मार्टफोन मार्केट में सैमसंग और ऐप्पल की मजबूत पकड़ है। सैमसंग का मार्केट शेयर 20 प्रतिशत से ऊपर है, जबकि ऐप्पल 5 प्रतिशत का है। इनका विरोध प्रस्ताव को प्रभावित कर सकता है। गूगल का एंड्रॉयड 90 प्रतिशत डिवाइसेस पर है। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनियां लॉबिंग कर रही हैं। सरकार ने कहा है कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है। लेकिन विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि वैकल्पिक तरीके अपनाए जाएं, जैसे ऑप्ट-इन लोकेशन शेयरिंग। सांचर साथी पर पहले से ही नाम-आधारित जांच है, जो पर्याप्त हो सकता है।
प्रस्ताव का ड्राफ्ट अक्टूबर 2025 में तैयार हुआ था। टेलीकॉम ऑपरेटर्स ने समर्थन किया, क्योंकि यह फ्रॉड कम करेगा। लेकिन टेक कंपनियां प्राइवेसी को प्राथमिकता दे रही हैं। सैमसंग ने कहा कि वे यूरोप में जीडीपीआर का पालन करती हैं, और भारत में भी वैसा ही चाहती हैं। ऐप्पल ने आईओएस की सिक्योरिटी को हाइलाइट किया। गूगल ने एंड्रॉयड प्राइवेसी सैंडबॉक्स का जिक्र किया। इन विरोधों से सरकार को पीछे हटना पड़ सकता है, जैसा कि ऐप प्रीलोडिंग में हुआ। रिपोर्ट में कहा गया है कि दिसंबर में फाइनल डिसीजन आएगा।
उपयोगकर्ताओं के लिए इसका मतलब है कि फोन लोकेशन हमेशा ट्रैक हो सकती है। सांचर साथी ऐप डाउनलोड करने वालों को पहले से ही कुछ डेटा शेयर करना पड़ता है। लेकिन अनिवार्य ट्रैकिंग से चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों ने कहा है कि डेटा स्टोरेज और शेयरिंग के नियम सख्त होने चाहिए। सरकार ने कहा है कि डेटा केवल सरकारी उपयोग के लिए होगा। लेकिन कंपनियों का डर है कि यह मिसयूज हो सकता है। सैमसंग और ऐप्पल ने संयुक्त स्टेटमेंट जारी किया, जिसमें प्राइवेसी का महत्व बताया गया।
यह विवाद साइबर लॉ के विकास को दर्शाता है। डिजिटल इंडिया के तहत सिक्योरिटी बढ़ रही है, लेकिन प्राइवेसी बैलेंस जरूरी है। सांचर साथी ने 2024 में करोड़ों रिपोर्ट्स हैंडल कीं। लोकेशन जोड़ने से यह और सटीक हो सकता है। लेकिन विरोध से प्रस्ताव में बदलाव संभव है। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनियां कानूनी कदम उठा सकती हैं। सैमसंग ने बैटरी और कॉस्ट इश्यूज उठाए। ऐप्पल ने यूजर चॉइस पर जोर दिया। गूगल ने डेवलपर इकोसिस्टम का हवाला दिया।
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